अल-काफिरून · 1/6
अनुवाद उच्चारण — अल-काफिरून
قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ ۝١
Qul yaa-ai yuhal kaafiroon
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ काफिरों
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • क़ुल (कह दीजिए) — यह अल्लाह तआला की ओर से पैगंबर ﷺ को आदेश है।
  • या अय्युहल काफ़िरून (ऐ काफ़िरों!) — यहाँ "काफ़िर" से मुराद वे लोग हैं जिन्होंने अल्लाह की वहदानिय्यत (एकता) और पैगंबर ﷺ की रिसालत (पैग़म्बरी) को झुठलाया और उनके मुक़ाबले में कुफ़्र (इनकार) पर क़ायम रहे।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला अपने प्यारे नबी ﷺ को हुक्म देता है कि वे काफ़िरों को साफ़-साफ़ ख़िताब करके कहें: "ऐ काफ़िरों!" यह ख़िताब उन मुशरिकीन (बुतपरस्तों) को है जिन्होंने अल्लाह के साथ दूसरों की इबादत (पूजा) को जोड़ा और पैगंबर ﷺ की दावत को क़बूल करने से इनकार किया।

इस आयत के नुज़ूल (अवतरण) का एक ख़ास सबब यह है कि मक्का के मुशरिकीन के एक गिरोह ने पैगंबर ﷺ के पास आकर प्रस्ताव रखा कि "आप एक साल हमारे देवताओं की इबादत कर लीजिए, और हम एक साल आपके अल्लाह की इबादत कर लेंगे" — यानी वे धर्म में समझौता (मुआहिदा) चाहते थे। इस पर अल्लाह ने यह सूरह नाज़िल की, जिसमें काफ़िरों से बिल्कुल अलग होने का ऐलान कराया गया।

इस आयत से हमें कई अहम सबक़ मिलते हैं:

  1. सच्चाई पर अडिग रहना: इस्लाम में बातिल (असत्य) के साथ किसी भी तरह का समझौता जायज़ नहीं है। अल्लाह की इबादत में किसी को शरीक (साझीदार) बनाना कभी क़बूल नहीं किया जा सकता।
  2. स्पष्ट और दृढ़ रुख: मुसलमान को अपने ईमान (विश्वास) में साफ़ और दृढ़ होना चाहिए। काफ़िरों को उनके कुफ़्र पर साफ़ ख़िताब करना और उनसे बराअत (अलगाव) का ऐलान करना ही सच्चे मोमिन की पहचान है।
  3. दावत का अंदाज़: पैगंबर ﷺ को हुक्म दिया गया कि वे काफ़िरों को "ऐ काफ़िरों!" कहकर ख़िताब करें — यह उन्हें उनकी असल हक़ीक़त से आगाह करना है, ताकि वे जान लें कि उनका कुफ़्र उन्हें अल्लाह की रहमत से दूर कर रहा है। यह एक तरह से उन्हें जगाने और सच्चाई की तरफ़ बुलाने का ज़रिया भी है।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने दीन (धर्म) पर पूरा भरोसा रखना चाहिए और किसी भी हालत में बातिल के आगे झुकना नहीं चाहिए। अल्लाह की इबादत ही सच्ची इबादत है, और उसी की राह पर चलने वालों के लिए ही कामयाबी और इज़्ज़त है। आज भी हमें इसी जज़्बे (जोश) के साथ अपने ईमान पर क़ायम रहना है और किसी भी दबाव या लालच में आकर अपने दीन से समझौता नहीं करना है।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-3 — अल-काफिरून

1قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ काफिरों
2لَا أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ
तुम जिन चीज़ों को पूजते हो, मैं उनको नहीं पूजता
3وَلَا أَنتُمْ عَابِدُونَ مَا أَعْبُدُ
और जिस (ख़ुदा) की मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत नहीं करते
अल-काफिरूनकुरान सूची
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1आयत

अनुवाद — अल-काफिरून 1

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सूरा आयत 1/6 — अल-काफिरून الكافرون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-काफिरून सुनें, अल-काफिरून अनुवाद, अल-काफिरून mp3, अल-काफिरून pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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