अल-काफिरून · 2/6
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-काफिरून
لَا أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ ۝٢
Laa a`budu ma t`abudoon
📖 हिंदी अर्थ
तुम जिन चीज़ों को पूजते हो, मैं उनको नहीं पूजता

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَا أَعْبُدُ: मैं इबादत नहीं करता (वर्तमान और भविष्य दोनों को शामिल करता है)
  • مَا تَعْبُدُونَ: जिसे तुम पूजते हो (बुत, मूर्तियाँ, और झूठे देवता)

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हमारे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ को सिखा रहे हैं कि वे कुफ्फ़ार से साफ़ और स्पष्ट शब्दों में कहें: "मैं उन चीज़ों की इबादत नहीं करता जिन्हें तुम पूजते हो।" यह एक कटु सत्य और स्पष्ट घोषणा है कि मुसलमान और मुशरिक के बीच कभी समझौता नहीं हो सकता।

यहाँ "मा" (जो) का प्रयोग उन सभी चीज़ों को शामिल करता है जिन्हें कुफ्फ़ार पूजते थे — चाहे वे मूर्तियाँ हों, पत्थर हों, पेड़ हों, या कोई और झूठा माबूद। नबी ﷺ न केवल वर्तमान में बल्कि भविष्य में भी इनकी इबादत से बिल्कुल मुक्त हैं। यह एक ऐसा रुख़ है जो इस्लाम की तौहीद (एकेश्वरवाद) की मौलिक शिक्षा को प्रस्तुत करता है — कि सिर्फ़ अल्लाह ही इबादत के लायक़ है, और उसके सिवा हर चीज़ की इबादत बिल्कुल बातिल और निरर्थक है।

यह आयत हमें सिखाती है कि एक मोमिन का ईमान अडिग और स्पष्ट होना चाहिए। हमें अपने अक़ीदे में कोई समझौता नहीं करना चाहिए। अगर पूरी दुनिया भी बुतपरस्ती पर इकट्ठा हो जाए, तो भी एक सच्चा मुसलमान अपने रब की इबादत पर क़ायम रहेगा और झूठ को कभी स्वीकार नहीं करेगा। यही वह पवित्र सिद्धांत है जो मुसलमान को ग़ुलामी से आज़ाद करता है — कि वह सिर्फ़ अल्लाह का बंदा है, किसी और का नहीं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें यह भी बताती है कि इस्लाम एक स्पष्ट और सच्चा दीन है। यहाँ कोई धोखा, कोई मिलावट, और कोई झूठ नहीं है। हम अपने ईमान पर गर्व करते हैं, क्योंकि हम उस रब की इबादत करते हैं जिसने आसमान और ज़मीन पैदा की, जो सब कुछ सुनता और देखता है, और जो अपने बंदों पर असीम रहमत करने वाला है। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 1-4 — सूरा अल-काफिरून

1قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ऐ काफिरों
2لَا أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ
तुम जिन चीज़ों को पूजते हो, मैं उनको नहीं पूजता
3وَلَا أَنتُمْ عَابِدُونَ مَا أَعْبُدُ
और जिस (ख़ुदा) की मैं इबादत करता हूँ उसकी तुम इबादत नहीं करते
4وَلَا أَنَا عَابِدٌ مَّا عَبَدتُّمْ
और जिन्हें तुम पूजते हो मैं उनका पूजने वाला नहीं
अल-काफिरूनकुरान सूची
6आयत
मक्कीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — अल-काफिरून 2

सूरा अल-काफिरून आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम जिन चीज़ों को पूजते हो, मैं उनको नहीं पूजता

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Thursday, October 1, 2026

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