Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الأَعْرَابِ: बद्दू (ग्रामीण अरब), जो शहरों में नहीं बल्कि जंगलों और मरुस्थलों में रहते हैं।
- مَرَدُوا عَلَى النِّفَاقِ: निफ़ाक़ (दोहरेपन) पर जम गए, उसमें माहिर हो गए और उसी पर डटे रहे।
- لَا تَعْلَمُهُمْ: आप (ऐ नबी) उन्हें नहीं जानते।
- سَنُعَذِّبُهُم مَّرَّتَيْنِ: हम उन्हें दो बार अज़ाब देंगे।
तफ़सीर:
ऐ ईमानवालों! तुम्हारे आस-पास (मदीना के इर्द-गिर्द) रहने वाले कुछ बद्दू (ग्रामीण) भी मुनाफ़िक़ (दो-मुँहे) हैं, और मदीना शहर के कुछ निवासी भी ऐसे हैं जो निफ़ाक़ पर जम गए हैं और उसमें इतने पक्के हो गए हैं कि उनका दोहरापन छिपा हुआ है। ऐ नबी! आप उन्हें नहीं पहचान सकते, लेकिन हम (अल्लाह) उन्हें पूरी तरह जानते हैं। हम उन्हें दो बार अज़ाब देंगे: पहली बार दुनिया में — उनके दोहरेपन का भंडाफोड़ करके, उन्हें क़त्ल, क़ैद और रुसवाई के ज़रिए सज़ा देंगे; दूसरी बार क़ब्र के अज़ाब के रूप में। फिर क़ियामत के दिन उन्हें बड़े भारी अज़ाब (जहन्नुम की आग) की ओर लौटाया जाएगा, जो सबसे सख्त और हमेशा रहने वाला अज़ाब है।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है — इंसान चाहे कितना भी अपने दिल की बात छिपाए, अल्लाह उसे खूब जानता है। इससे हमें सीख मिलती है कि अपने दिल और इरादों को साफ़ रखें, क्योंकि अल्लाह से कुछ छिपा नहीं है।
- मुनाफ़िक़ी (दोहरेपन) सबसे बुरी आदत है — यह वह बीमारी है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में रुसवा कर देती है। इसलिए हमें हमेशा सच्चाई और सीधेपन पर चलना चाहिए।
- अल्लाह की सज़ा अटल है — मुनाफ़िक़ों को दुनिया में भी सज़ा मिलती है और आख़िरत में भी। यह हमें डराता है कि हम कभी भी अल्लाह की नाफ़रमानी में पड़कर अपने आपको धोखे में न डालें।
- नबी की मुहब्बत और अदब — इस आयत में अल्लाह ने अपने नबी को संबोधित करते हुए फ़रमाया कि "आप नहीं जानते, हम जानते हैं", यह हमें सिखाता है कि नबी की शान में अदब रखें और उनके फ़ैसलों पर भरोसा करें, क्योंकि वे अल्लाह के हुक्म से ही चलते हैं।
- तौबा की अहमियत — जब हमें पता चलता है कि अल्लाह हर बात जानता है, तो हमें चाहिए कि गुनाह करने के तुरंत बाद तौबा करें, ताकि हम उन लोगों में से न हों जो निफ़ाक़ पर जम गए और अज़ाब के हक़दार बन गए।
📜 आयत 99-103 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 101
सूरा अत-तौबा आयत 101 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (मुसलमानों) तुम्हारे एतराफ़ (आस पास) के गॅवार देहातियों में…सूरा आयत 101/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 99–103. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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