अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اعْتَرَفُوا: अपने गुनाहों को मान लिया, स्वीकार कर लिया।
- خَلَطُوا: मिला दिया, एक साथ कर दिया।
- عَمَلًا صَالِحًا: अच्छा काम, नेक काम।
- سَيِّئًا: बुरा काम, गुनाह।
- عَسَى: उम्मीद है, संभावना है (यहाँ अल्लाह की ओर से वादे के अर्थ में)।
- يَتُوبَ عَلَيْهِمْ: उन पर रहमत से रुजू करे, उनकी तौबा कबूल करे।
तफसीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला मदीना और उसके आस-पास के उन लोगों का ज़िक्र कर रहा है जो जिहाद (ग़ज़वा-ए-तबूक) से पीछे रह गए थे, लेकिन उन्होंने मुनाफ़िक़ों (कपटियों) की तरह झूठे बहाने नहीं बनाए। उन्होंने सच्चाई के साथ अपने गुनाहों का इक़रार किया और कहा कि हमारे पास कोई उज़्र (बहाना) नहीं था, हमने ग़लती की। ये लोग अपनी ग़लती पर शर्मिंदा और पशेमान थे।
उनकी हालत यह थी कि उन्होंने एक अच्छा काम और एक बुरा काम मिला दिया था। उनका अच्छा काम यह था कि उन्होंने अपने गुनाहों का इक़रार किया, तौबा की, अल्लाह से माफ़ी माँगी, और पहले के नेक काम भी उनके पास थे — जैसे नमाज़, रोज़ा, अल्लाह की इबादत और रसूलुल्लाह ﷺ की मोहब्बत। लेकिन साथ ही उनका बुरा काम यह था कि वे जिहाद से पीछे रह गए, जो एक बड़ा गुनाह था। इस तरह उनके अच्छे और बुरे काम आपस में मिले हुए थे।
अल्लाह तआला ने उनके इस हाल पर रहमत की नज़र डाली और फ़रमाया कि "उम्मीद है अल्लाह उन पर रहमत से रुजू करेगा और उनकी तौबा कबूल करेगा।" यह अल्लाह की तरफ से उनके लिए खुशखबरी है। फिर अल्लाह ने अपनी सिफ़ात (विशेषताओं) का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि "बेशक अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला, बड़ा रहम करने वाला है।" यानी उसकी मग़फिरत (क्षमा) और रहमत बहुत वसीअ (विस्तृत) है, वह अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ कर देता है जब वे सच्चे दिल से तौबा करते हैं।
फ़ायदे (सबक):
- गुनाहों का इक़रार करना — इंसान को चाहिए कि अपनी ग़लतियों को छिपाने या बहाने बनाने के बजाय सच्चाई से अल्लाह के सामने अपने गुनाहों का इक़रार करे। यही तौबा की पहली सीढ़ी है।
- अच्छे और बुरे कामों का मिला हुआ होना — हर इंसान में अच्छाई और बुराई दोनों होती हैं। अल्लाह की रहमत यह है कि वह अच्छे कामों को कबूल करता है और बुरे कामों को माफ़ कर सकता है, बशर्ते इंसान सच्चे दिल से तौबा करे।
- निराशा से बचाव — यह आयत उन लोगों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है जो अपने गुनाहों की वजह से निराश हो जाते हैं। अल्लाह की मग़फिरत और रहमत इतनी वसीअ है कि वह हर गुनाह को माफ़ कर सकता है।
- तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है — चाहे इंसान कितना ही बड़ा गुनाह कर ले, जब तक वह ज़िंदा है और सच्चे दिल से तौबा करता है, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है। यह अल्लाह की रहमत का सबसे बड़ा प्रमाण है।
- मुनाफ़िक़ों से फ़र्क़ — इस आयत से पता चलता है कि मुनाफ़िक़ (कपटी) वे हैं जो बहाने बनाते हैं और झूठ बोलते हैं, जबकि सच्चे मोमिन अपनी ग़लती मान लेते हैं और सुधार की कोशिश करते हैं। यही ईमान की निशानी है।
📜 आयत 100-104 — अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 102
सूरा अत-तौबा आयत 102 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कुछ लोग हैं जिन्होंने अपने गुनाहों का (तो) एकरार…सूरा आयत 102/129 — अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अत-तौबा सुनें, अत-तौबा अनुवाद, अत-तौबा mp3, अत-तौबा pdf. आयत 100–104. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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