अत-तौबा · 102/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
وَآخَرُونَ اعْتَرَفُوا بِذُنُوبِهِمْ خَلَطُوا عَمَلًا صَالِحًا وَآخَرَ سَيِّئًا عَسَى اللَّهُ أَن يَتُوبَ عَلَيْهِمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝١٠٢
Wa aakharoona` tarafoo bizunoobihim khalatoo `amalan saalihanw wa aakhara saiyi`an `asal laahu ai yatooba `alaihim; innal laaha Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और कुछ लोग हैं जिन्होंने अपने गुनाहों का (तो) एकरार किया (मगर) उन लोगों ने भले काम को और कुछ बुरे काम को मिला जुला (कर गोलमाल) कर दिया क़रीब है कि ख़ुदा उनकी तौबा कुबूल करे (क्योंकि) ख़ुदा तो यक़ीनी बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اعْتَرَفُوا: अपने गुनाहों को मान लिया, स्वीकार कर लिया।
  • خَلَطُوا: मिला दिया, एक साथ कर दिया।
  • عَمَلًا صَالِحًا: अच्छा काम, नेक काम।
  • سَيِّئًا: बुरा काम, गुनाह।
  • عَسَى: उम्मीद है, संभावना है (यहाँ अल्लाह की ओर से वादे के अर्थ में)।
  • يَتُوبَ عَلَيْهِمْ: उन पर रहमत से रुजू करे, उनकी तौबा कबूल करे।

तफसीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला मदीना और उसके आस-पास के उन लोगों का ज़िक्र कर रहा है जो जिहाद (ग़ज़वा-ए-तबूक) से पीछे रह गए थे, लेकिन उन्होंने मुनाफ़िक़ों (कपटियों) की तरह झूठे बहाने नहीं बनाए। उन्होंने सच्चाई के साथ अपने गुनाहों का इक़रार किया और कहा कि हमारे पास कोई उज़्र (बहाना) नहीं था, हमने ग़लती की। ये लोग अपनी ग़लती पर शर्मिंदा और पशेमान थे।

उनकी हालत यह थी कि उन्होंने एक अच्छा काम और एक बुरा काम मिला दिया था। उनका अच्छा काम यह था कि उन्होंने अपने गुनाहों का इक़रार किया, तौबा की, अल्लाह से माफ़ी माँगी, और पहले के नेक काम भी उनके पास थे — जैसे नमाज़, रोज़ा, अल्लाह की इबादत और रसूलुल्लाह ﷺ की मोहब्बत। लेकिन साथ ही उनका बुरा काम यह था कि वे जिहाद से पीछे रह गए, जो एक बड़ा गुनाह था। इस तरह उनके अच्छे और बुरे काम आपस में मिले हुए थे।

अल्लाह तआला ने उनके इस हाल पर रहमत की नज़र डाली और फ़रमाया कि "उम्मीद है अल्लाह उन पर रहमत से रुजू करेगा और उनकी तौबा कबूल करेगा।" यह अल्लाह की तरफ से उनके लिए खुशखबरी है। फिर अल्लाह ने अपनी सिफ़ात (विशेषताओं) का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि "बेशक अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला, बड़ा रहम करने वाला है।" यानी उसकी मग़फिरत (क्षमा) और रहमत बहुत वसीअ (विस्तृत) है, वह अपने बंदों के गुनाहों को माफ़ कर देता है जब वे सच्चे दिल से तौबा करते हैं।


फ़ायदे (सबक):

  1. गुनाहों का इक़रार करना — इंसान को चाहिए कि अपनी ग़लतियों को छिपाने या बहाने बनाने के बजाय सच्चाई से अल्लाह के सामने अपने गुनाहों का इक़रार करे। यही तौबा की पहली सीढ़ी है।
  2. अच्छे और बुरे कामों का मिला हुआ होना — हर इंसान में अच्छाई और बुराई दोनों होती हैं। अल्लाह की रहमत यह है कि वह अच्छे कामों को कबूल करता है और बुरे कामों को माफ़ कर सकता है, बशर्ते इंसान सच्चे दिल से तौबा करे।
  3. निराशा से बचाव — यह आयत उन लोगों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है जो अपने गुनाहों की वजह से निराश हो जाते हैं। अल्लाह की मग़फिरत और रहमत इतनी वसीअ है कि वह हर गुनाह को माफ़ कर सकता है।
  4. तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला है — चाहे इंसान कितना ही बड़ा गुनाह कर ले, जब तक वह ज़िंदा है और सच्चे दिल से तौबा करता है, अल्लाह उसे माफ़ कर देता है। यह अल्लाह की रहमत का सबसे बड़ा प्रमाण है।
  5. मुनाफ़िक़ों से फ़र्क़ — इस आयत से पता चलता है कि मुनाफ़िक़ (कपटी) वे हैं जो बहाने बनाते हैं और झूठ बोलते हैं, जबकि सच्चे मोमिन अपनी ग़लती मान लेते हैं और सुधार की कोशिश करते हैं। यही ईमान की निशानी है।


📜 आयत 100-104 — अत-तौबा

100وَالسَّابِقُونَ الْأَوَّلُونَ مِنَ الْمُهَاجِرِينَ وَالْأَنصَارِ وَالَّذِينَ اتَّبَعُوهُم بِإِحْسَانٍ رَّضِيَ اللَّهُ عَنْهُمْ وَرَضُوا عَنْهُ وَأَعَدَّ لَهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي تَحْتَهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا أَبَدًا ۚ ذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
और मुहाजिरीन व अन्सार में से (ईमान की तरफ) सबक़त (पहल) करने वाले और वह लोग जिन्होंने नेक नीयती से (कुबूले ईमान में उनका साथ दिया ख़ुदा उनसे राज़ी और वह ख़ुदा से ख़ुश और उनके वास्ते ख़ुदा ने (वह हरे भरे) बाग़ जिन के नीचे नहरें जारी हैं तैयार कर रखे हैं वह हमेशा अब्दआलाबाद (हमेशा) तक उनमें रहेगें यही तो बड़ी कामयाबी हैं
101وَمِمَّنْ حَوْلَكُم مِّنَ الْأَعْرَابِ مُنَافِقُونَ ۖ وَمِنْ أَهْلِ الْمَدِينَةِ ۖ مَرَدُوا عَلَى النِّفَاقِ لَا تَعْلَمُهُمْ ۖ نَحْنُ نَعْلَمُهُمْ ۚ سَنُعَذِّبُهُم مَّرَّتَيْنِ ثُمَّ يُرَدُّونَ إِلَىٰ عَذَابٍ عَظِيمٍ
और (मुसलमानों) तुम्हारे एतराफ़ (आस पास) के गॅवार देहातियों में से बाज़ मुनाफिक़ (भी) हैं और ख़ुद मदीने के रहने वालों मे से भी (बाज़ मुनाफिक़ हैं) जो निफ़ाक पर अड़ गए हैं (ऐ रसूल) तुम उन को नहीं जानते (मगर) हम उनको (ख़ूब) जानते हैं अनक़रीब हम (दुनिया में) उनकी दोहरी सज़ा करेगें फिर ये लोग (क़यामत में) एक बड़े अज़ाब की तरफ लौटाए जाऎंगे
102وَآخَرُونَ اعْتَرَفُوا بِذُنُوبِهِمْ خَلَطُوا عَمَلًا صَالِحًا وَآخَرَ سَيِّئًا عَسَى اللَّهُ أَن يَتُوبَ عَلَيْهِمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
और कुछ लोग हैं जिन्होंने अपने गुनाहों का (तो) एकरार किया (मगर) उन लोगों ने भले काम को और कुछ बुरे काम को मिला जुला (कर गोलमाल) कर दिया क़रीब है कि ख़ुदा उनकी तौबा कुबूल करे (क्योंकि) ख़ुदा तो यक़ीनी बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान हैं
103خُذْ مِنْ أَمْوَالِهِمْ صَدَقَةً تُطَهِّرُهُمْ وَتُزَكِّيهِم بِهَا وَصَلِّ عَلَيْهِمْ ۖ إِنَّ صَلَاتَكَ سَكَنٌ لَّهُمْ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
(ऐ रसूल) तुम उनके माल की ज़कात लो (और) इसकी बदौलत उनको (गुनाहो से) पाक साफ करों और उनके वास्ते दुआएं ख़ैर करो क्योंकि तुम्हारी दुआ इन लोगों के हक़ में इत्मेनान (का बाइस है) और ख़ुदा तो (सब कुछ) सुनता (और) जानता है
104أَلَمْ يَعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ هُوَ يَقْبَلُ التَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِ وَيَأْخُذُ الصَّدَقَاتِ وَأَنَّ اللَّهَ هُوَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ
क्या इन लोगों ने इतने भी नहीं जाना यक़ीनन ख़ुदा बन्दों की तौबा क़ुबूल करता है और वही ख़ैरातें (भी) लेता है और इसमें शक़ नहीं कि वही तौबा का बड़ा कुबूल करने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — अत-तौबा 102

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Tuesday, August 18, 2026

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