अश-शुआरा · 3/227
अनुवाद उच्चारण — अश-शुआरा
لَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَّفْسَكَ أَلَّا يَكُونُوا مُؤْمِنِينَ ۝٣
La`allaka baakhi`un nafsaka allaa yakoonoo mu`mineen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) शायद तुम (इस फिक्र में) अपनी जान हलाक कर डालोगे कि ये (कुफ्फार) मोमिन क्यो नहीं हो जाते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • बाख़ि'अ (باخِع): अपनी जान को हलाक करने वाला, यानी इतना ग़मगीन होना कि जान निकल जाए।
  • नफ़्स (نَفْس): जान, स्वयं।
  • अल्ला (أَلَّا): इस बात पर कि, क्योंकि।
  • मोमिनीन (مُؤْمِنِينَ): ईमान लाने वाले, सच्चे विश्वासी।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप अपनी उम्मत की हिदायत के लिए इतने बेचैन और दुखी हैं कि उनके ईमान न लाने के ग़म में आप अपनी जान ही हलाक कर लेंगे। यह आपके अंदर मौजूद दया, मुहब्बत और उनकी भलाई की तमन्ना का सबूत है। लेकिन अल्लाह तआला आपको तसल्ली देते हुए फ़रमा रहा है कि ऐ रसूल! अपने ऊपर इतना ज़ुल्म मत करो, अपनी जान को इस क़दर मुश्किल में मत डालो। हिदायत देना आपका काम नहीं, बल्कि आपका काम सिर्फ पैग़ाम पहुंचाना है। ईमान लाना या न लाना अल्लाह के हाथ में है। अगर अल्लाह चाहता तो सबको ईमान की तौफ़ीक़ दे देता, लेकिन उसकी हिकमत में यही है कि लोग अपनी मर्ज़ी से राहे-हक़ चुनें।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें दूसरों की हिदायत के लिए दुआ करनी चाहिए और उन्हें अच्छे अंदाज़ में समझाना चाहिए, लेकिन नतीजे की चिंता अल्लाह पर छोड़ देनी चाहिए। किसी के ईमान न लाने पर इतना दुखी होना कि जान ही निकल जाए, यह अल्लाह की मर्ज़ी के खिलाफ है। अल्लाह तआला अपने नबी को तसल्ली दे रहा है कि आप अपना फर्ज़ अदा करते रहें, बाकी मामला मेरे हवाले कर दें। यही हमारे लिए भी सबक है कि हम अपने अज़ीज़ों की हिदायत के लिए कोशिश करें, लेकिन उनके इनकार पर अपनी जान न खाएं, बल्कि अल्लाह से उनके लिए हिदायत की दुआ करें। अल्लाह की रहमत और कुदरत पर भरोसा रखें, क्योंकि वही दिलों का मालिक है और जिसे चाहे हिदायत दे देता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-5 — अश-शुआरा

1طسم
ता सीन मीम
2تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ
ये वाज़ेए व रौशन किताब की आयतें है
3لَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَّفْسَكَ أَلَّا يَكُونُوا مُؤْمِنِينَ
(ऐ रसूल) शायद तुम (इस फिक्र में) अपनी जान हलाक कर डालोगे कि ये (कुफ्फार) मोमिन क्यो नहीं हो जाते
4إِن نَّشَأْ نُنَزِّلْ عَلَيْهِم مِّنَ السَّمَاءِ آيَةً فَظَلَّتْ أَعْنَاقُهُمْ لَهَا خَاضِعِينَ
अगर हम चाहें तो उन लोगों पर आसमान से कोई ऐसा मौजिज़ा नाज़िल करें कि उन लोगों की गर्दनें उसके सामने झुक जाएँ
5وَمَا يَأْتِيهِم مِّن ذِكْرٍ مِّنَ الرَّحْمَٰنِ مُحْدَثٍ إِلَّا كَانُوا عَنْهُ مُعْرِضِينَ
और (लोगों का क़ायदा है कि) जब उनके पास कोई कोई नसीहत की बात ख़ुदा की तरफ से आयी तो ये लोग उससे मुँह फेरे बगैर नहीं रहे
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अनुवाद — अश-शुआरा 3

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Tuesday, August 18, 2026

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