अल-क़सस · 2/88
अनुवाद उच्चारण — अल-क़सस
تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ ۝٢
Tilka Aayaatul Kitaabil mubeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) ये वाज़ेए व रौशन किताब की आयतें हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

ये वे आयतें हैं जो उस स्पष्ट और रोशन किताब (क़ुरआन) की हैं, जो हर उस चीज़ को खोलकर बयान करती है जिसकी लोगों को अपनी दुनिया और आख़िरत में ज़रूरत है। यह किताब अपने अहकाम (हुक्मों), नसीहतों और हिदायात को इस तरह साफ़ और वाज़ेह अंदाज़ में पेश करती है कि उसमें किसी तरह का कोई इल्तिबास (उलझन) या इब्हाम (अस्पष्टता) नहीं।

यह क़ुरआन वह किताब है जो हक़ और बातिल के दरमियान फ़र्क़ करती है, और अपने पाठकों को सीधे रास्ते की तरफ़ रहनुमाई करती है। इसकी आयतें अपने वाज़ेह और रौशन होने की वजह से दिलों को रौशन करती हैं और उन्हें सच्चाई की तरफ़ मुतवज्जह करती हैं।

यह एक ऐसी नेमत है जो अल्लाह ने अपने बंदों पर इनायत फ़रमाई है, ताकि वो इसकी रोशनी में चलें और अपनी ज़िंदगी को ख़ूबसूरत बनाएं। जो शख्स इस किताब को पढ़ता है और उस पर अमल करता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी हासिल करता है। यह किताब हर उस इंसान के लिए रहनुमा है जो हक़ की तलाश में है और अपनी ज़िंदगी को बेहतर बनाना चाहता है।

अल्लाह ने इस किताब को इस तरह नाज़िल किया है कि यह हर ज़माने और हर मुक़ाम के लिए हिदायत का ज़रिया है। इसकी आयतें जितनी बार पढ़ी जाएं, हर बार नए मानी और नई रहनुमाई सामने आती हैं। यह किताब उन लोगों के लिए रहमत है जो इस पर ईमान लाते हैं और इसके हुक्मों पर अमल करते हैं।

तो इस आयत का पैग़ाम यह है कि क़ुरआन एक वाज़ेह और मुकम्मल किताब है, जो इंसान को ज़ुल्मात (अंधेरों) से निकालकर नूर (रोशनी) की तरफ़ ले जाती है। जो इसे थाम लेता है, वह कभी गुमराह नहीं होता, और जो इसे छोड़ देता है, वह हिदायत से महरूम रह जाता है। यह किताब हमारे लिए अल्लाह की तरफ़ से सबसे बड़ी नेमत है, और हमें चाहिए कि इसे पढ़ें, समझें और अपनी ज़िंदगी में लागू करें।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-4 — अल-क़सस

1طسم
ता सीन मीम
2تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ
(ऐ रसूल) ये वाज़ेए व रौशन किताब की आयतें हैं
3نَتْلُو عَلَيْكَ مِن نَّبَإِ مُوسَىٰ وَفِرْعَوْنَ بِالْحَقِّ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
(जिसमें) हम तुम्हारें सामने मूसा और फिरऔन का वाक़िया ईमानदार लोगों के नफ़े के वास्ते ठीक ठीक बयान करते हैं
4إِنَّ فِرْعَوْنَ عَلَا فِي الْأَرْضِ وَجَعَلَ أَهْلَهَا شِيَعًا يَسْتَضْعِفُ طَائِفَةً مِّنْهُمْ يُذَبِّحُ أَبْنَاءَهُمْ وَيَسْتَحْيِي نِسَاءَهُمْ ۚ إِنَّهُ كَانَ مِنَ الْمُفْسِدِينَ
बेशक फिरऔन ने (मिस्र की) सरज़मीन में बहुत सर उठाया था और उसने वहाँ के रहने वालों को कई गिरोह कर दिया था उनमें से एक गिरोह (बनी इसराइल) को आजिज़ कर रखा थ कि उनके बेटों को ज़बाह करवा देता था और उनकी औरतों (बेटियों) को ज़िन्दा छोड़ देता था बेशक वह भी मुफ़सिदों में था
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पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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