अल-क़सस · 3/88
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़सस
نَتْلُو عَلَيْكَ مِن نَّبَإِ مُوسَىٰ وَفِرْعَوْنَ بِالْحَقِّ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ ۝٣
Natloo `alaika min naba-i Moosaa wa Fi`awna bilhaqqi liqawminy yu`miinoon
📖 हिंदी अर्थ
(जिसमें) हम तुम्हारें सामने मूसा और फिरऔन का वाक़िया ईमानदार लोगों के नफ़े के वास्ते ठीक ठीक बयान करते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • نَتْلُو – हम पढ़कर सुनाते हैं, व्याख्या करते हैं।
  • نَّبَإِ – खबर, समाचार।
  • بِالْحَقِّ – सत्य के साथ, पूरी सच्चाई।
  • لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ – उन लोगों के लिए जो ईमान रखते हैं।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने प्यारे नबी ﷺ को संबोधित करते हुए फ़रमा रहे हैं कि हम आपको मूसा (अलैहिस्सलाम) और फ़िरऔन की वह खबर सच्चाई और सत्यता के साथ सुनाते हैं, जिसमें कोई संदेह नहीं। यह क़िस्सा सिर्फ़ एक कहानी नहीं है, बल्कि इसमें बड़ी सीख और नसीहत है।

यह क़ुरआन उन लोगों के लिए रहनुमाई और हिदायत है जो ईमान लाते हैं, क्योंकि वही लोग हैं जो इससे लाभ उठाते हैं। ईमानवालों का दिल इस क़िस्से से इबरत हासिल करता है, उनका यक़ीन मज़बूत होता है और वे समझते हैं कि अल्लाह की मदद सच्चे बंदों के साथ होती है, चाहे हालात कितने भी कठिन क्यों न हों।

यहाँ अल्लाह तआला ने यह बात स्पष्ट कर दी कि यह क़िस्सा सच्चाई पर आधारित है, न कि किसी कल्पना या मनघड़ंत बात पर। यह उन लोगों के लिए रहमत और हिदायत है जो अल्लाह के कलाम पर ईमान रखते हैं और उस पर अमल करते हैं।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें क़ुरआन की हर आयत पर गहराई से ग़ौर करना चाहिए, क्योंकि हर क़िस्से में हमारे लिए रहनुमाई है। यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि सच्चाई और ईमान की ताक़त के आगे ज़ुल्म और ताक़त की कोई हक़ीक़त नहीं होती। फ़िरऔन जैसा ज़ालिम भी अपनी सारी ताक़त के बावजूद अल्लाह के नबी के मुक़ाबले में कुछ न कर सका।

अल्लाह तआला हम सबको क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 1-5 — सूरा अल-क़सस

1طسم
ता सीन मीम
2تِلْكَ آيَاتُ الْكِتَابِ الْمُبِينِ
(ऐ रसूल) ये वाज़ेए व रौशन किताब की आयतें हैं
3نَتْلُو عَلَيْكَ مِن نَّبَإِ مُوسَىٰ وَفِرْعَوْنَ بِالْحَقِّ لِقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
(जिसमें) हम तुम्हारें सामने मूसा और फिरऔन का वाक़िया ईमानदार लोगों के नफ़े के वास्ते ठीक ठीक बयान करते हैं
4إِنَّ فِرْعَوْنَ عَلَا فِي الْأَرْضِ وَجَعَلَ أَهْلَهَا شِيَعًا يَسْتَضْعِفُ طَائِفَةً مِّنْهُمْ يُذَبِّحُ أَبْنَاءَهُمْ وَيَسْتَحْيِي نِسَاءَهُمْ ۚ إِنَّهُ كَانَ مِنَ الْمُفْسِدِينَ
बेशक फिरऔन ने (मिस्र की) सरज़मीन में बहुत सर उठाया था और उसने वहाँ के रहने वालों को कई गिरोह कर दिया था उनमें से एक गिरोह (बनी इसराइल) को आजिज़ कर रखा थ कि उनके बेटों को ज़बाह करवा देता था और उनकी औरतों (बेटियों) को ज़िन्दा छोड़ देता था बेशक वह भी मुफ़सिदों में था
5وَنُرِيدُ أَن نَّمُنَّ عَلَى الَّذِينَ اسْتُضْعِفُوا فِي الْأَرْضِ وَنَجْعَلَهُمْ أَئِمَّةً وَنَجْعَلَهُمُ الْوَارِثِينَ
और हम तो ये चाहते हैं कि जो लोग रुए ज़मीन में कमज़ोर कर दिए गए हैं उनपर एहसान करे और उन्हींको (लोगों का) पेशवा बनाएँ और उन्हीं को इस (सरज़मीन) का मालिक बनाएँ
अल-क़ससकुरान सूची
88आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — अल-क़सस 3

सूरा अल-क़सस आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (जिसमें) हम तुम्हारें सामने मूसा और फिरऔन का वाक़िया ईमानदार…

सूरा आयत 3/88 — सूरा अल-क़सस القصص (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़सस सुनें, सूरा अल-क़सस अनुवाद, सूरा अल-क़सस mp3, सूरा अल-क़सस pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Monday, September 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए