अर-रूम · 41/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
ظَهَرَ الْفَسَادُ فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ بِمَا كَسَبَتْ أَيْدِي النَّاسِ لِيُذِيقَهُم بَعْضَ الَّذِي عَمِلُوا لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ ۝٤١
Zaharal fasaadu fil barri wal bahri bimaa kasabat aydinnaasi li yuzeeqahum ba`dal lazee `amiloo la`allahum yarji`oon
📖 हिंदी अर्थ
वह उससे पाक व पाकीज़ा और बरतर है ख़़ुद लोगों ही के अपने हाथों की कारस्तानियों की बदौलत ख़ुश्क व तर में फसाद फैल गया ताकि जो कुछ ये लोग कर चुके हैं ख़ुदा उन को उनमें से बाज़ करतूतों का मज़ा चखा दे ताकि ये लोग अब भी बाज़ आएँ
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ظَهَرَ الْفَسَادُ: फसाद (बिगाड़) प्रकट हो गया।
  • الْبَرِّ وَالْبَحْرِ: ज़मीन (खुश्की) और समुद्र (तटीय इलाक़े, नदियाँ और शहर)।
  • بِمَا كَسَبَتْ أَيْدِي النَّاسِ: उन गुनाहों की वजह से जो लोगों ने अपने हाथों से कमाए।
  • لِيُذِيقَهُم: ताकि वह (अल्लाह) उन्हें चखाए।
  • لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ: ताकि वे (गुनाहों से) लौट आएँ (तौबा करें)।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें अल्लाह की उस सुन्नत (क़ानून) की तरफ़ इशारा करती है जो पूरी कायनात में चल रही है। जब इंसान ज़मीन पर अल्लाह की नाफ़रमानी करता है, गुनाह फैलाता है, ज़ुल्म करता है और अल्लाह के हुक्मों से मुँह मोड़ता है, तो उसके इन्हीं आमाल की वजह से ज़मीन और समुद्र में फ़साद पैदा हो जाता है। यानी खुश्की (सूखा) आ जाता है, बारिश कम हो जाती है, बरकतें उठा ली जाती हैं, बीमारियाँ और वबाएँ (महामारियाँ) फैलती हैं, फ़ितने (हंगामे) पैदा होते हैं और दुश्मनों का दबदबा बढ़ जाता है। यह सब कुछ उन गुनाहों का नतीजा होता है जो लोगों ने अपने हाथों से कमाए हैं।

अल्लाह तआला ने यह सब इसलिए होने दिया ताकि इंसान अपनी ग़लतियों का कुछ नतीजा इसी दुनिया में चख ले, ताकि उसका दिल नरम हो, वह जाग जाए और अपने रब की तरफ़ पलट आए। यह अल्लाह की रहमत है कि वह हर गुनाह की सज़ा तुरंत नहीं देता, बल्कि थोड़ा-बहुत दुनिया में दिखा देता है ताकि इंसान तौबा कर ले और आख़िरत की सख़्त सज़ा से बच जाए। अगर अल्लाह चाहता तो सब कुछ एक ही बार में कर देता, लेकिन वह चाहता है कि बंदा उसकी तरफ़ लौटे, उससे माफ़ी माँगे और अपनी ज़िंदगी को सुधार ले।

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। जब भी हम अपने आस-पास किसी मुसीबत, बीमारी, क़हत (सूखे) या फ़साद को देखें, तो हमें चाहिए कि हम अपने आमाल का जायज़ा लें, अपने गुनाहों से तौबा करें और अल्लाह की तरफ़ रुजू करें। यही रास्ता हमारी भलाई का है। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है, वह तौबा करने वालों से बहुत प्यार करता है और उन्हें माफ़ कर देता है। आओ, हम सब अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक बनाएँ, ताकि ज़मीन और समुद्र में बरकतें लौट आएँ और हमारी ज़िंदगी सुकून और खुशहाली से भर जाए।

🎧 सुनें

📜 आयत 39-43 — अर-रूम

39وَمَا آتَيْتُم مِّن رِّبًا لِّيَرْبُوَ فِي أَمْوَالِ النَّاسِ فَلَا يَرْبُو عِندَ اللَّهِ ۖ وَمَا آتَيْتُم مِّن زَكَاةٍ تُرِيدُونَ وَجْهَ اللَّهِ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُضْعِفُونَ
और तुम लोग जो सूद देते हो ताकि लोगों के माल (दौलत) में तरक्क़ी हो तो (याद रहे कि ऐसा माल) ख़ुदा के यहॉ फूलता फलता नही और तुम लोग जो ख़ुदा की ख़ुशनूदी के इरादे से ज़कात देते हो तो ऐसे ही लोग (ख़ुदा की बारगाह से) दूना दून लेने वाले हैं
40اللَّهُ الَّذِي خَلَقَكُمْ ثُمَّ رَزَقَكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يُحْيِيكُمْ ۖ هَلْ مِن شُرَكَائِكُم مَّن يَفْعَلُ مِن ذَٰلِكُم مِّن شَيْءٍ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
ख़ुदा वह (क़ादिर तवाना है) जिसने तुमको पैदा किया फिर उसी ने रोज़ी दी फिर वही तुमको मार डालेगा फिर वही तुमको (दोबारा) ज़िन्दा करेगा भला तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीकों में से कोई भी ऐसा है जो इन कामों में से कुछ भी कर सके जिसे ये लोग (उसका) शरीक बनाते हैं
41ظَهَرَ الْفَسَادُ فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ بِمَا كَسَبَتْ أَيْدِي النَّاسِ لِيُذِيقَهُم بَعْضَ الَّذِي عَمِلُوا لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
वह उससे पाक व पाकीज़ा और बरतर है ख़़ुद लोगों ही के अपने हाथों की कारस्तानियों की बदौलत ख़ुश्क व तर में फसाद फैल गया ताकि जो कुछ ये लोग कर चुके हैं ख़ुदा उन को उनमें से बाज़ करतूतों का मज़ा चखा दे ताकि ये लोग अब भी बाज़ आएँ
42قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلُ ۚ كَانَ أَكْثَرُهُم مُّشْرِكِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर चल फिरकर देखो तो कि जो लोग उसके क़ब्ल गुज़र गए उनके (अफ़आल) का अंजाम क्या हुआ उनमें से बहुतेरे तो मुशरिक ही हैं
43فَأَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ الْقَيِّمِ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَ يَوْمٌ لَّا مَرَدَّ لَهُ مِنَ اللَّهِ ۖ يَوْمَئِذٍ يَصَّدَّعُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम उस दिन के आने से पहले जो खुदा की तरफ से आकर रहेगा (और) कोई उसे रोक नहीं सकता अपना रुख़ मज़बूत (और सीधे दीन की तरफ किए रहो उस दिन लोग (परेशान होकर) अलग अलग हो जाएँगें
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अनुवाद — अर-रूम 41

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Tuesday, August 18, 2026

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