अर-रूम · 40/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
اللَّهُ الَّذِي خَلَقَكُمْ ثُمَّ رَزَقَكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يُحْيِيكُمْ ۖ هَلْ مِن شُرَكَائِكُم مَّن يَفْعَلُ مِن ذَٰلِكُم مِّن شَيْءٍ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ ۝٤٠
Allaahul lazee khalaqa kum summa razaqakm summa yumeetukum summa yuhyeekum hal min shurakaaa`ikum mai yaf`alu min zaalikum min shai`; Sub haanahoo wa Ta`aalaa `ammaa yushrikoon
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा वह (क़ादिर तवाना है) जिसने तुमको पैदा किया फिर उसी ने रोज़ी दी फिर वही तुमको मार डालेगा फिर वही तुमको (दोबारा) ज़िन्दा करेगा भला तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीकों में से कोई भी ऐसा है जो इन कामों में से कुछ भी कर सके जिसे ये लोग (उसका) शरीक बनाते हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَلَقَكُمْ: उसने तुम्हें पैदा किया।
  • رَزَقَكُمْ: उसने तुम्हें रोज़ी दी।
  • يُمِيتُكُمْ: वह तुम्हें मौत देता है।
  • يُحْيِيكُمْ: वह तुम्हें जीवित करेगा (दोबारा उठाएगा)।
  • شُرَكَائِكُمْ: तुम्हारे साझीदार (जिन्हें तुम अल्लाह के साथ पूजते हो)।
  • سُبْحَانَهُ: वह पाक और पवित्र है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ लोगों! याद रखो कि अल्लाह ही वह हस्ती है जिसने तुम्हें पहली बार पैदा किया, जब तुम कुछ भी नहीं थे। फिर उसी ने तुम्हें रोज़ी दी — खाना, पानी, हवा, सेहत, और हर वह चीज़ जो तुम्हारी ज़िंदगी के लिए ज़रूरी है। यह सब उसी का एहसान है। फिर जब तुम्हारी मौत का वक़्त आता है, तो वही तुम्हें मौत देता है। और फिर क़यामत के दिन वही तुम्हें दोबारा ज़िंदा करेगा, ताकि तुम्हें उसके सामने हाज़िर होकर अपने अमलों का हिसाब देना पड़े।

अब ज़रा सोचो — तुम जिन्हें अल्लाह का साझीदार बनाते हो, जिन मूर्तियों या हस्तियों की तुम पूजा करते हो, क्या उनमें से कोई भी इन कामों में से कुछ भी कर सकता है? क्या उन्होंने तुम्हें पैदा किया? क्या वे तुम्हें रोज़ी देते हैं? क्या वे मौत या ज़िंदगी पर कोई अख्तियार रखते हैं? हरगिज़ नहीं! जब वे कुछ भी नहीं कर सकते, तो उन्हें अल्लाह का साझीदार क्यों बनाया जाता है?

यह सुनकर मुशरिकीन के पास कोई जवाब नहीं था, क्योंकि वे जानते थे कि यह सब सिर्फ अल्लाह ही करता है। फिर अल्लाह ने फ़रमाया: "अल्लाह पाक है और उन सब चीज़ों से बहुत ऊँचा है जिन्हें लोग उसका साझीदार बनाते हैं।" यानी वह हर उस चीज़ से पवित्र है जो लोग उसके साथ शरीक करते हैं।


दावत और नसीहत:

ऐ इंसान! जिसने तुम्हें पैदा किया, तुम्हें पाला-पोसा, तुम्हें खाना दिया और तुम्हारी हर ज़रूरत पूरी की — क्या वह तुम्हारी इबादत का हक़दार नहीं? जो मूर्तियाँ और झूठे माबूद तुम्हारे किसी काम नहीं आ सकते, उन्हें छोड़कर उस अल्लाह की तरफ़ रुजू करो जो सब कुछ कर सकता है। उसी की इबादत करो, उसी से मदद माँगो, और उसी की राह पर चलो। यही तुम्हारी कामयाबी है। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है — वह चाहता है कि तुम उसकी इबादत करो, ताकि वह तुम्हें जन्नत की नेमतें दे और तुम्हें हमेशा की खुशियों में रखे। उसकी तरफ़ लौट आओ, क्योंकि वही सबसे बड़ा, सबसे ताकतवर और सबसे प्यार करने वाला है।

🎧 सुनें

📜 आयत 38-42 — अर-रूम

38فَآتِ ذَا الْقُرْبَىٰ حَقَّهُ وَالْمِسْكِينَ وَابْنَ السَّبِيلِ ۚ ذَٰلِكَ خَيْرٌ لِّلَّذِينَ يُرِيدُونَ وَجْهَ اللَّهِ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
(तो ऐ रसूल अपनी) क़राबतदार (फातिमा ज़हरा) का हक़ फिदक दे दो और मोहताज व परदेसियों का (भी) जो लोग ख़ुदा की ख़ुशनूदी के ख्वाहॉ हैं उन के हक़ में सब से बेहतर यही है और ऐसे ही लोग आखेरत में दिली मुरादे पाएँगें
39وَمَا آتَيْتُم مِّن رِّبًا لِّيَرْبُوَ فِي أَمْوَالِ النَّاسِ فَلَا يَرْبُو عِندَ اللَّهِ ۖ وَمَا آتَيْتُم مِّن زَكَاةٍ تُرِيدُونَ وَجْهَ اللَّهِ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُضْعِفُونَ
और तुम लोग जो सूद देते हो ताकि लोगों के माल (दौलत) में तरक्क़ी हो तो (याद रहे कि ऐसा माल) ख़ुदा के यहॉ फूलता फलता नही और तुम लोग जो ख़ुदा की ख़ुशनूदी के इरादे से ज़कात देते हो तो ऐसे ही लोग (ख़ुदा की बारगाह से) दूना दून लेने वाले हैं
40اللَّهُ الَّذِي خَلَقَكُمْ ثُمَّ رَزَقَكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يُحْيِيكُمْ ۖ هَلْ مِن شُرَكَائِكُم مَّن يَفْعَلُ مِن ذَٰلِكُم مِّن شَيْءٍ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
ख़ुदा वह (क़ादिर तवाना है) जिसने तुमको पैदा किया फिर उसी ने रोज़ी दी फिर वही तुमको मार डालेगा फिर वही तुमको (दोबारा) ज़िन्दा करेगा भला तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीकों में से कोई भी ऐसा है जो इन कामों में से कुछ भी कर सके जिसे ये लोग (उसका) शरीक बनाते हैं
41ظَهَرَ الْفَسَادُ فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ بِمَا كَسَبَتْ أَيْدِي النَّاسِ لِيُذِيقَهُم بَعْضَ الَّذِي عَمِلُوا لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
वह उससे पाक व पाकीज़ा और बरतर है ख़़ुद लोगों ही के अपने हाथों की कारस्तानियों की बदौलत ख़ुश्क व तर में फसाद फैल गया ताकि जो कुछ ये लोग कर चुके हैं ख़ुदा उन को उनमें से बाज़ करतूतों का मज़ा चखा दे ताकि ये लोग अब भी बाज़ आएँ
42قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلُ ۚ كَانَ أَكْثَرُهُم مُّشْرِكِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर चल फिरकर देखो तो कि जो लोग उसके क़ब्ल गुज़र गए उनके (अफ़आल) का अंजाम क्या हुआ उनमें से बहुतेरे तो मुशरिक ही हैं
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अनुवाद — अर-रूम 40

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Tuesday, August 18, 2026

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