अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- सीरू: चलो, यात्रा करो
- फ़ान्ज़ुरू: देखो, ग़ौर करो
- आक़िबत: अंजाम, परिणाम
- मुशरिकीन: शिर्क करने वाले, अल्लाह के साथ दूसरों को साझीदार बनाने वाले
तफ़सीर:
ऐ नबी! आप इनकार करने वालों से कहिए कि वे ज़मीन में चलें-फिरें और ग़ौर से देखें कि उनसे पहले गुज़री हुई उम्मतों का अंजाम क्या हुआ। जिन्होंने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया और उनकी नसीहतों को नकारा, उनका क्या हश्र हुआ? क़ौमे नूह, आद, समूद और दूसरी उम्मतों के खंडहर आज भी उनके बुरे अंजाम की गवाही दे रहे हैं। उनके महल उजड़ गए, उनकी बस्तियाँ वीरान हो गईं और उनकी ताक़त और शानो-शौकत उनके किसी काम न आई।
इसलिए कि उनमें अधिकतर लोग शिर्क करने वाले थे। वे अल्लाह के साथ दूसरों की इबादत करते थे, पत्थरों और मूर्तियों को पूजते थे और अपने रब की नेअमतों को भूलकर उसके सिवा दूसरों से मदद माँगते थे। यही शिर्क उनके हलाकत का सबब बना। अल्लाह ने उन्हें उनके कुकर्मों की सज़ा दी और उन्हें इस तरह मिटाया कि उनकी कोई निशानी बाक़ी न रही।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है। अल्लाह तआला हमें दावत देते हैं कि हम इतिहास से सबक़ हासिल करें। यह सिर्फ़ कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उन उम्मतों का अनुभव है जो हमसे पहले गुज़री हैं। जब हम अपने आस-पास उनके खंडहरों को देखते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यह दुनिया किसी के लिए हमेशा नहीं रही। जिन लोगों ने अल्लाह की इबादत की और उसके सिवा किसी को न पूजा, उन्हें अल्लाह ने बचा लिया, और जिन्होंने शिर्क किया, वे हलाक हुए।
आज भी हम देखते हैं कि जो लोग अल्लाह की तौहीद पर क़ायम हैं, उन्हें अल्लाह की मदद हासिल होती है, और जो शिर्क और कुफ़्र में डूबे हैं, उनका अंजाम बुरा होता है। यह आयत हमें तौहीद की तरफ़ बुलाती है और शिर्क से बचने की ताकीद करती है। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में शामिल करे जिन्होंने उसकी इबादत को अपना असली मक़सद बनाया। आमीन।
📜 आयत 40-44 — अर-रूम
अनुवाद — अर-रूम 42
सूरा अर-रूम आयत 42 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर…सूरा आयत 42/60 — अर-रूम الروم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-रूम सुनें, अर-रूम अनुवाद, अर-रूम mp3, अर-रूम pdf. आयत 40–44. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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