अर-रूम · 42/60
अनुवाद उच्चारण — अर-रूम
قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلُ ۚ كَانَ أَكْثَرُهُم مُّشْرِكِينَ ۝٤٢
Qul seeroo fil ardi fanzuroo kaifa kaana `aaqibatul lazeena min qabl; kaana aksaruhum mushrikeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर चल फिरकर देखो तो कि जो लोग उसके क़ब्ल गुज़र गए उनके (अफ़आल) का अंजाम क्या हुआ उनमें से बहुतेरे तो मुशरिक ही हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • सीरू: चलो, यात्रा करो
  • फ़ान्ज़ुरू: देखो, ग़ौर करो
  • आक़िबत: अंजाम, परिणाम
  • मुशरिकीन: शिर्क करने वाले, अल्लाह के साथ दूसरों को साझीदार बनाने वाले

तफ़सीर:

ऐ नबी! आप इनकार करने वालों से कहिए कि वे ज़मीन में चलें-फिरें और ग़ौर से देखें कि उनसे पहले गुज़री हुई उम्मतों का अंजाम क्या हुआ। जिन्होंने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया और उनकी नसीहतों को नकारा, उनका क्या हश्र हुआ? क़ौमे नूह, आद, समूद और दूसरी उम्मतों के खंडहर आज भी उनके बुरे अंजाम की गवाही दे रहे हैं। उनके महल उजड़ गए, उनकी बस्तियाँ वीरान हो गईं और उनकी ताक़त और शानो-शौकत उनके किसी काम न आई।

इसलिए कि उनमें अधिकतर लोग शिर्क करने वाले थे। वे अल्लाह के साथ दूसरों की इबादत करते थे, पत्थरों और मूर्तियों को पूजते थे और अपने रब की नेअमतों को भूलकर उसके सिवा दूसरों से मदद माँगते थे। यही शिर्क उनके हलाकत का सबब बना। अल्लाह ने उन्हें उनके कुकर्मों की सज़ा दी और उन्हें इस तरह मिटाया कि उनकी कोई निशानी बाक़ी न रही।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है। अल्लाह तआला हमें दावत देते हैं कि हम इतिहास से सबक़ हासिल करें। यह सिर्फ़ कहानियाँ नहीं हैं, बल्कि उन उम्मतों का अनुभव है जो हमसे पहले गुज़री हैं। जब हम अपने आस-पास उनके खंडहरों को देखते हैं, तो हमें याद रखना चाहिए कि यह दुनिया किसी के लिए हमेशा नहीं रही। जिन लोगों ने अल्लाह की इबादत की और उसके सिवा किसी को न पूजा, उन्हें अल्लाह ने बचा लिया, और जिन्होंने शिर्क किया, वे हलाक हुए।

आज भी हम देखते हैं कि जो लोग अल्लाह की तौहीद पर क़ायम हैं, उन्हें अल्लाह की मदद हासिल होती है, और जो शिर्क और कुफ़्र में डूबे हैं, उनका अंजाम बुरा होता है। यह आयत हमें तौहीद की तरफ़ बुलाती है और शिर्क से बचने की ताकीद करती है। अल्लाह हमें सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में शामिल करे जिन्होंने उसकी इबादत को अपना असली मक़सद बनाया। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 40-44 — अर-रूम

40اللَّهُ الَّذِي خَلَقَكُمْ ثُمَّ رَزَقَكُمْ ثُمَّ يُمِيتُكُمْ ثُمَّ يُحْيِيكُمْ ۖ هَلْ مِن شُرَكَائِكُم مَّن يَفْعَلُ مِن ذَٰلِكُم مِّن شَيْءٍ ۚ سُبْحَانَهُ وَتَعَالَىٰ عَمَّا يُشْرِكُونَ
ख़ुदा वह (क़ादिर तवाना है) जिसने तुमको पैदा किया फिर उसी ने रोज़ी दी फिर वही तुमको मार डालेगा फिर वही तुमको (दोबारा) ज़िन्दा करेगा भला तुम्हारे (बनाए हुए ख़ुदा के) शरीकों में से कोई भी ऐसा है जो इन कामों में से कुछ भी कर सके जिसे ये लोग (उसका) शरीक बनाते हैं
41ظَهَرَ الْفَسَادُ فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ بِمَا كَسَبَتْ أَيْدِي النَّاسِ لِيُذِيقَهُم بَعْضَ الَّذِي عَمِلُوا لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
वह उससे पाक व पाकीज़ा और बरतर है ख़़ुद लोगों ही के अपने हाथों की कारस्तानियों की बदौलत ख़ुश्क व तर में फसाद फैल गया ताकि जो कुछ ये लोग कर चुके हैं ख़ुदा उन को उनमें से बाज़ करतूतों का मज़ा चखा दे ताकि ये लोग अब भी बाज़ आएँ
42قُلْ سِيرُوا فِي الْأَرْضِ فَانظُرُوا كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الَّذِينَ مِن قَبْلُ ۚ كَانَ أَكْثَرُهُم مُّشْرِكِينَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि ज़रा रुए ज़मीन पर चल फिरकर देखो तो कि जो लोग उसके क़ब्ल गुज़र गए उनके (अफ़आल) का अंजाम क्या हुआ उनमें से बहुतेरे तो मुशरिक ही हैं
43فَأَقِمْ وَجْهَكَ لِلدِّينِ الْقَيِّمِ مِن قَبْلِ أَن يَأْتِيَ يَوْمٌ لَّا مَرَدَّ لَهُ مِنَ اللَّهِ ۖ يَوْمَئِذٍ يَصَّدَّعُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम उस दिन के आने से पहले जो खुदा की तरफ से आकर रहेगा (और) कोई उसे रोक नहीं सकता अपना रुख़ मज़बूत (और सीधे दीन की तरफ किए रहो उस दिन लोग (परेशान होकर) अलग अलग हो जाएँगें
44مَن كَفَرَ فَعَلَيْهِ كُفْرُهُ ۖ وَمَنْ عَمِلَ صَالِحًا فَلِأَنفُسِهِمْ يَمْهَدُونَ
जो काफ़िर बन बैठा उस पर उस के कुफ्र का वबाल है और जिन्होने अच्छे काम किए वह अपने ही आसाइश का सामान कर रहें है
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अनुवाद — अर-रूम 42

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Tuesday, August 18, 2026

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