अद-दुखान · 2/59
अनुवाद उच्चारण — सूरा अद-दुखान
وَالْكِتَابِ الْمُبِينِ ۝٢
Wal Kitaabil Mubeen
📖 हिंदी अर्थ
वाज़ेए व रौशन किताब (कुरान) की क़सम

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَالْكِتَابِ: क़सम है किताब (यानी क़ुरआन) की।
  • الْمُبِينِ: स्पष्ट, खुला हुआ, जो हक़ और बातिल को साफ़ कर दे।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में क़ुरआन-ए-करीम की क़सम खाई है, जो अपने लफ़्ज़ और मानी दोनों में बिल्कुल वाज़ेह (स्पष्ट) है। यह किताब अपने अंदर हिदायत का पूरा निज़ाम रखती है, जो इंसान को अंधेरों से निकालकर रौशनी की तरफ ले जाती है। यह क़सम इसलिए है कि बंदे समझ लें कि यह किताब कितनी अज़ीम (महान) है — यह कोई आम किताब नहीं, बल्कि वह ज़रिया है जिसके ज़रिए अल्लाह ने अपने बंदों से कलाम किया।

यह क़ुरआन "मुबीन" है यानी हर उस चीज़ को साफ़ करता है जो इंसान के लिए दुनिया और आख़िरत में ज़रूरी है। इसमें कोई पेचीदगी नहीं, कोई धोखा नहीं — यह सीधा रास्ता दिखाता है। अल्लाह ने इस किताब को इसलिए नाज़िल किया ताकि लोगों को आगाह करे, उनके नफ़ा और नुक़सान की राह बताए, और उन पर अल्लाह की हुज्जत (दलील) क़ायम हो जाए। यह किताब उस लैलतुल-क़द्र में नाज़िल हुई जो बरकतों वाली रात है — और यह रात रमज़ान के महीने में आती है।

इस किताब के ज़रिए अल्लाह ने अपने रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को भेजा, और उनसे पहले भी रसूल भेजे — सबका मक़सद एक ही था: इंसानों को सीधे रास्ते पर लाना। यह अल्लाह की रहमत है जो उसने अपने बंदों पर की। अल्लाह सब कुछ सुनता है, सब कुछ जानता है — ज़ाहिर और बातिन, छोटा और बड़ा, सब उसके इल्म में है।

यह अल्लाह ही है जिसने आसमानों, ज़मीन और उनके बीच की हर चीज़ को पैदा किया। अगर तुम यक़ीन रखते हो तो समझ लो कि यही सबका रब और सच्चा माबूद है। उसके सिवा कोई इबादत के लायक़ नहीं। वही ज़िंदगी देता है और वही मौत देता है। वह तुम्हारा रब भी है और तुम्हारे अज़दाद (पूर्वजों) का रब भी। तो उसी की इबादत करो, उन चीज़ों को छोड़ दो जो न तो तुम्हें नफ़ा पहुँचा सकती हैं और न नुक़सान।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन हमारे लिए कितनी बड़ी नेमत है। अल्लाह ने जिस किताब की क़सम खाई, उसकी अज़मत का अंदाज़ा लगाइए — यह वह किताब है जो हर उस इंसान के लिए रौशनी है जो हिदायत चाहता है। आज दुनिया में इंसान किताबों के पीछे भटक रहा है, लेकिन यह किताब हर सवाल का जवाब देती है, हर उलझन को सुलझाती है। जो शख्स इस किताब को पकड़ ले, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। यह हमारे लिए दावत है कि हम क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें — क्योंकि यही हमारी कामयाबी की कुंजी है। अल्लाह ने इस किताब को आसान बनाया है, ताकि हर इंसान — चाहे वह किसी भी ज़ुबान बोलता हो — उससे हिदायत हासिल कर सके।



📜 आयत 1-4 — सूरा अद-दुखान

1حم
हा मीम
2وَالْكِتَابِ الْمُبِينِ
वाज़ेए व रौशन किताब (कुरान) की क़सम
3إِنَّا أَنزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةٍ مُّبَارَكَةٍ ۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَ
हमने इसको मुबारक रात (शबे क़द्र) में नाज़िल किया बेशक हम (अज़ाब से) डराने वाले थे
4فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍ
इसी रात को तमाम दुनिया के हिक़मत व मसलेहत के (साल भर के) काम फ़ैसले किये जाते हैं
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — अद-दुखान 2

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Monday, September 28, 2026

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