अद-दुखान · 3/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
إِنَّا أَنزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةٍ مُّبَارَكَةٍ ۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَ ۝٣
Innaaa anzalnaahu fee lailatim mubaarakah; innaa kunnaa munzireen
📖 हिंदी अर्थ
हमने इसको मुबारक रात (शबे क़द्र) में नाज़िल किया बेशक हम (अज़ाब से) डराने वाले थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अन्ज़लनाहु (أَنزَلْنَاهُ): हमने इसे उतारा — यहाँ "इसे" से अर्थ क़ुरआन है।
  • मुबारक (مُبَارَكَةٍ): बरकत वाली, जिसमें ख़ैर और भलाई बहुत हो।
  • मुन्ज़िरीन (مُنذِرِينَ): डराने वाले, सावधान करने वाले — यानी अल्लाह के पैग़म्बर और उनकी शिक्षाएँ।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने यह क़ुरआन एक बरकत वाली रात में उतारा — और वह रात "लैलतुल क़द्र" है, जो रमज़ान के महीने में आती है। यह रात इतनी बरकत वाली है कि उसमें हज़ार महीनों से बेहतर इबादत का सवाब मिलता है। इसी रात को क़ुरआन पूरा का पूरा लौहे महफ़ूज़ से आसमाने दुनिया पर उतारा गया, और फिर धीरे-धीरे हमारे प्यारे नबी ﷺ पर 23 सालों में नाज़िल हुआ।

अल्लाह ने यह क़ुरआन क्यों उतारा? इसलिए कि वह अपने बंदों को सच्चा रास्ता दिखाए, उन्हें अज़ाब से डराए और जन्नत की ख़ुशख़बरी दे। अल्लाह ने पैग़म्बरों को भेजा और किताबें उतारीं ताकि लोगों के पास कोई बहाना न रहे कि हमें पता ही नहीं था। यह अल्लाह की रहमत है कि उसने अपने बंदों को अंधेरे में नहीं छोड़ा, बल्कि हिदायत का नूर दिया।

इस आयत में हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है — अल्लाह ने हम पर इतना बड़ा एहसान किया कि हमें अपनी किताब दी, जो हर ज़रूरत का हल बताती है। हमें चाहिए कि इस क़ुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है। जो लोग क़ुरआन को छोड़ देंगे, वे दुनिया में भी गुमराह रहेंगे और आख़िरत में भी नुक़सान उठाएँगे। लेकिन जो इसे पकड़ लेंगे, अल्लाह उन्हें सीधे रास्ते पर चलाएगा और उनकी ज़िंदगी में बरकत डालेगा।

याद रखिए — यह रात (लैलतुल क़द्र) हर साल आती है, और अल्लाह ने इसे अपने बंदों के लिए रहमत का ख़ज़ाना बनाया है। हमें चाहिए कि इस रात को इबादत में गुज़ारें, क़ुरआन पढ़ें, दुआ करें और अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी माँगें। यही वह रात है जिसके बारे में क़ुरआन में कहा गया है कि यह हज़ार महीनों से बेहतर है।



📜 आयत 1-5 — अद-दुखान

1حم
हा मीम
2وَالْكِتَابِ الْمُبِينِ
वाज़ेए व रौशन किताब (कुरान) की क़सम
3إِنَّا أَنزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةٍ مُّبَارَكَةٍ ۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَ
हमने इसको मुबारक रात (शबे क़द्र) में नाज़िल किया बेशक हम (अज़ाब से) डराने वाले थे
4فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍ
इसी रात को तमाम दुनिया के हिक़मत व मसलेहत के (साल भर के) काम फ़ैसले किये जाते हैं
5أَمْرًا مِّنْ عِندِنَا ۚ إِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَ
यानि हमारे यहाँ से हुक्म होकर (बेशक) हम ही (पैग़म्बरों के) भेजने वाले हैं
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीRevelation
3आयत

अनुवाद — अद-दुखान 3

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Tuesday, August 18, 2026

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