अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَدْنَى: कम से कम, या उससे भी कम।
- يُقَدِّرُ: अंदाज़ा लगाता है, मापता है, निर्धारित करता है।
- لَّن تُحْصُوهُ: तुम उसे (रात के पहरों को) नाप नहीं सकते, उसका सही-सही हिसाब नहीं रख सकते।
- فَتَابَ عَلَيْكُمْ: उसने तुम पर कृपा की, तुम्हें माफ़ किया, और तुम्हारे लिए आसानी कर दी।
- يَضْرِبُونَ فِي الْأَرْضِ: ज़मीन पर चलते हैं, यात्रा करते हैं (व्यापार या काम के लिए)।
- قَرْضًا حَسَنًا: अच्छा कर्ज़, यानी अल्लाह की राह में खर्च करना, जिसका बदला अल्लाह देगा।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आपका रब खूब जानता है कि आप रात को (तहज्जुद की नमाज़ के लिए) उठते हैं। कभी आप रात के दो-तिहाई से भी कम हिस्से में उठते हैं, कभी आधी रात में, और कभी एक-तिहाई रात में। और आपके साथ आपके कुछ साथी (सहाबा) भी उठते हैं। अल्लाह ही है जो रात और दिन के पहरों का सही-सही अंदाज़ा रखता है। उसे मालूम है कि तुम लोग रात के पहरों का ठीक-ठीक हिसाब नहीं रख सकते, इसलिए उसने तुम पर कृपा की और तुम्हारे लिए आसानी कर दी। अब रात की नमाज़ में उतना ही क़ुरआन पढ़ो जितना तुम्हारे लिए आसान हो।
अल्लाह को पहले से ही मालूम था कि तुम में से कुछ लोग बीमार होंगे, कुछ लोग ज़मीन पर सफ़र करेंगे (व्यापार या काम की तलाश में) और अल्लाह का रिज़्क़ कमाएँगे, और कुछ लोग अल्लाह के रास्ते में जिहाद करेंगे। इन सबके लिए पूरी रात उठना मुश्किल होगा। इसलिए अल्लाह ने आसानी दी कि रात में उतना ही पढ़ो जितना आसान हो।
साथ ही, फ़र्ज़ नमाज़ों को पूरे अदब और पाबंदी से अदा करो, ज़कात दो, और अल्लाह को अच्छा कर्ज़ दो (यानी उसकी राह में खर्च करो)। जो भी भलाई तुम अपने लिए आगे भेजोगे, उसे अल्लाह के पास पाओगे, और वह बहुत बेहतर और बड़े सवाब वाली होगी। आख़िर में अल्लाह से माफ़ी माँगते रहो। बेशक अल्लाह बहुत माफ़ करने वाला और बेहद रहम करने वाला है।
दावत (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें अल्लाह की असीम रहमत और मेहरबानी का एहसास कराती है। अल्लाह हमारी कमज़ोरियों को जानता है और हम पर बोझ नहीं डालता। वह चाहता है कि हम उसकी इबादत करें, लेकिन इस तरह जो हमारे लिए आसान हो और जिससे हमारा दिल जुड़ा रहे। रात की नमाज़, क़ुरआन की तिलावत, नमाज़, ज़कात और अल्लाह की राह में खर्च करना — ये सब ऐसे अमल हैं जो हमें अल्लाह के करीब लाते हैं। और सबसे बड़ी बात — अल्लाह से माफ़ी माँगना। वह माफ़ करने वाला और रहम करने वाला है। कोई भी गुनाह इतना बड़ा नहीं कि अल्लाह की रहमत उससे बड़ी न हो। तो आइए, हम इस आयत पर अमल करें, अपनी नमाज़ों का ख़याल रखें, और अल्लाह से माफ़ी माँगते रहें। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 18-20 — अल-मुज्जम्मिल
अनुवाद — अल-मुज्जम्मिल 20
सूरा अल-मुज्जम्मिल आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार चाहता है कि तुम और तुम्हारे…सूरा आयत 20/20 — अल-मुज्जम्मिल المزمل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुज्जम्मिल सुनें, अल-मुज्जम्मिल अनुवाद, अल-मुज्जम्मिल mp3, अल-मुज्जम्मिल pdf. आयत 18–20. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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