अल-मुरसलात · 2/50
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुरसलात
فَالْعَاصِفَاتِ عَصْفًا ۝٢
Fal`aasifaati `asfaa
📖 हिंदी अर्थ
फिर ज़ोर पकड़ के ऑंधी हो जाती हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَالْعَاصِفَاتِ: तेज़ हवाएँ जो ज़ोर से चलती हैं।
  • عَصْفًا: बहुत तेज़ी से, ज़ोरदार झोंके के साथ।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में तेज़ और ज़ोरदार हवाओं की क़सम खाई है, जो अपनी पूरी ताक़त और शिद्दत के साथ चलती हैं और अपने रास्ते में आने वाली हर चीज़ को उखाड़ फेंकती हैं। यह क़सम अल्लाह की क़ुदरत और उसकी ताक़त की निशानी है, कि वह हवाओं को अपने हुक्म से चलाता है और उन्हें जब चाहे तेज़ कर देता है। यह उस दिन की याद दिलाता है जब अल्लाह की ताक़त सामने आएगी और हर इंसान को उसके अमलों का हिसाब दिया जाएगा।

इस क़सम का मक़सद लोगों को उस वादे की सच्चाई पर यक़ीन दिलाना है जो अल्लाह ने क़यामत के दिन के बारे में किया है। जिस तरह अल्लाह हवाओं को अपने इशारे पर चलाता है और उन्हें तेज़ या धीमा करता है, उसी तरह वह क़यामत के दिन को भी लाने पर पूरी तरह क़ादिर है। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ताक़त के आगे कुछ भी मुश्किल नहीं है, और उसका वादा सच्चा है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की अज़मत और उसकी ताक़त पर ग़ौर करने की तरफ़ बुलाती है। जब हम तेज़ हवाओं को देखते हैं जो पेड़ों को उखाड़ देती हैं और इमारतों को तबाह कर देती हैं, तो हमें याद आना चाहिए कि अल्लाह की क़ुदरत कितनी बड़ी है। यह हमें उस दिन के लिए तैयारी करने की तरग़ीब देती है जब हर इंसान अपने अमलों का हिसाब देगा। अल्लाह ने यह क़सम इसलिए खाई ताकि हम उसके वादे पर यक़ीन करें और अपनी ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ बनाएं। यह हमारे लिए एक रहमत और नसीहत है कि हम दुनिया की चंद रोज़ा ज़िंदगी में उस आख़िरत को न भूलें जो हमेशा रहने वाली है।



📜 आयत 1-4 — सूरा अल-मुरसलात

1وَالْمُرْسَلَاتِ عُرْفًا
हवाओं की क़सम जो (पहले) धीमी चलती हैं
2فَالْعَاصِفَاتِ عَصْفًا
फिर ज़ोर पकड़ के ऑंधी हो जाती हैं
3وَالنَّاشِرَاتِ نَشْرًا
और (बादलों को) उभार कर फैला देती हैं
4فَالْفَارِقَاتِ فَرْقًا
फिर (उनको) फाड़ कर जुदा कर देती हैं
अल-मुरसलातकुरान सूची
50आयत
मक्कीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — अल-मुरसलात 2

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Monday, September 28, 2026

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