सूरा अल-मुरसलात अरबी और हिंदी

सूरा अल-मुरसलात को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (50 आयत — مكية). अल-मुरसलात सुनें, अल-मुरसलात अनुवाद, अल-मुरसलात mp3, अल-मुरसलात pdf.

सूरा अल-मुरसलात पढ़ें और सुनें

🎧 आयत
M Mishary Rashid Alafasy
M Mahmoud Khalil Al-Husary
A Abdurrahman As-Sudais
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi
A Abdul Basit Abdul Samad
A Ali Al-Hudhaify
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy
A Abu Bakr Ash-Shaatree
M Muhammad Ayyoub
A Abdullah Basfar
A Abdullah Al-Juhani
M Maher Al Muaiqly
x1
وَالْمُرْسَلَاتِ عُرْفًا ۝١
📖 अनुवाद आयत 1
हवाओं की क़सम जो (पहले) धीमी चलती हैं
فَالْعَاصِفَاتِ عَصْفًا ۝٢
📖 अनुवाद आयत 2
फिर ज़ोर पकड़ के ऑंधी हो जाती हैं
وَالنَّاشِرَاتِ نَشْرًا ۝٣
📖 अनुवाद आयत 3
और (बादलों को) उभार कर फैला देती हैं
فَالْفَارِقَاتِ فَرْقًا ۝٤
📖 अनुवाद आयत 4
फिर (उनको) फाड़ कर जुदा कर देती हैं
فَالْمُلْقِيَاتِ ذِكْرًا ۝٥
📖 अनुवाद आयत 5
फिर फरिश्तों की क़सम जो वही लाते हैं
عُذْرًا أَوْ نُذْرًا ۝٦
📖 अनुवाद आयत 6
ताकि हुज्जत तमाम हो और डरा दिया जाए
إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَوَاقِعٌ ۝٧
📖 अनुवाद आयत 7
कि जिस बात का तुमसे वायदा किया जाता है वह ज़रूर होकर रहेगा
فَإِذَا النُّجُومُ طُمِسَتْ ۝٨
📖 अनुवाद आयत 8
फिर जब तारों की चमक जाती रहेगी
وَإِذَا السَّمَاءُ فُرِجَتْ ۝٩
📖 अनुवाद आयत 9
और जब आसमान फट जाएगा
وَإِذَا الْجِبَالُ نُسِفَتْ ۝١٠
📖 अनुवाद आयत 10
और जब पहाड़ (रूई की तरह) उड़े उड़े फिरेंगे
وَإِذَا الرُّسُلُ أُقِّتَتْ ۝١١
📖 अनुवाद आयत 11
और जब पैग़म्बर लोग एक मुअय्यन वक्त पर जमा किए जाएँगे
لِأَيِّ يَوْمٍ أُجِّلَتْ ۝١٢
📖 अनुवाद आयत 12
(फिर) भला इन (बातों) में किस दिन के लिए ताख़ीर की गयी है
لِيَوْمِ الْفَصْلِ ۝١٣
📖 अनुवाद आयत 13
फ़ैसले के दिन के लिए
وَمَا أَدْرَاكَ مَا يَوْمُ الْفَصْلِ ۝١٤
📖 अनुवाद आयत 14
और तुमको क्या मालूम की फ़ैसले का दिन क्या है
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝١٥
📖 अनुवाद आयत 15
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है
أَلَمْ نُهْلِكِ الْأَوَّلِينَ ۝١٦
📖 अनुवाद आयत 16
क्या हमने अगलों को हलाक नहीं किया
ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ الْآخِرِينَ ۝١٧
📖 अनुवाद आयत 17
फिर उनके पीछे पीछे पिछलों को भी चलता करेंगे
كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِالْمُجْرِمِينَ ۝١٨
📖 अनुवाद आयत 18
हम गुनेहगारों के साथ ऐसा ही किया करते हैं
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝١٩
📖 अनुवाद आयत 19
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है
أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّاءٍ مَّهِينٍ ۝٢٠
📖 अनुवाद आयत 20
क्या हमने तुमको ज़लील पानी (मनी) से पैदा नहीं किया
فَجَعَلْنَاهُ فِي قَرَارٍ مَّكِينٍ ۝٢١
📖 अनुवाद आयत 21
फिर हमने उसको एक मुअय्यन वक्त तक
إِلَىٰ قَدَرٍ مَّعْلُومٍ ۝٢٢
📖 अनुवाद आयत 22
एक महफूज़ मक़ाम (रहम) में रखा
فَقَدَرْنَا فَنِعْمَ الْقَادِرُونَ ۝٢٣
📖 अनुवाद आयत 23
फिर (उसका) एक अन्दाज़ा मुक़र्रर किया तो हम कैसा अच्छा अन्दाज़ा मुक़र्रर करने वाले हैं
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝٢٤
📖 अनुवाद आयत 24
उन दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
أَلَمْ نَجْعَلِ الْأَرْضَ كِفَاتًا ۝٢٥
📖 अनुवाद आयत 25
क्या हमने ज़मीन को ज़िन्दों और मुर्दों को समेटने वाली नहीं बनाया
أَحْيَاءً وَأَمْوَاتًا ۝٢٦
📖 अनुवाद आयत 26
और उसमें ऊँचे ऊँचे अटल पहाड़ रख दिए
وَجَعَلْنَا فِيهَا رَوَاسِيَ شَامِخَاتٍ وَأَسْقَيْنَاكُم مَّاءً فُرَاتًا ۝٢٧
📖 अनुवाद आयत 27
और तुम लोगों को मीठा पानी पिलाया
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝٢٨
📖 अनुवाद आयत 28
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
انطَلِقُوا إِلَىٰ مَا كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ ۝٢٩
📖 अनुवाद आयत 29
जिस चीज़ को तुम झुठलाया करते थे अब उसकी तरफ़ चलो
انطَلِقُوا إِلَىٰ ظِلٍّ ذِي ثَلَاثِ شُعَبٍ ۝٣٠
📖 अनुवाद आयत 30
(धुएँ के) साये की तरफ़ चलो जिसके तीन हिस्से हैं
لَّا ظَلِيلٍ وَلَا يُغْنِي مِنَ اللَّهَبِ ۝٣١
📖 अनुवाद आयत 31
जिसमें न ठन्डक है और न जहन्नुम की लपक से बचाएगा
إِنَّهَا تَرْمِي بِشَرَرٍ كَالْقَصْرِ ۝٣٢
📖 अनुवाद आयत 32
उससे इतने बड़े बड़े अंगारे बरसते होंगे जैसे महल
كَأَنَّهُ جِمَالَتٌ صُفْرٌ ۝٣٣
📖 अनुवाद आयत 33
गोया ज़र्द रंग के ऊँट हैं
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝٣٤
📖 अनुवाद आयत 34
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
هَٰذَا يَوْمُ لَا يَنطِقُونَ ۝٣٥
📖 अनुवाद आयत 35
ये वह दिन होगा कि लोग लब तक न हिला सकेंगे
وَلَا يُؤْذَنُ لَهُمْ فَيَعْتَذِرُونَ ۝٣٦
📖 अनुवाद आयत 36
और उनको इजाज़त दी जाएगी कि कुछ उज्र माअज़ेरत कर सकें
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝٣٧
📖 अनुवाद आयत 37
उस दिन झुठलाने वालों की तबाही है
هَٰذَا يَوْمُ الْفَصْلِ ۖ جَمَعْنَاكُمْ وَالْأَوَّلِينَ ۝٣٨
📖 अनुवाद आयत 38
यही फैसले का दिन है (जिस में) हमने तुमको और अगलों को इकट्ठा किया है
فَإِن كَانَ لَكُمْ كَيْدٌ فَكِيدُونِ ۝٣٩
📖 अनुवाद आयत 39
तो अगर तुम्हें कोई दाँव करना हो तो आओ चल चुको
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝٤٠
📖 अनुवाद आयत 40
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي ظِلَالٍ وَعُيُونٍ ۝٤١
📖 अनुवाद आयत 41
बेशक परहेज़गार लोग (दरख्तों की) घनी छाँव में होंगे
وَفَوَاكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَ ۝٤٢
📖 अनुवाद आयत 42
और चश्मों और आदमियों में जो उन्हें मरग़ूब हो
كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝٤٣
📖 अनुवाद आयत 43
(दुनिया में) जो अमल करते थे उसके बदले में मज़े से खाओ पियो
إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ ۝٤٤
📖 अनुवाद आयत 44
मुबारक हम नेकोकारों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝٤٥
📖 अनुवाद आयत 45
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
كُلُوا وَتَمَتَّعُوا قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ ۝٤٦
📖 अनुवाद आयत 46
(झुठलाने वालों) चन्द दिन चैन से खा पी लो तुम बेशक गुनेहगार हो
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝٤٧
📖 अनुवाद आयत 47
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है
وَإِذَا قِيلَ لَهُمُ ارْكَعُوا لَا يَرْكَعُونَ ۝٤٨
📖 अनुवाद आयत 48
और जब उनसे कहा जाता है कि रूकूउ करों तो रूकूउ नहीं करते
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝٤٩
📖 अनुवाद आयत 49
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
فَبِأَيِّ حَدِيثٍ بَعْدَهُ يُؤْمِنُونَ ۝٥٠
📖 अनुवाद आयत 50
अब इसके बाद ये किस बात पर ईमान लाएँगे
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77المرسلات Al-Mursalat 📚 50 आयत مكية

आयत-दर-आयत – सूरा अल-मुरसलात — 50 आयत




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए