अल-मुरसलात · 3/50
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुरसलात
وَالنَّاشِرَاتِ نَشْرًا ۝٣
Wannaashiraati nashraa
📖 हिंदी अर्थ
और (बादलों को) उभार कर फैला देती हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • وَالنَّاشِرَاتِ: अर्थात फैलाने वाली (हवाएँ या फ़रिश्ते)।
  • نَشْرًا: फैलाना, विस्तार करना।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में उन हवाओं की क़सम खाई है जो बादलों को फैलाती हैं और बारिश को ज़मीन पर फैलाती हैं। ये हवाएँ अल्लाह की रहमत का सबब होती हैं, जो बंजर ज़मीन को ज़िंदा करती हैं और इंसानों, जानवरों और पेड़-पौधों के लिए रिज़्क़ का ज़रिया बनती हैं। कुछ मुफ़स्सिरीन के अनुसार, यहाँ "नाशिरात" से मुराद वे फ़रिश्ते भी हो सकते हैं जो अल्लाह का पैग़ाम (वही) फैलाते हैं और उसे नबियों तक पहुँचाते हैं।

यह क़सम इस बात की गवाही देती है कि अल्लाह तआला की कुदरत और रहमत हर जगह फैली हुई है। जिस तरह वह हवाओं के ज़रिए बादलों को फैलाकर बारिश बरसाता है और ज़मीन को ज़िंदा करता है, उसी तरह वह अपने फ़रिश्तों के ज़रिए हिदायत और रहमत का पैग़ाम इंसानों तक पहुँचाता है। यह सब कुछ अल्लाह की इबादत और उसकी तारीफ़ के लिए है।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि अल्लाह तआला की नेमतें और रहमतें बेशुमार हैं। उसकी कुदरत के नज़ारे हर तरफ़ बिखरे हुए हैं। हमें चाहिए कि इन नेमतों पर ग़ौर करें और उसका शुक्र अदा करें। जिस तरह हवाएँ बादलों को फैलाकर बारिश का सबब बनती हैं, उसी तरह हमें भी अपने आस-पास अच्छाई, भलाई और इंसानियत का पैग़ाम फैलाना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की मुहब्बत और उसकी रज़ा तक पहुँचाता है।

याद रखिए, अल्लाह तआला की क़समें उसकी अज़मत और कुदरत की निशानी हैं। जब वह हवाओं की क़सम खाता है, तो इसका मतलब है कि ये चीज़ें अपनी जगह बहुत अहम और बड़ी हैं। हमें इन पर ग़ौर करके अपने ईमान को मज़बूत करना चाहिए और अल्लाह की इबादत में मशगूल रहना चाहिए। यही कामयाबी और खुशहाली का रास्ता है।



📜 आयत 1-5 — सूरा अल-मुरसलात

1وَالْمُرْسَلَاتِ عُرْفًا
हवाओं की क़सम जो (पहले) धीमी चलती हैं
2فَالْعَاصِفَاتِ عَصْفًا
फिर ज़ोर पकड़ के ऑंधी हो जाती हैं
3وَالنَّاشِرَاتِ نَشْرًا
और (बादलों को) उभार कर फैला देती हैं
4فَالْفَارِقَاتِ فَرْقًا
फिर (उनको) फाड़ कर जुदा कर देती हैं
5فَالْمُلْقِيَاتِ ذِكْرًا
फिर फरिश्तों की क़सम जो वही लाते हैं
अल-मुरसलातकुरान सूची
50आयत
मक्कीअवतरण स्थान
3आयत

अनुवाद — अल-मुरसलात 3

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Monday, September 28, 2026

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