Wa laqad ba`asnaa fee kulli ummatir Rasoolan ani`budul laaha wajtanibut Taaghoota faminhum man hadal laahu wa minhum man haqqat `alaihid dalaalah; faseeroo fil ardi fanzuroo kaifa kaana `aaqibatul mukazzibeen
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
और हमने तो हर उम्मत में एक (न एक) रसूल इस बात के लिए ज़रुर भेजा कि लोगों ख़ुदा की इबादत करो और बुतों (की इबादत) से बचे रहो ग़रज़ उनमें से बाज़ की तो ख़ुदा ने हिदायत की और बाज़ के (सर) पर गुमराही सवार हो गई तो ज़रा तुम लोग रुए ज़मीन पर चल फिर कर देखो तो कि (पैग़म्बराने ख़ुदा के) झुठलाने वालों को क्या अन्जाम हुआ
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اور ہم نے ہر جماعت میں پیغمبر بھیجا کہ خدا ہی کی عبادت کرو اور بتوں (کی پرستش) سے اجتناب کرو۔ تو ان میں بعض ایسے ہیں جن کو خدا نے ہدایت دی اور بعض ایسے ہیں جن پر گمراہی ثابت ہوئی۔ سو زمین پر چل پھر کر دیکھ لو کہ جھٹلانے والوں کا انجام کیسا ہوا
और हमने तो हर उम्मत में एक (न एक) रसूल इस बात के लिए ज़रुर भेजा कि लोगों ख़ुदा की इबादत करो और बुतों (की इबादत) से बचे रहो ग़रज़ उनमें से बाज़ की तो ख़ुदा ने हिदायत की और बाज़ के (सर) पर गुमराही सवार हो गई तो ज़रा तुम लोग रुए ज़मीन पर चल फिर कर देखो तो कि (पैग़म्बराने ख़ुदा के) झुठलाने वालों को क्या अन्जाम हुआ
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
बَعَثْنَا: हमने भेजा।
उम्मत: समुदाय या जाति।
ताग़ूत: हर वह चीज़ जिसे अल्लाह के अलावा पूजा जाए, चाहे वह मूर्ति हो, शैतान हो, जिन्न हो या कोई इंसान।
ह़क़्क़त: साबित हो गई, वाजिब हो गई।
अ़क़िबत: अंजाम, परिणाम।
मुकज़्ज़िबीन: झुठलाने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में बताया कि उसने हर उम्मत में एक रसूल भेजा। इन रसूलों का मूल संदेश एक ही था—केवल अल्लाह की इबादत करो और ताग़ूत (अल्लाह के अलावा हर पूज्य) से बचो। यही दीन का सार है जो आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) तक सभी नबियों का पैग़ाम रहा।
इसके बाद अल्लाह ने बताया कि लोगों की प्रतिक्रिया दो प्रकार की थी—कुछ लोगों को अल्लाह ने हिदायत दी और उन्होंने रसूलों का अनुसरण किया, जबकि कुछ लोगों पर गुमराही साबित हो गई, क्योंकि उन्होंने सत्य को जानते हुए भी उसे ठुकरा दिया और हठधर्मी पर अड़े रहे। यह उनकी अपनी पसंद का परिणाम था, न कि अल्लाह की ओर से ज़ुल्म।
अंत में अल्लाह क़ुरैश और सभी लोगों को नसीहत करता है कि वे धरती में चलें-फिरें और देखें कि उन लोगों का अंजाम क्या हुआ जिन्होंने रसूलों को झुठलाया। उनके शहर वीरान हो गए, उनकी ताक़त मिट्टी में मिल गई और वे इतिहास के पन्नों में सिर्फ़ एक सबक़ बनकर रह गए।
फ़ायदे (सीख):
दीन की एकरूपता: इस आयत से पता चलता है कि सभी रसूलों का संदेश एक ही था—तौहीद और ताग़ूत से बचाव। इस्लाम कोई नया दीन नहीं बल्कि उसी मूल संदेश का अंतिम रूप है।
हिदायत और गुमराही का राज़: अल्लाह किसी को ज़बरदस्ती गुमराह नहीं करता। जो लोग सच्चाई को स्वीकार करने का इरादा रखते हैं, अल्लाह उन्हें हिदायत देता है। जो लोग हठधर्मी और अहंकार के कारण सच्चाई को ठुकराते हैं, अल्लाह उन्हें उनके हाल पर छोड़ देता है।
इतिहास से सबक़: यह आयत हमें प्रोत्साहित करती है कि हम इतिहास से सीखें। जिन क़ौमों ने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया, उनका अंजाम विनाश के अलावा कुछ नहीं था। यह हमारे लिए चेतावनी है कि हम उनके रास्ते पर न चलें।
अल्लाह की रहमत: अल्लाह ने किसी भी उम्मत को बिना रसूल भेजे सज़ा नहीं दी। यह उसकी रहमत और न्याय का प्रमाण है कि उसने हर जगह अपना संदेश पहुँचाया ताकि लोगों के पास कोई बहाना न बचे।
आज़ादी और ज़िम्मेदारी: इंसान को चुनने की आज़ादी दी गई है, लेकिन इस आज़ादी के साथ ज़िम्मेदारी भी है। हमें अपनी पसंद के नतीजे भुगतने होंगे। इसलिए बेहतर है कि हम हिदायत का रास्ता चुनें।
और मुशरेकीन कहते हैं कि अगर ख़ुदा चाहता तो न हम ही उसके सिवा किसी और चीज़ की इबादत करते और न हमारे बाप दादा और न हम बग़ैर उस (की मर्ज़ी) के किसी चीज़ को हराम कर बैठते जो लोग इनसे पहले हो गुज़रे हैं वह भी ऐसे (हीला हवाले की) बातें कर चुके हैं तो (कहा करें) पैग़म्बरों पर तो उसके सिवा कि एहकाम को साफ साफ पहुँचा दे और कुछ भी नहीं
और हमने तो हर उम्मत में एक (न एक) रसूल इस बात के लिए ज़रुर भेजा कि लोगों ख़ुदा की इबादत करो और बुतों (की इबादत) से बचे रहो ग़रज़ उनमें से बाज़ की तो ख़ुदा ने हिदायत की और बाज़ के (सर) पर गुमराही सवार हो गई तो ज़रा तुम लोग रुए ज़मीन पर चल फिर कर देखो तो कि (पैग़म्बराने ख़ुदा के) झुठलाने वालों को क्या अन्जाम हुआ
(ऐ रसूल) अगर तुमको इन लोगों के राहे रास्त पर जाने का हौका है (तो बे फायदा) क्योंकि ख़ुदा तो हरगिज़ उस शख़्श की हिदायत नहीं करेगा जिसको (नाज़िल होने की वजह से) गुमराही में छोड़ देता है और न उनका कोई मददगार है
(कि अज़ाब से बचाए) और ये कुफ्फार ख़ुदा की जितनी क़समें उनके इमकान में तुम्हें खा (कर कहते) हैं कि जो शख़्श मर जाता है फिर उसको ख़ुदा दोबारा ज़िन्दा नहीं करेगा (ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ ज़रुर ऐसा करेगा इस पर अपने वायदे की (वफा) लाज़िम व ज़रुरी है मगर बहुतेरे आदमी नहीं जानते हैं
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