Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَوْ شَاءَ اللهُ: अगर अल्लाह चाहता।
- مِن دُونِهِ: उसके अलावा, उसे छोड़कर।
- آبَاؤُنَا: हमारे बाप-दादा।
- حَرَّمْنَا: हमने हराम ठहराया (जैसे बहीरा, साइबा, वसीला आदि)।
- الْبَلَاغُ الْمُبِينُ: स्पष्ट रूप से संदेश पहुँचाना।
विस्तृत व्याख्या:
जिन लोगों ने अल्लाह के साथ साझीदार ठहराए (मुशरिकीन), उन्होंने अपने कुकर्मों को सही ठहराने के लिए एक बहाना बनाया। उन्होंने कहा: "अगर अल्लाह चाहता तो हम उसके अलावा किसी और की पूजा न करते, न हम और न हमारे पूर्वज, और न हम उसके अलावा किसी चीज़ को हराम ठहराते (जैसे बहीरा, साइबा, वसीला आदि)।" उनका तर्क यह था कि अगर अल्लाह को यह पसंद न होता तो वह हमें इन कामों पर क़ाबू न देता, इसलिए हमारा यह करना अल्लाह की मर्ज़ी से है।
यह बहाना बिल्कुल झूठा और बेबुनियाद है, क्योंकि अल्लाह ने उन्हें अक्ल, समझ, इच्छा और चुनने की शक्ति दी है। उसने अपने रसूल भेजे जिन्होंने उन्हें साफ़-साफ़ बता दिया कि क्या सही है और क्या गलत। अल्लाह की मर्ज़ी का यह मतलब नहीं कि वह उन्हें ज़बरदस्ती गुमराही पर मजबूर करे, बल्कि उसने उन्हें आज़ादी दी और रास्ता दिखाया। इसी तरह का बहाना पहले के काफ़िरों ने भी बनाया था, लेकिन यह उनके काम न आया। रसूलों का काम सिर्फ़ अल्लाह का संदेश साफ़-साफ़ पहुँचा देना है, और उन्होंने यह कर दिखाया। इसके बाद लोगों का हिसाब अल्लाह के ज़िम्मे है।
फ़ायदे और सबक:
- अल्लाह ने इंसान को इच्छा और चुनाव की शक्ति दी है, इसलिए हर इंसान अपने कर्मों के लिए खुद ज़िम्मेदार है। क़िस्मत का बहाना बनाकर गुनाहों को सही नहीं ठहराया जा सकता।
- अल्लाह की मर्ज़ी का सही मतलब यह है कि उसने हिदायत और गुमराही के रास्ते साफ़ कर दिए, और रसूल भेजकर अपनी तरफ़ से हुज्जत (प्रमाण) पूरी कर दी।
- रसूलों का काम सिर्फ़ संदेश पहुँचाना है, लोगों को ज़बरदस्ती सीधे रास्ते पर लाना उनका काम नहीं। यह हमें सिखाता है कि हमें भी दूसरों तक अल्लाह का संदेश पहुँचाना है, लेकिन नतीजा अल्लाह पर छोड़ देना चाहिए।
- यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम एक तर्कसंगत और ज़िम्मेदारी वाला धर्म है, जो हर इंसान को उसकी ज़िम्मेदारी का एहसास कराता है और उसे अल्लाह के सामने जवाबदेह ठहराता है।
📜 आयत 33-37 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 35
सूरा अन-नहल आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मुशरेकीन कहते हैं कि अगर ख़ुदा चाहता तो न…सूरा आयत 35/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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