Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- غَيْرَ نَاظِرِينَ إِنَاهُ: भोजन के पकने की प्रतीक्षा न करते हुए (अर्थात, समय से पहले न जाएँ)।
- فَانتَشِرُوا: वहाँ से चले जाओ (बाहर निकल जाओ)।
- مُسْتَأْنِسِينَ لِحَدِيثٍ: आपस में बातचीत करने के लिए (वहाँ) ठहरना।
- مَتَاعًا: कोई सामान या आवश्यक वस्तु।
- حِجَابٍ: पर्दा (परदा)।
- أَطْهَرُ: अधिक पवित्र (दिलों की शुद्धि के लिए बेहतर)।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ ईमान वालो! अल्लाह तआला तुम्हें सिखा रहा है कि नबी ﷺ के घर में प्रवेश करने का सलीक़ा क्या होना चाहिए। यह सिर्फ़ एक सामाजिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि ईमान की परख है। नबी ﷺ के घर में बिना अनुमति के, और खासकर भोजन के पकने का इंतज़ार करते हुए, पहले से न जाओ। जब तुम्हें दावत दी जाए, तभी जाओ, और जब खाना खा लो, तो तुरंत वहाँ से उठ जाओ। वहाँ बैठकर आपस में बातचीत करने के लिए ठहरना नबी ﷺ को तकलीफ़ देता था, क्योंकि वे अपनी शर्म और नर्मी की वजह से तुम्हें जाने के लिए नहीं कह पाते थे। लेकिन अल्लाह तआला हक़ (सत्य) बोलने में कभी शर्म नहीं करता, इसलिए उसने साफ़-साफ़ यह आदेश दिया।
इसी तरह, जब तुम नबी ﷺ की पवित्र पत्नियों से कोई चीज़ माँगो, तो पर्दे के पीछे से माँगो। यह तुम्हारे और उनके दिलों की पवित्रता के लिए अधिक बेहतर है, क्योंकि आँखों का देखना दिल में फ़ितना (बुरे ख़यालात) पैदा कर सकता है। शैतान उसी रास्ते से वसवसा डालता है।
और सबसे बड़ी बात—अल्लाह के रसूल ﷺ को किसी भी तरह से तकलीफ़ देना जायज़ नहीं है, और न ही उनके बाद उनकी पत्नियों से विवाह करना। वे तो मोमिनों की माताएँ हैं, और यह काम अल्लाह की नज़र में बहुत बड़ा गुनाह है। यह आदेश सिर्फ़ उस वक़्त के लिए नहीं था, बल्कि हमेशा के लिए है, और उम्मत ने इसे पूरी तरह से अपनाया।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह और उसके रसूल ﷺ की मुहब्बत सिर्फ़ ज़ुबान से नहीं, बल्कि अदब (शिष्टाचार) और एहतिराम से होती है। जिस तरह सहाबा ने नबी ﷺ के घर में जाने के अदब को अपनाया और उनकी पत्नियों का सम्मान किया, उसी तरह हमें भी अपने दिलों को पाक रखना चाहिए और हर उस चीज़ से बचना चाहिए जो अल्लाह को नापसंद है। यह आयत हमें बताती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि हर काम में अदब, हया और पवित्रता का ख़याल रखना भी इबादत है। जो लोग इन आदाब को अपनाते हैं, अल्लाह उनके दिलों को नूर से भर देता है और उन्हें दुनिया और आख़िरत में कामयाबी देता है। आओ, हम सब अपने जीवन में इन आदाब को अपनाएँ और अल्लाह के हुक्मों के सामने सर झुकाएँ—यही हमारी सच्ची कामयाबी है।
📜 आयत 51-55 — सूरा अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 53
सूरा अल-अहज़ाब आयत 53 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों तुम लोग पैग़म्बर के घरों में न जाया…सूरा आयत 53/73 — सूरा अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अहज़ाब सुनें, सूरा अल-अहज़ाब अनुवाद, सूरा अल-अहज़ाब mp3, सूरा अल-अहज़ाब pdf. आयत 51–55. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अहज़ाब
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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