Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تُبْدُوا – प्रकट करना, ज़ाहिर करना
- تُخْفُوهُ – छिपाना, अपने दिल में रखना
- عَلِيمًا – सब कुछ जानने वाला, पूर्ण ज्ञान रखने वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ लोगों! चाहे तुम कोई बात ज़ुबान पर लाकर प्रकट कर दो, या उसे अपने दिलों में छिपाए रखो, अल्लाह तआला के लिए दोनों ही स्थितियाँ एक समान हैं। वह उस हर चीज़ से पूरी तरह अवगत है जो तुम अपनी ज़ुबान से कहते हो और उस हर बात से भी जो तुम अपने सीनों में पोशीदा रखते हो। यहाँ विशेष रूप से उस संदर्भ में बात की गई है जब अल्लाह के रसूल ﷺ की पाक बीवियों के संबंध में कुछ लोगों ने ऐसी बातें कीं जो शरई अदब के खिलाफ थीं, या दिलों में ऐसे ख़यालात पैदा किए जो नापसंदीदा थे। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि तुम चाहे इन बातों को ज़ाहिर करो या छिपाओ, अल्लाह तो हर चीज़ का पूर्ण ज्ञान रखता है।
यह एक बहुत बड़ी चेतावनी है कि अल्लाह तआला की निगाह हमारे ज़ाहिर और बातिन दोनों पर है। वह न केवल हमारे कर्मों को देखता है बल्कि हमारे दिलों के राज़ और छिपे हुए इरादों को भी जानता है। कोई भी बात, चाहे वह कितनी ही गुप्त क्यों न हो, उससे छिपी नहीं है। यही वजह है कि एक मोमिन को चाहिए कि वह अपनी ज़ुबान और अपने दिल दोनों को पाक रखे, क्योंकि अल्लाह तआला हर छोटी-बड़ी बात का हिसाब लेगा।
इस आयत में हमारे लिए एक बहुत प्यारी बशारत (खुशखबरी) भी है कि अल्लाह तआला इतना मेहरबान और रहीम है कि वह हमारी हर नेकी को जानता है, चाहे वह कितनी ही छोटी क्यों न हो, और उसका अज्र अता करेगा। साथ ही यह भी तनबीह है कि बुराई भी उससे छिपी नहीं है, और उसकी सज़ा से बचना मुश्किल है। इसलिए हमें अपनी ज़ुबान को गुनाह से बचाना चाहिए और अपने दिल को बुरे ख़यालात से पाक रखना चाहिए। याद रखिए, अल्लाह तआला से कुछ भी छिपा नहीं है — न हमारे ज़ाहिरी आमाल और न हमारे बातिनी इरादे। यही ईमान की निशानी है कि इंसान हर वक़्त इस एहसास के साथ जिए कि अल्लाह मुझे देख रहा है और मेरी हर बात जानता है।
📜 आयत 52-56 — सूरा अल-अहज़ाब
अनुवाद — अल-अहज़ाब 54
सूरा अल-अहज़ाब आयत 54 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : चाहे किसी चीज़ को तुम ज़ाहिर करो या उसे छिपाओ…सूरा आयत 54/73 — सूरा अल-अहज़ाब الأحزاب (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अहज़ाब सुनें, सूरा अल-अहज़ाब अनुवाद, सूरा अल-अहज़ाब mp3, सूरा अल-अहज़ाब pdf. आयत 52–56. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-अहज़ाब
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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