अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَصَلِّ: तो नमाज़ पढ़ो, अपनी सारी नमाज़ें अल्लाह के लिए ख़ालिस करो।
- لِرَبِّكَ: अपने पालनहार के लिए।
- وَانْحَرْ: और क़ुर्बानी करो (ऊँट या दूसरे जानवर को नहर की तरह गर्दन काटकर)।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को ख़िताब करके फ़रमाता है कि जब हमने तुम्हें कौसर (यानी जन्नत की नहर और ढेर सारी भलाई) अता की है, तो इस एहसान के शुक्र के तौर पर तुम अपनी सारी नमाज़ें सिर्फ़ और सिर्फ़ अपने रब के लिए पढ़ो, और अपनी क़ुर्बानी भी सिर्फ़ उसी के नाम पर करो। यानी नमाज़ और क़ुर्बानी दोनों को ख़ालिस अल्लाह के लिए बनाओ, किसी और के लिए नहीं।
यह हुक्म उस वक़्त दिया गया जब मक्का के मुशरिकीन अपने बुतों (मूर्तियों) के नाम पर जानवर ज़बह करते थे और उनके सामने सजदा करते थे। अल्लाह ने साफ़ फ़रमाया कि तुम्हारी नमाज़ और तुम्हारी क़ुर्बानी सिर्फ़ अल्लाह के लिए होनी चाहिए, किसी मूर्ति, किसी पैग़म्बर या किसी और की तरफ़ निस्बत नहीं होनी चाहिए। यही तौहीद (एकेश्वरवाद) की असली रूह है — इबादत में, दुआ में, नमाज़ में और क़ुर्बानी में सब कुछ सिर्फ़ अल्लाह के लिए।
क़ुर्बानी का मक़सद सिर्फ़ अल्लाह का हुक्म मानना और उसकी रज़ा हासिल करना है। यही वह अमल है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाता है और उसके दिल को साफ़ करता है। जब इंसान अपनी नमाज़ और क़ुर्बानी को अल्लाह के लिए ख़ालिस कर लेता है, तो उसकी ज़िंदगी के तमाम मामलों में इख़लास (शुद्ध नीयत) आ जाती है, और वह हर काम में अल्लाह की रज़ा को मद्देनज़र रखता है।
दावत (पैग़ाम):
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी ज़िंदगी का हर अमल — चाहे वह नमाज़ हो, क़ुर्बानी हो, या कोई और इबादत — सिर्फ़ अल्लाह के लिए होना चाहिए। जब हम अपनी नमाज़ को सिर्फ़ अल्लाह के लिए पढ़ेंगे, तो हमारी नमाज़ में लज़्ज़त आएगी और दिल को सुकून मिलेगा। जब हम अपनी क़ुर्बानी को सिर्फ़ अल्लाह के लिए करेंगे, तो यह अमल हमारे गुनाहों की माफ़ी का ज़रिया बनेगा। याद रखिए, अल्लाह को हमारे गोश्त और ख़ून की ज़रूरत नहीं, बल्कि उसे हमारे दिलों का तक़वा (परहेज़गारी) और इख़लास चाहिए। आइए, हम अपनी ज़िंदगी के हर पहलू में इसी इख़लास को अपनाएँ और अल्लाह के एहसानों का शुक्र अदा करें — नमाज़ से भी और क़ुर्बानी से भी। यही हमारी कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 1-3 — अल-कौसर
अनुवाद — अल-कौसर 2
सूरा अल-कौसर आयत 2 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुम अपने परवरदिगार की नमाज़ पढ़ा करोसूरा आयत 2/3 — अल-कौसर الكوثر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कौसर सुनें, अल-कौसर अनुवाद, अल-कौसर mp3, अल-कौसर pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, August 19, 2026
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