अल-बकरा · 143/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
وَكَذَٰلِكَ جَعَلْنَاكُمْ أُمَّةً وَسَطًا لِّتَكُونُوا شُهَدَاءَ عَلَى النَّاسِ وَيَكُونَ الرَّسُولُ عَلَيْكُمْ شَهِيدًا ۗ وَمَا جَعَلْنَا الْقِبْلَةَ الَّتِي كُنتَ عَلَيْهَا إِلَّا لِنَعْلَمَ مَن يَتَّبِعُ الرَّسُولَ مِمَّن يَنقَلِبُ عَلَىٰ عَقِبَيْهِ ۚ وَإِن كَانَتْ لَكَبِيرَةً إِلَّا عَلَى الَّذِينَ هَدَى اللَّهُ ۗ وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيُضِيعَ إِيمَانَكُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِالنَّاسِ لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ ۝١٤٣
Wa kazaalika ja`alnaakum ummatanw wasatal litakoonoo shuhadaaa`a `alan naasi wa yakoonar Rasoolu `alaikum shaheedaa; wa maa ja`alnal qiblatal latee kunta `alaihaaa illaa lina`lama mai yattabi`ur Rasoola mimmai yanqalibu `alaa `aqibayh; wa in kaanat lakabeeratan illaa `alal lazeena hadal laah; wa maa kaanal laahu liyudee`a eemaanakum; innal laaha binnaasi la Ra`oofur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
और जिस तरह तुम्हारे क़िबले के बारे में हिदायत की उसी तरह तुम को आदिल उम्मत बनाया ताकि और लोगों के मुक़ाबले में तुम गवाह बनो और रसूल मोहम्मद तुम्हारे मुक़ाबले में गवाह बनें और (ऐ रसूल) जिस क़िबले की तरफ़ तुम पहले सज़दा करते थे हम ने उसको को सिर्फ इस वजह से क़िबला क़रार दिया था कि जब क़िबला बदला जाए तो हम उन लोगों को जो रसूल की पैरवी करते हैं हम उन लोगों से अलग देख लें जो उलटे पाव फिरते हैं अगरचे ये उलट फेर सिवा उन लोगों के जिन की ख़ुदा ने हिदायत की है सब पर शाक़ ज़रुर है और ख़ुदा ऐसा नहीं है कि तुम्हारे ईमान नमाज़ को जो बैतुलमुक़द्दस की तरफ पढ़ चुके हो बरबाद कर दे बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा ही रफ़ीक व मेहरबान है।
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • उम्मतन वसतन: न्यायप्रिय, सर्वोत्तम और संतुलित उम्मत।
  • शुहदा: गवाह।
  • अल-क़िब्ला: वह दिशा जिसकी ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ी जाए (यहाँ बैतुल मुक़द्दस का ज़िक्र है)।
  • यनक़लिबु अला अक़िबैहि: अपनी एड़ियों के बल पलट जाना, यानी धर्म से भटककर मुर्तद हो जाना।
  • कबीरह: बहुत भारी और कठिन बात।
  • रऊफ़ुर रहीम: अत्यंत दयालु और मेहरबान।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐसे ही जैसे हमने आपको सीधा और सही रास्ता दिखाया, हमने आपको एक न्यायप्रिय, संतुलित और सर्वोत्तम उम्मत बनाया है। यह उम्मत न अति करने वाली है, न कमी करने वाली, बल्कि हर मामले में बीच का रास्ता अपनाने वाली है। इसीलिए अल्लाह ने आपको चुना ताकि आप क़ियामत के दिन सभी नबियों की उम्मतों पर गवाह बनें कि उनके नबियों ने अल्लाह का संदेश पूरा-पूरा पहुँचा दिया था, और खुद रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) आप पर गवाह होंगे कि उन्होंने आपको अल्लाह का पूरा संदेश पहुँचा दिया।

अल्लाह ने पहले क़िब्ला (बैतुल मुक़द्दस) को इसलिए बनाया था ताकि वह परख ले कि कौन सच्चे दिल से रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पैरवी करता है और कौन अपने दीन से फिर जाता है। यह परीक्षा बहुत कठिन थी, लेकिन जिन्हें अल्लाह ने हिदायत दी और उनके दिलों में ईमान की मज़बूती पैदा की, उन पर यह आसान हो गई। वे समझ गए कि अल्लाह जो भी हुक्म देता है, उसमें हिकमत होती है, चाहे वह हमारी समझ में न आए।

अल्लाह तआला आपके ईमान और आपकी नमाज़ों को हरगिज़ ज़ाइ नहीं करेगा, जो आपने पहले क़िब्ला की ओर मुँह करके पढ़ी थीं। वह सब कुछ देख रहा है और उसका इनाम पूरा-पूरा देगा। बेशक अल्लाह अपने बंदों पर बहुत दयालु और मेहरबान है, वह उन पर ऐसा बोझ नहीं डालता जो उनकी ताकत से बाहर हो, और न ही उनकी नेकियों को ज़ाइ करता है।


दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने हमें एक संतुलित और न्यायप्रिय उम्मत बनाकर दुनिया में सबसे बड़ा सम्मान दिया है। हमें चाहिए कि हम इस सम्मान को पहचानें और अपने जीवन में न्याय, संतुलन और अच्छाई को अपनाएँ। जब भी अल्लाह का कोई हुक्म हमारी समझ में न आए, तो हमें यक़ीन रखना चाहिए कि उसमें हमारी भलाई ही छिपी है। अल्लाह हमारी छोटी-छोटी नेकियों को भी ज़ाइ नहीं करता, बल्कि उनका पूरा इनाम देता है। यह हमारे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब हमसे बेहद प्यार करने वाला और दयालु है। हमें चाहिए कि हम उसकी रहमत पर भरोसा रखें, उसके हुक्मों पर अमल करें और अपने पैग़म्बर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत को अपनाकर उस दिन के गवाह बनने के लिए तैयार रहें।

🎧 सुनें

📜 आयत 141-145 — अल-बकरा

141تِلْكَ أُمَّةٌ قَدْ خَلَتْ ۖ لَهَا مَا كَسَبَتْ وَلَكُم مَّا كَسَبْتُمْ ۖ وَلَا تُسْأَلُونَ عَمَّا كَانُوا يَعْمَلُونَ
ये वह लोग थे जो सिधार चुके जो कुछ कमा गए उनके लिए था और जो कुछ तुम कमाओगे तुम्हारे लिए होगा और जो कुछ वह कर गुज़रे उसकी पूछगछ तुमसे न होगी
142۞ سَيَقُولُ السُّفَهَاءُ مِنَ النَّاسِ مَا وَلَّاهُمْ عَن قِبْلَتِهِمُ الَّتِي كَانُوا عَلَيْهَا ۚ قُل لِّلَّهِ الْمَشْرِقُ وَالْمَغْرِبُ ۚ يَهْدِي مَن يَشَاءُ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
बाज़ अहमक़ लोग ये कह बैठेगें कि मुसलमान जिस क़िबले बैतुल मुक़द्दस की तरफ पहले से सजदा करते थे उस से दूसरे क़िबले की तरफ मुड़ जाने का बाइस हुआ। ऐ रसूल तुम उनके जवाब में कहो कि पूरब पश्चिम सब ख़ुदा का है जिसे चाहता है सीधे रास्ते की तरफ हिदायत करता है
143وَكَذَٰلِكَ جَعَلْنَاكُمْ أُمَّةً وَسَطًا لِّتَكُونُوا شُهَدَاءَ عَلَى النَّاسِ وَيَكُونَ الرَّسُولُ عَلَيْكُمْ شَهِيدًا ۗ وَمَا جَعَلْنَا الْقِبْلَةَ الَّتِي كُنتَ عَلَيْهَا إِلَّا لِنَعْلَمَ مَن يَتَّبِعُ الرَّسُولَ مِمَّن يَنقَلِبُ عَلَىٰ عَقِبَيْهِ ۚ وَإِن كَانَتْ لَكَبِيرَةً إِلَّا عَلَى الَّذِينَ هَدَى اللَّهُ ۗ وَمَا كَانَ اللَّهُ لِيُضِيعَ إِيمَانَكُمْ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِالنَّاسِ لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ
और जिस तरह तुम्हारे क़िबले के बारे में हिदायत की उसी तरह तुम को आदिल उम्मत बनाया ताकि और लोगों के मुक़ाबले में तुम गवाह बनो और रसूल मोहम्मद तुम्हारे मुक़ाबले में गवाह बनें और (ऐ रसूल) जिस क़िबले की तरफ़ तुम पहले सज़दा करते थे हम ने उसको को सिर्फ इस वजह से क़िबला क़रार दिया था कि जब क़िबला बदला जाए तो हम उन लोगों को जो रसूल की पैरवी करते हैं हम उन लोगों से अलग देख लें जो उलटे पाव फिरते हैं अगरचे ये उलट फेर सिवा उन लोगों के जिन की ख़ुदा ने हिदायत की है सब पर शाक़ ज़रुर है और ख़ुदा ऐसा नहीं है कि तुम्हारे ईमान नमाज़ को जो बैतुलमुक़द्दस की तरफ पढ़ चुके हो बरबाद कर दे बेशक ख़ुदा लोगों पर बड़ा ही रफ़ीक व मेहरबान है।
144قَدْ نَرَىٰ تَقَلُّبَ وَجْهِكَ فِي السَّمَاءِ ۖ فَلَنُوَلِّيَنَّكَ قِبْلَةً تَرْضَاهَا ۚ فَوَلِّ وَجْهَكَ شَطْرَ الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ ۚ وَحَيْثُ مَا كُنتُمْ فَوَلُّوا وُجُوهَكُمْ شَطْرَهُ ۗ وَإِنَّ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ لَيَعْلَمُونَ أَنَّهُ الْحَقُّ مِن رَّبِّهِمْ ۗ وَمَا اللَّهُ بِغَافِلٍ عَمَّا يَعْمَلُونَ
ऐ रसूल क़िबला बदलने के वास्ते बेशक तुम्हारा बार बार आसमान की तरफ मुँह करना हम देख रहे हैं तो हम ज़रुर तुम को ऐसे क़िबले की तरफ फेर देगें कि तुम निहाल हो जाओ अच्छा तो नमाज़ ही में तुम मस्ज़िदे मोहतरम काबे की तरफ मुँह कर लो और ऐ मुसलमानों तुम जहाँ कही भी हो उसी की तरफ़ अपना मुँह कर लिया करो और जिन लोगों को किताब तौरेत वगैरह दी गयी है वह बख़ूबी जानते हैं कि ये तबदील क़िबले बहुत बजा व दुरुस्त है और उस के परवरदिगार की तरफ़ से है और जो कुछ वह लोग करते हैं उस से ख़ुदा बेख़बर नही
145وَلَئِنْ أَتَيْتَ الَّذِينَ أُوتُوا الْكِتَابَ بِكُلِّ آيَةٍ مَّا تَبِعُوا قِبْلَتَكَ ۚ وَمَا أَنتَ بِتَابِعٍ قِبْلَتَهُمْ ۚ وَمَا بَعْضُهُم بِتَابِعٍ قِبْلَةَ بَعْضٍ ۚ وَلَئِنِ اتَّبَعْتَ أَهْوَاءَهُم مِّن بَعْدِ مَا جَاءَكَ مِنَ الْعِلْمِ ۙ إِنَّكَ إِذًا لَّمِنَ الظَّالِمِينَ
और अगर अहले किताब के सामने दुनिया की सारी दलीले पेश कर दोगे तो भी वह तुम्हारे क़िबले को न मानेंगें और न तुम ही उनके क़िबले को मानने वाले हो और ख़ुद अहले किताब भी एक दूसरे के क़िबले को नहीं मानते और जो इल्म क़ुरान तुम्हारे पास आ चुका है उसके बाद भी अगर तुम उनकी ख्वाहिश पर चले तो अलबत्ता तुम नाफ़रमान हो जाओगे
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
143आयत

अनुवाद — अल-बकरा 143

सूरा अल-बकरा आयत 143 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस तरह तुम्हारे क़िबले के बारे में हिदायत की…

सूरा आयत 143/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 141–145. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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