अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- उम्मतन वसतन: न्यायप्रिय, सर्वोत्तम और संतुलित उम्मत।
- शुहदा: गवाह।
- अल-क़िब्ला: वह दिशा जिसकी ओर मुँह करके नमाज़ पढ़ी जाए (यहाँ बैतुल मुक़द्दस का ज़िक्र है)।
- यनक़लिबु अला अक़िबैहि: अपनी एड़ियों के बल पलट जाना, यानी धर्म से भटककर मुर्तद हो जाना।
- कबीरह: बहुत भारी और कठिन बात।
- रऊफ़ुर रहीम: अत्यंत दयालु और मेहरबान।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐसे ही जैसे हमने आपको सीधा और सही रास्ता दिखाया, हमने आपको एक न्यायप्रिय, संतुलित और सर्वोत्तम उम्मत बनाया है। यह उम्मत न अति करने वाली है, न कमी करने वाली, बल्कि हर मामले में बीच का रास्ता अपनाने वाली है। इसीलिए अल्लाह ने आपको चुना ताकि आप क़ियामत के दिन सभी नबियों की उम्मतों पर गवाह बनें कि उनके नबियों ने अल्लाह का संदेश पूरा-पूरा पहुँचा दिया था, और खुद रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) आप पर गवाह होंगे कि उन्होंने आपको अल्लाह का पूरा संदेश पहुँचा दिया।
अल्लाह ने पहले क़िब्ला (बैतुल मुक़द्दस) को इसलिए बनाया था ताकि वह परख ले कि कौन सच्चे दिल से रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की पैरवी करता है और कौन अपने दीन से फिर जाता है। यह परीक्षा बहुत कठिन थी, लेकिन जिन्हें अल्लाह ने हिदायत दी और उनके दिलों में ईमान की मज़बूती पैदा की, उन पर यह आसान हो गई। वे समझ गए कि अल्लाह जो भी हुक्म देता है, उसमें हिकमत होती है, चाहे वह हमारी समझ में न आए।
अल्लाह तआला आपके ईमान और आपकी नमाज़ों को हरगिज़ ज़ाइ नहीं करेगा, जो आपने पहले क़िब्ला की ओर मुँह करके पढ़ी थीं। वह सब कुछ देख रहा है और उसका इनाम पूरा-पूरा देगा। बेशक अल्लाह अपने बंदों पर बहुत दयालु और मेहरबान है, वह उन पर ऐसा बोझ नहीं डालता जो उनकी ताकत से बाहर हो, और न ही उनकी नेकियों को ज़ाइ करता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह ने हमें एक संतुलित और न्यायप्रिय उम्मत बनाकर दुनिया में सबसे बड़ा सम्मान दिया है। हमें चाहिए कि हम इस सम्मान को पहचानें और अपने जीवन में न्याय, संतुलन और अच्छाई को अपनाएँ। जब भी अल्लाह का कोई हुक्म हमारी समझ में न आए, तो हमें यक़ीन रखना चाहिए कि उसमें हमारी भलाई ही छिपी है। अल्लाह हमारी छोटी-छोटी नेकियों को भी ज़ाइ नहीं करता, बल्कि उनका पूरा इनाम देता है। यह हमारे लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है कि हमारा रब हमसे बेहद प्यार करने वाला और दयालु है। हमें चाहिए कि हम उसकी रहमत पर भरोसा रखें, उसके हुक्मों पर अमल करें और अपने पैग़म्बर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की सुन्नत को अपनाकर उस दिन के गवाह बनने के लिए तैयार रहें।
📜 आयत 141-145 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 143
सूरा अल-बकरा आयत 143 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिस तरह तुम्हारे क़िबले के बारे में हिदायत की…सूरा आयत 143/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 141–145. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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