अनुवाद — Tafsir
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
शब्दों के अर्थ:
- تَقَلُّبَ وَجْهِكَ: आपके चेहरे का बार-बार (आसमान की ओर) घूमना, यानी आपकी नज़र का बार-बार ऊपर उठना।
- شَطْرَ: की ओर, की तरफ़।
- الْمَسْجِدِ الْحَرَامِ: पवित्र मस्जिद (काबा)।
- أُوتُوا الْكِتَابَ: वे लोग जिन्हें किताब (तौरात और इंजील) दी गई, यानी यहूदी और ईसाई।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ प्यारे नबी! हम देख रहे हैं कि आप बार-बार अपना चेहरा आसमान की ओर उठाते हैं, और आपका दिल किबला (बैतुल मुक़द्दस) के बदले उस किबले के इंतज़ार में बेचैन है जो अल्लाह आपको पसंद करेगा। यह आपकी आरज़ू और चाहत थी कि काबा किबला बने। तो हम ज़रूर आपको उस किबले की तरफ़ मोड़ देंगे जिसे आप पसंद करते हैं और जिससे आप राज़ी होंगे।
अब ऐ नबी! आप अपना चेहरा मस्जिदे हराम (काबा) की तरफ़ कर लें। और ऐ मुसलमानों! तुम जहाँ कहीं भी हो — पूर्व में या पश्चिम में, ज़मीन पर या समुद्र में — जब भी नमाज़ पढ़ो, अपना रुख़ काबा की तरफ़ करो। यही तुम्हारा किबला है, और यही अल्लाह की मर्ज़ी है।
यहूदी और ईसाई जिन्हें किताब दी गई, वे अच्छी तरह जानते हैं कि किबले का काबा की तरफ़ बदलना उनके अपने ग्रंथों में भी सच्चाई के साथ मौजूद है। उनके नबियों ने इस बात की ख़बर दी थी कि आख़िरी नबी दो किबलों की तरफ़ नमाज़ पढ़ेंगे। मगर फिर भी वे ज़िद और हठधर्मी पर हैं। अल्लाह उनकी साज़िशों और आपत्तियों से बेख़बर नहीं है। वह सब कुछ देख रहा है और उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला देगा।
दावत और नसीहत:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह अपने नबी की हर आरज़ू को पूरा करता है। जब नबी ने दिल से काबा को किबला बनाने की चाहत की, तो अल्लाह ने तुरंत हुक्म दे दिया। यह हमारे लिए बहुत बड़ी नेमत है कि हमारा किबला वह पवित्र घर है जिसे अल्लाह ने ख़ुद चुना। हर मुसलमान दिन में पाँच बार उसी घर की तरफ़ रुख़ करता है, चाहे वह दुनिया के किसी भी कोने में हो। यह हमारी एकता की निशानी है — सब एक ही दिशा में खड़े होते हैं, एक ही ख़ुदा की इबादत करते हैं।
अल्लाह हमें किबला की तरफ़ रुख़ करने का हुक्म देता है, लेकिन असली मक़सद यह है कि हमारा दिल भी अल्लाह की तरफ़ मुड़े। जिस तरह हमारा चेहरा काबा की तरफ़ होता है, उसी तरह हमारा दिल अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा की तरफ़ होना चाहिए। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि अल्लाह अपने बंदों की हर छोटी-बड़ी बात जानता है, और वह कभी इंसाफ़ में चूक नहीं करता। आइए, हम अपने दिलों को काबा की तरफ़ करने के साथ-साथ अल्लाह की रज़ा की तरफ़ भी करें, और अपनी ज़िंदगी को उसकी पसंद के मुताबिक़ बनाएँ।
📜 आयत 142-146 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 144
सूरा अल-बकरा आयत 144 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ रसूल क़िबला बदलने के वास्ते बेशक तुम्हारा बार बार…सूरा आयत 144/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 142–146. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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