Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْمَلَإِ (अल-मलअ): किसी क़ौम के बड़े लोग, रईस और सरदार।
- ابْعَثْ (इब'अस): नियुक्त करो, भेजो।
- هَلْ عَسَيْتُمْ (हल 'असैतुम): क्या उम्मीद है कि तुम...? यानी मुझे डर है कि कहीं तुम ऐसा न करो।
- كُتِبَ (कुतिबा): फ़र्ज़ किया गया, अनिवार्य किया गया।
- تَوَلَّوْا (तवल्लौ): मुँह मोड़ लिया, पीछे हट गए।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! क्या तुमने उन बनी इसराइल के सरदारों और रईसों के हाल पर ग़ौर नहीं किया जो हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) के ज़माने के बाद आए? उन्होंने अपने नबी से कहा: "हमारे लिए एक बादशाह नियुक्त कर दीजिए ताकि हम उसकी क़यादत में अल्लाह की राह में जिहाद कर सकें।"
उनके नबी ने उनसे कहा: "क्या तुम्हें यक़ीन है कि अगर अल्लाह तुम पर जिहाद फ़र्ज़ कर दे तो तुम सचमुच लड़ोगे? मुझे तो डर है कि कहीं तुम लड़ने से भाग न खड़े हो!"
यह सुनकर उन्होंने हैरानी से कहा: "हम पर कौन सी मजबूरी है कि हम अल्लाह की राह में न लड़ें? हमें तो अपने घरों से निकाल दिया गया और हमारे बच्चों को हमसे जुदा कर दिया गया (क़त्ल और ग़ुलामी के ज़रिये)। हमारे पास जिहाद से बचने की कोई वजह ही नहीं बची!"
लेकिन जब अल्लाह ने उन पर जिहाद फ़र्ज़ कर दिया और उनके लिए बादशाह (तालूत) नियुक्त कर दिया, तो उनमें से अधिकतर ने जिहाद से मुँह मोड़ लिया और वादे से पलट गए। सिर्फ़ बहुत थोड़े लोग साबित क़दम रहे और अल्लाह की राह में लड़े। अल्लाह उन ज़ालिमों को खूब जानता है जो अपने वादे तोड़ते हैं और अल्लाह के हुक्म से मुँह मोड़ते हैं — वह उन्हें उनके कर्मों का पूरा बदला देगा।
दावती पहलू (नसीहत):
यह क़िस्सा हमारे लिए एक बड़ा सबक़ है। इंसान जब आराम और सुख-चैन में होता है तो बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन जब असली इम्तिहान आता है तो उसकी हक़ीक़त सामने आ जाती है। अल्लाह हमें सच्चे मुसलमान बनाए — जो ज़बान से जो कहें, दिल और अमल से भी वही करें। जिहाद सिर्फ़ जंग नहीं है; अपने नफ़्स से लड़ना, अपनी कमज़ोरियों पर क़ाबू पाना, और अल्लाह के हुक्मों पर अमल करना भी एक बड़ा जिहाद है। अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो वादा करके निभाते हैं और मुश्किल वक़्त में भी साबित क़दम रहते हैं। हमें चाहिए कि अल्लाह से दुआ करें कि हमें सच्चा इमान और अमल की तौफ़ीक़ दे, और हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसकी राह में डटे रहते हैं। आमीन।
📜 आयत 244-248 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 246
सूरा अल-बकरा आयत 246 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) क्या तुमने मूसा के बाद बनी इसराइल के…सूरा आयत 246/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 244–248. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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