अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- सराब (سراب): मैदान में दिखने वाला वह चमकता हुआ दृश्य जो दूर से पानी जैसा प्रतीत होता है, लेकिन वास्तव में पानी नहीं होता। यह गर्मी के दिनों में ज़मीन की सतह पर प्रकाश के अपवर्तन से बनता है।
- क़ी'अह (قیعہ): समतल और खुली ज़मीन, जहाँ सराब दिखाई देती है।
- ज़मआन (ظمآن): अत्यधिक प्यासा व्यक्ति।
- वफ़्फ़ाहु हिसाबहु (وفّاه حسابه): उसे उसका पूरा-पूरा हिसाब चुका दिया, यानी उसके कर्मों का पूरा बदला दे दिया।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की मिसाल बयान कर रहे हैं जिन्होंने उसका इनकार किया और उसके रसूलों को झुठलाया। उनके वे सारे अच्छे काम—जैसे रिश्तेदारों से सिला-रहमी, क़ैदियों को आज़ाद करना, दान-पुण्य और दूसरी नेकियाँ—जिन्हें वे अपने लिए फ़ायदेमंद समझते थे, उनकी हक़ीक़त ऐसी है जैसे किसी चौरस मैदान में दिखने वाला सराब। यानी वह चमकता हुआ दृश्य जो दूर से पानी जैसा लगता है। एक बहुत प्यासा इंसान उसे देखकर समझता है कि यह पानी है, और उम्मीद से भरकर उसकी तरफ़ दौड़ता है। लेकिन जब वहाँ पहुँचता है, तो उसे कुछ भी नहीं मिलता—न पानी, न कोई और चीज़। बस उसकी प्यास और बढ़ जाती है और निराशा उसे तोड़ देती है।
बिल्कुल यही हाल उस काफ़िर का है जो दुनिया में अच्छे काम करता है और समझता है कि ये काम उसे आख़िरत में नजात दिलाएँगे। लेकिन जब क़ियामत का दिन आएगा और वह अपने रब के सामने खड़ा होगा, तो उसे अपने उन कर्मों का कोई सवाब नहीं मिलेगा। वहाँ उसे सिर्फ़ अल्लाह का इंसाफ़ मिलेगा—उसके किए का पूरा-पूरा बदला। अल्लाह ने उसके हर अमल का हिसाब रखा था, और वह उसे पूरा चुका देगा। अल्लाह तआला बहुत जल्दी हिसाब लेने वाला है; उसके लिए किसी की गिनती में देर नहीं, न ही कोई उसके हिसाब से बच सकता है।
दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):
यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। यह हमें बताती है कि सिर्फ़ दिखावे के काम या दुनिया की नेकियाँ तब तक काम नहीं आएँगी जब तक उनके साथ ईमान न हो। ईमान ही वह चाबी है जो हमारे अच्छे कामों को अल्लाह के यहाँ क़बूलियत दिलाती है। जिस तरह प्यासा इंसान सराब को देखकर धोखा खा जाता है, उसी तरह वह इंसान भी धोखे में है जो अल्लाह से दूर रहकर सिर्फ़ दुनियावी नेकियों पर भरोसा करता है। अल्लाह तआला हमें इस धोखे से बचाना चाहता है और हमें सच्चे रास्ते की तरफ़ बुलाता है—वह रास्ता जो ईमान, इख़लास और अल्लाह की रज़ा की तलब पर चलता है। याद रखिए, अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत उन्हीं के लिए है जो उस पर ईमान लाएँ और अपने अमल को सिर्फ़ उसी की ख़ुशी के लिए करें। आइए, हम अपने दिल को ईमान की रोशनी से रोशन करें और अपने हर अमल को अल्लाह की रज़ा के लिए ख़ालिस करें, ताकि क़ियामत के दिन हमारा हाथ ख़ाली न रहे और हम उस इंसाफ़ के सामने शर्मिंदा न हों।
📜 आयत 37-41 — अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 39
सूरा अन-नूर आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया उनकी कारस्तानियाँ (ऐसी…सूरा आयत 39/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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