अन-नूर · 39/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
وَالَّذِينَ كَفَرُوا أَعْمَالُهُمْ كَسَرَابٍ بِقِيعَةٍ يَحْسَبُهُ الظَّمْآنُ مَاءً حَتَّىٰ إِذَا جَاءَهُ لَمْ يَجِدْهُ شَيْئًا وَوَجَدَ اللَّهَ عِندَهُ فَوَفَّاهُ حِسَابَهُ ۗ وَاللَّهُ سَرِيعُ الْحِسَابِ ۝٣٩
Wallazeena kafarooo a`maaluhum kasaraabim biqee`atiny yahsabuhuz zamaanu maaa`an hattaaa izaa jaaa`ahoo lam yajid hu shai`anw wa wajadal laaha `indahoo fa waffaahu hisaabah; wallaahu saree`ul hisaab
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया उनकी कारस्तानियाँ (ऐसी है) जैसे एक चटियल मैदान का चमकता हुआ बालू कि प्यासा उस को दूर से देखे तो पानी ख्याल करता है यहाँ तक कि जब उसके पास आया तो उसको कुछ भी न पाया (और प्यास से तड़प कर मर गया) और ख़ुदा को अपने पास मौजूद पाया तो उसने उसका हिसाब (किताब) पूरा पूरा चुका दिया और ख़ुदा तो बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • सराब (سراب): मैदान में दिखने वाला वह चमकता हुआ दृश्य जो दूर से पानी जैसा प्रतीत होता है, लेकिन वास्तव में पानी नहीं होता। यह गर्मी के दिनों में ज़मीन की सतह पर प्रकाश के अपवर्तन से बनता है।
  • क़ी'अह (قیعہ): समतल और खुली ज़मीन, जहाँ सराब दिखाई देती है।
  • ज़मआन (ظمآن): अत्यधिक प्यासा व्यक्ति।
  • वफ़्फ़ाहु हिसाबहु (وفّاه حسابه): उसे उसका पूरा-पूरा हिसाब चुका दिया, यानी उसके कर्मों का पूरा बदला दे दिया।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में उन लोगों की मिसाल बयान कर रहे हैं जिन्होंने उसका इनकार किया और उसके रसूलों को झुठलाया। उनके वे सारे अच्छे काम—जैसे रिश्तेदारों से सिला-रहमी, क़ैदियों को आज़ाद करना, दान-पुण्य और दूसरी नेकियाँ—जिन्हें वे अपने लिए फ़ायदेमंद समझते थे, उनकी हक़ीक़त ऐसी है जैसे किसी चौरस मैदान में दिखने वाला सराब। यानी वह चमकता हुआ दृश्य जो दूर से पानी जैसा लगता है। एक बहुत प्यासा इंसान उसे देखकर समझता है कि यह पानी है, और उम्मीद से भरकर उसकी तरफ़ दौड़ता है। लेकिन जब वहाँ पहुँचता है, तो उसे कुछ भी नहीं मिलता—न पानी, न कोई और चीज़। बस उसकी प्यास और बढ़ जाती है और निराशा उसे तोड़ देती है।

बिल्कुल यही हाल उस काफ़िर का है जो दुनिया में अच्छे काम करता है और समझता है कि ये काम उसे आख़िरत में नजात दिलाएँगे। लेकिन जब क़ियामत का दिन आएगा और वह अपने रब के सामने खड़ा होगा, तो उसे अपने उन कर्मों का कोई सवाब नहीं मिलेगा। वहाँ उसे सिर्फ़ अल्लाह का इंसाफ़ मिलेगा—उसके किए का पूरा-पूरा बदला। अल्लाह ने उसके हर अमल का हिसाब रखा था, और वह उसे पूरा चुका देगा। अल्लाह तआला बहुत जल्दी हिसाब लेने वाला है; उसके लिए किसी की गिनती में देर नहीं, न ही कोई उसके हिसाब से बच सकता है।


दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। यह हमें बताती है कि सिर्फ़ दिखावे के काम या दुनिया की नेकियाँ तब तक काम नहीं आएँगी जब तक उनके साथ ईमान न हो। ईमान ही वह चाबी है जो हमारे अच्छे कामों को अल्लाह के यहाँ क़बूलियत दिलाती है। जिस तरह प्यासा इंसान सराब को देखकर धोखा खा जाता है, उसी तरह वह इंसान भी धोखे में है जो अल्लाह से दूर रहकर सिर्फ़ दुनियावी नेकियों पर भरोसा करता है। अल्लाह तआला हमें इस धोखे से बचाना चाहता है और हमें सच्चे रास्ते की तरफ़ बुलाता है—वह रास्ता जो ईमान, इख़लास और अल्लाह की रज़ा की तलब पर चलता है। याद रखिए, अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत उन्हीं के लिए है जो उस पर ईमान लाएँ और अपने अमल को सिर्फ़ उसी की ख़ुशी के लिए करें। आइए, हम अपने दिल को ईमान की रोशनी से रोशन करें और अपने हर अमल को अल्लाह की रज़ा के लिए ख़ालिस करें, ताकि क़ियामत के दिन हमारा हाथ ख़ाली न रहे और हम उस इंसाफ़ के सामने शर्मिंदा न हों।



📜 आयत 37-41 — अन-नूर

37رِجَالٌ لَّا تُلْهِيهِمْ تِجَارَةٌ وَلَا بَيْعٌ عَن ذِكْرِ اللَّهِ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ ۙ يَخَافُونَ يَوْمًا تَتَقَلَّبُ فِيهِ الْقُلُوبُ وَالْأَبْصَارُ
ऐसे लोग जिनको ख़ुदा के ज़िक्र और नमाज़ पढ़ने और ज़कात अदा करने से न तो तिजारत ही ग़ाफिल कर सकती है न (ख़रीद फरोख्त) (का मामला क्योंकि) वह लोग उस दिन से डरते हैं जिसमें ख़ौफ के मारे दिल और ऑंखें उलट जाएँगी
38لِيَجْزِيَهُمُ اللَّهُ أَحْسَنَ مَا عَمِلُوا وَيَزِيدَهُم مِّن فَضْلِهِ ۗ وَاللَّهُ يَرْزُقُ مَن يَشَاءُ بِغَيْرِ حِسَابٍ
(उसकी इबादत इसलिए करते हैं) ताकि ख़ुदा उन्हें उनके आमाल का बेहतर से बेहतर बदला अता फरमाए और अपने फज़ल व करम से कुछ और ज्यादा भी दे और ख़ुदा तो जिसे चाहता है बेहिसाब रोज़ी देता है
39وَالَّذِينَ كَفَرُوا أَعْمَالُهُمْ كَسَرَابٍ بِقِيعَةٍ يَحْسَبُهُ الظَّمْآنُ مَاءً حَتَّىٰ إِذَا جَاءَهُ لَمْ يَجِدْهُ شَيْئًا وَوَجَدَ اللَّهَ عِندَهُ فَوَفَّاهُ حِسَابَهُ ۗ وَاللَّهُ سَرِيعُ الْحِسَابِ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया उनकी कारस्तानियाँ (ऐसी है) जैसे एक चटियल मैदान का चमकता हुआ बालू कि प्यासा उस को दूर से देखे तो पानी ख्याल करता है यहाँ तक कि जब उसके पास आया तो उसको कुछ भी न पाया (और प्यास से तड़प कर मर गया) और ख़ुदा को अपने पास मौजूद पाया तो उसने उसका हिसाब (किताब) पूरा पूरा चुका दिया और ख़ुदा तो बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
40أَوْ كَظُلُمَاتٍ فِي بَحْرٍ لُّجِّيٍّ يَغْشَاهُ مَوْجٌ مِّن فَوْقِهِ مَوْجٌ مِّن فَوْقِهِ سَحَابٌ ۚ ظُلُمَاتٌ بَعْضُهَا فَوْقَ بَعْضٍ إِذَا أَخْرَجَ يَدَهُ لَمْ يَكَدْ يَرَاهَا ۗ وَمَن لَّمْ يَجْعَلِ اللَّهُ لَهُ نُورًا فَمَا لَهُ مِن نُّورٍ
(या काफिरों के आमाल की मिसाल) उस बड़े गहरे दरिया की तारिकियों की सी है- जैसे एक लहर उसके ऊपर दूसरी लहर उसके ऊपर अब्र (तह ब तह) ढॉके हुए हो (ग़रज़) तारिकियाँ है कि एक से ऊपर एक (उमड़ी) चली आती हैं (इसी तरह से) कि अगर कोइ शख्स अपना हाथ निकाले तो (शिद्दत तारीकी से) उसे देख न सके और जिसे खुद ख़ुदा ही ने (हिदायत की) रौशनी न दी हो तो (समझ लो कि) उसके लिए कहीं कोई रौशनी नहीं है
41أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يُسَبِّحُ لَهُ مَن فِي السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضِ وَالطَّيْرُ صَافَّاتٍ ۖ كُلٌّ قَدْ عَلِمَ صَلَاتَهُ وَتَسْبِيحَهُ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ بِمَا يَفْعَلُونَ
(ऐ शख्स) क्या तूने इतना भी नहीं देखा कि जितनी मख़लूक़ात सारे आसमान और ज़मीन में हैं और परिन्दें पर फैलाए (ग़रज़ सब) उसी को तस्बीह किया करते हैं सब के सब अपनी नमाज़ और अपनी तस्बीह का तरीक़ा खूब जानते हैं और जो कुछ ये किया करते हैं ख़ुदा उससे खूब वाक़िफ है
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अनुवाद — अन-नूर 39

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Tuesday, August 18, 2026

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