अन-नूर · 38/64
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नूर
لِيَجْزِيَهُمُ اللَّهُ أَحْسَنَ مَا عَمِلُوا وَيَزِيدَهُم مِّن فَضْلِهِ ۗ وَاللَّهُ يَرْزُقُ مَن يَشَاءُ بِغَيْرِ حِسَابٍ ۝٣٨
Liyajziyahumul laahu ahsana maa `amiloo wa yazeedahum min fadlih; wal laahu yarzuqu mai yashaaa`u bighairi hisaab
📖 हिंदी अर्थ
(उसकी इबादत इसलिए करते हैं) ताकि ख़ुदा उन्हें उनके आमाल का बेहतर से बेहतर बदला अता फरमाए और अपने फज़ल व करम से कुछ और ज्यादा भी दे और ख़ुदा तो जिसे चाहता है बेहिसाब रोज़ी देता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لِيَجْزِيَهُمُ: ताकि वह उन्हें बदला दे
  • أَحْسَنَ مَا عَمِلُوا: उनके सबसे अच्छे कर्मों के अनुसार (सबसे उत्तम बदला)
  • يَزِيدَهُم مِّن فَضْلِهِ: वह उन्हें अपने अनुग्रह से अतिरिक्त (बढ़ाकर) दे
  • بِغَيْرِ حِسَابٍ: बिना किसी हिसाब-किताब के, बिना किसी सीमा के

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन ईमानवालों के बारे में है जो अल्लाह की इबादत में रात-दिन लगे रहते हैं, उसकी याद में तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करते हैं और उसके भय से काँपते रहते हैं। अल्लाह तआला उनके इस परिश्रम और ईमान का ऐसा बदला देगा जो उनके सबसे अच्छे कर्मों से भी बेहतर होगा। यानी अल्लाह उनकी छोटी-छोटी नेकियों को भी बड़ा करके, उन्हें सबसे उत्तम प्रतिफल प्रदान करेगा।

फिर अल्लाह अपनी ओर से उन्हें अतिरिक्त अनुग्रह (फज़ल) भी प्रदान करेगा — यानी जो उन्होंने कमाया नहीं होगा, जो उनके कर्मों की क्षमता से कहीं बढ़कर होगा, वह भी उन्हें देगा। यह अल्लाह की असीम दया और उदारता है कि वह अपने बंदों को उनकी मेहनत से कहीं अधिक देता है।

अंत में अल्लाह फरमाता है कि वह जिसे चाहता है बिना हिसाब के रिज़्क़ (आजीविका और प्रतिफल) देता है। यानी अल्लाह की देन किसी गणना या माप से बंधी नहीं है — वह जिसे चाहे असीमित रूप से दे सकता है। यहाँ "रिज़्क़" से तात्पर्य सिर्फ़ दुनिया की रोज़ी ही नहीं, बल्कि आख़िरत का अज्र (पुरस्कार) भी है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह की असीम रहमत और उदारता की ओर संकेत करती है। अल्लाह ने अपने बंदों के लिए ऐसा इनाम तैयार किया है जिसकी कोई सीमा नहीं। जब हम जानते हैं कि हमारी छोटी-सी नेकी को अल्लाह कितना बड़ा बना सकता है, तो हमें निराश नहीं होना चाहिए। अल्लाह की रहमत से कभी निराश न हों — चाहे हमारे अमल कितने ही कम हों, अल्लाह की फज़ल (कृपा) उन्हें कई गुना बढ़ाकर देने की शक्ति रखती है। यही अल्लाह का वादा है — वह अपने नेक बंदों को बिना हिसाब के देता है। तो आइए, हम अपने जीवन को अल्लाह की इबादत और उसकी याद में बिताएँ, और उसकी असीम रहमत से आशा रखें।



📜 आयत 36-40 — सूरा अन-नूर

36فِي بُيُوتٍ أَذِنَ اللَّهُ أَن تُرْفَعَ وَيُذْكَرَ فِيهَا اسْمُهُ يُسَبِّحُ لَهُ فِيهَا بِالْغُدُوِّ وَالْآصَالِ
(वह क़न्दील) उन घरों में रौशन है जिनकी निस्बत ख़ुदा ने हुक्म दिया कि उनकी ताज़ीम की जाए और उनमें उसका नाम लिया जाए जिनमें सुबह व शाम वह लोग उसकी तस्बीह किया करते हैं
37رِجَالٌ لَّا تُلْهِيهِمْ تِجَارَةٌ وَلَا بَيْعٌ عَن ذِكْرِ اللَّهِ وَإِقَامِ الصَّلَاةِ وَإِيتَاءِ الزَّكَاةِ ۙ يَخَافُونَ يَوْمًا تَتَقَلَّبُ فِيهِ الْقُلُوبُ وَالْأَبْصَارُ
ऐसे लोग जिनको ख़ुदा के ज़िक्र और नमाज़ पढ़ने और ज़कात अदा करने से न तो तिजारत ही ग़ाफिल कर सकती है न (ख़रीद फरोख्त) (का मामला क्योंकि) वह लोग उस दिन से डरते हैं जिसमें ख़ौफ के मारे दिल और ऑंखें उलट जाएँगी
38لِيَجْزِيَهُمُ اللَّهُ أَحْسَنَ مَا عَمِلُوا وَيَزِيدَهُم مِّن فَضْلِهِ ۗ وَاللَّهُ يَرْزُقُ مَن يَشَاءُ بِغَيْرِ حِسَابٍ
(उसकी इबादत इसलिए करते हैं) ताकि ख़ुदा उन्हें उनके आमाल का बेहतर से बेहतर बदला अता फरमाए और अपने फज़ल व करम से कुछ और ज्यादा भी दे और ख़ुदा तो जिसे चाहता है बेहिसाब रोज़ी देता है
39وَالَّذِينَ كَفَرُوا أَعْمَالُهُمْ كَسَرَابٍ بِقِيعَةٍ يَحْسَبُهُ الظَّمْآنُ مَاءً حَتَّىٰ إِذَا جَاءَهُ لَمْ يَجِدْهُ شَيْئًا وَوَجَدَ اللَّهَ عِندَهُ فَوَفَّاهُ حِسَابَهُ ۗ وَاللَّهُ سَرِيعُ الْحِسَابِ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया उनकी कारस्तानियाँ (ऐसी है) जैसे एक चटियल मैदान का चमकता हुआ बालू कि प्यासा उस को दूर से देखे तो पानी ख्याल करता है यहाँ तक कि जब उसके पास आया तो उसको कुछ भी न पाया (और प्यास से तड़प कर मर गया) और ख़ुदा को अपने पास मौजूद पाया तो उसने उसका हिसाब (किताब) पूरा पूरा चुका दिया और ख़ुदा तो बहुत जल्द हिसाब लेने वाला है
40أَوْ كَظُلُمَاتٍ فِي بَحْرٍ لُّجِّيٍّ يَغْشَاهُ مَوْجٌ مِّن فَوْقِهِ مَوْجٌ مِّن فَوْقِهِ سَحَابٌ ۚ ظُلُمَاتٌ بَعْضُهَا فَوْقَ بَعْضٍ إِذَا أَخْرَجَ يَدَهُ لَمْ يَكَدْ يَرَاهَا ۗ وَمَن لَّمْ يَجْعَلِ اللَّهُ لَهُ نُورًا فَمَا لَهُ مِن نُّورٍ
(या काफिरों के आमाल की मिसाल) उस बड़े गहरे दरिया की तारिकियों की सी है- जैसे एक लहर उसके ऊपर दूसरी लहर उसके ऊपर अब्र (तह ब तह) ढॉके हुए हो (ग़रज़) तारिकियाँ है कि एक से ऊपर एक (उमड़ी) चली आती हैं (इसी तरह से) कि अगर कोइ शख्स अपना हाथ निकाले तो (शिद्दत तारीकी से) उसे देख न सके और जिसे खुद ख़ुदा ही ने (हिदायत की) रौशनी न दी हो तो (समझ लो कि) उसके लिए कहीं कोई रौशनी नहीं है
अन-नूरकुरान सूची
64आयत
मदनीअवतरण स्थान
38आयत

अनुवाद — अन-नूर 38

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Friday, October 2, 2026

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