Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِيَجْزِيَهُمُ: ताकि वह उन्हें बदला दे
- أَحْسَنَ مَا عَمِلُوا: उनके सबसे अच्छे कर्मों के अनुसार (सबसे उत्तम बदला)
- يَزِيدَهُم مِّن فَضْلِهِ: वह उन्हें अपने अनुग्रह से अतिरिक्त (बढ़ाकर) दे
- بِغَيْرِ حِسَابٍ: बिना किसी हिसाब-किताब के, बिना किसी सीमा के
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन ईमानवालों के बारे में है जो अल्लाह की इबादत में रात-दिन लगे रहते हैं, उसकी याद में तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करते हैं और उसके भय से काँपते रहते हैं। अल्लाह तआला उनके इस परिश्रम और ईमान का ऐसा बदला देगा जो उनके सबसे अच्छे कर्मों से भी बेहतर होगा। यानी अल्लाह उनकी छोटी-छोटी नेकियों को भी बड़ा करके, उन्हें सबसे उत्तम प्रतिफल प्रदान करेगा।
फिर अल्लाह अपनी ओर से उन्हें अतिरिक्त अनुग्रह (फज़ल) भी प्रदान करेगा — यानी जो उन्होंने कमाया नहीं होगा, जो उनके कर्मों की क्षमता से कहीं बढ़कर होगा, वह भी उन्हें देगा। यह अल्लाह की असीम दया और उदारता है कि वह अपने बंदों को उनकी मेहनत से कहीं अधिक देता है।
अंत में अल्लाह फरमाता है कि वह जिसे चाहता है बिना हिसाब के रिज़्क़ (आजीविका और प्रतिफल) देता है। यानी अल्लाह की देन किसी गणना या माप से बंधी नहीं है — वह जिसे चाहे असीमित रूप से दे सकता है। यहाँ "रिज़्क़" से तात्पर्य सिर्फ़ दुनिया की रोज़ी ही नहीं, बल्कि आख़िरत का अज्र (पुरस्कार) भी है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें अल्लाह की असीम रहमत और उदारता की ओर संकेत करती है। अल्लाह ने अपने बंदों के लिए ऐसा इनाम तैयार किया है जिसकी कोई सीमा नहीं। जब हम जानते हैं कि हमारी छोटी-सी नेकी को अल्लाह कितना बड़ा बना सकता है, तो हमें निराश नहीं होना चाहिए। अल्लाह की रहमत से कभी निराश न हों — चाहे हमारे अमल कितने ही कम हों, अल्लाह की फज़ल (कृपा) उन्हें कई गुना बढ़ाकर देने की शक्ति रखती है। यही अल्लाह का वादा है — वह अपने नेक बंदों को बिना हिसाब के देता है। तो आइए, हम अपने जीवन को अल्लाह की इबादत और उसकी याद में बिताएँ, और उसकी असीम रहमत से आशा रखें।
📜 आयत 36-40 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 38
सूरा अन-नूर आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उसकी इबादत इसलिए करते हैं) ताकि ख़ुदा उन्हें उनके आमाल…सूरा आयत 38/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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