अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- बुलूग़े हुलुम (बालिग़ होना): यानी बच्चों का उस उम्र को पहुँचना जब उन पर शरई अहकाम (धार्मिक आदेश) लागू होते हैं, जैसे नमाज़, रोज़ा, हिजाब वगैरह।
- फ़ल-यस्ताज़िनू (उन्हें इजाज़त लेनी चाहिए): यानी किसी के घर में दाखिल होने से पहले अनुमति माँगना।
- अल्लाह अलीमुन हकीम: अल्लाह सब कुछ जानने वाला और अपने फैसलों में पूर्ण ज्ञान और हिकमत (समझदारी) वाला है।
तफसीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला बच्चों के बालिग़ होने के बाद के हुक्म को बयान कर रहा है। जब बच्चे उस उम्र को पहुँच जाएँ जहाँ उन पर शरई अहकाम लागू होते हैं (यानी बालिग़ हो जाएँ), तो उनके लिए भी वही हुक्म है जो बड़ों के लिए है — यानी उन्हें हर वक़्त, हर मौके पर, घर में दाखिल होने से पहले इजाज़त लेनी होगी। यह वही आदेश है जो पहले बड़ों (आज़ाद, बालिग़ लोगों) के लिए बताया गया था। यानी अब वे बच्चे नहीं रहे जिनके लिए पहले तीन वक़्त (सुबह, दोपहर और रात) की इजाज़त का नियम था, बल्कि अब उन्हें हर वक़्त इजाज़त लेनी होगी।
अल्लाह तआला यहाँ यह सिखा रहा है कि इस्लाम में घर की प्राइवेसी (निजता) का कितना ख्याल रखा गया है। यह सिर्फ़ एक सामाजिक आदेश नहीं, बल्कि एक तहज़ीब (संस्कृति) और अदब (शिष्टाचार) है जो मुसलमानों को सिखाया गया है। इसके बाद अल्लाह फरमाता है कि जिस तरह उसने ये आदेश साफ़-साफ़ बयान किए हैं, उसी तरह वह अपनी सारी आयतों को स्पष्ट करता है, ताकि लोग समझें और उन पर अमल करें। अल्लाह अपने बंदों की भलाई को खूब जानता है और जो कुछ भी वह हुक्म देता है, उसमें गहरी हिकमत (समझदारी) होती है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि ज़िंदगी के हर पहलू में अदब और तहज़ीब का दीन है। अल्लाह तआला ने हमें इजाज़त लेने का तरीका सिखाकर यह बताया कि दूसरों की निजता और इज़्ज़त का ख्याल रखना कितना बड़ा गुण है। यही वजह है कि इस्लाम में घर की प्राइवेसी को इतनी अहमियत दी गई। यह आदेश हमें एक मुकम्मल और पाकीज़ा समाज बनाने में मदद करता है, जहाँ हर इंसान सुरक्षित और सम्मानित महसूस करे। हमें चाहिए कि हम इन आदेशों पर अमल करें और अपने बच्चों को भी यह अदब सिखाएँ, ताकि हमारा समाज अल्लाह की पसंदीदा तहज़ीब पर चले। याद रखें, अल्लाह का हर हुक्म हमारी भलाई के लिए है, और वह जो कुछ भी फरमाता है, उसमें कोई कमी नहीं होती।
📜 आयत 57-61 — अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 59
सूरा अन-नूर आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ ईमानदारों) जब तुम्हारे लड़के हदे बुलूग को पहुँचें…सूरा आयत 59/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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