अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْقَوَاعِدُ (अल-क़वा'इद): वे औरतें जो बुढ़ापे की वजह से हृदय और गर्भाशय के कार्यों से रुक चुकी हैं।
- لَا يَرْجُونَ نِكَاحًا (ला यरजूना निकाहन): जिन्हें विवाह की कोई उम्मीद या इच्छा नहीं रहती।
- ثِيَابَهُنَّ (सियाबहुन्ना): ऊपरी कपड़े जैसे चादर, दुपट्टा या घूंघट जो सामान्य पोशाक के ऊपर पहना जाता है।
- غَيْرَ مُتَبَرِّجَاتٍ بِزِينَةٍ (गैर मुतबर्रिजातिन बिज़ीनतिन): अपनी छिपी हुई सजावट या शारीरिक सुंदरता को प्रकट न करती हुईं।
- يَسْتَعْفِفْنَ (यस्त'फ़िफ़्न): पवित्रता और संयम बनाए रखें, यानी कपड़े न उतारें।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन बुज़ुर्ग औरतों के बारे में है जो उम्र के उस पड़ाव पर पहुँच चुकी हैं जहाँ उन्हें न तो विवाह की चाह रहती है और न ही पुरुषों की ओर से उनके प्रति कोई आकर्षण होता है। ऐसी औरतों के लिए राहत दी गई है कि वे अपने ऊपरी कपड़े (जैसे चादर या बड़ा दुपट्टा) उतार सकती हैं, बशर्ते वे अपनी सजावट या छिपी हुई सुंदरता को प्रकट न करें। यह छूट केवल उन्हीं औरतों के लिए है, और उन्हें भी यह ध्यान रखना है कि वे अपनी आंतरिक पोशाक (जैसे क़मीज़ या सिर का कपड़ा) न उतारें।
हालाँकि, अल्लाह तआला इसी आयत में यह भी फ़रमाता है कि अगर ये औरतें अपने ऊपरी कपड़े भी न उतारें और पूरी सतर्कता व संयम बनाए रखें, तो यह उनके लिए बेहतर और अधिक पवित्रता वाला काम है। इसका कारण यह है कि इससे उनकी इज़्ज़त और भी बढ़ती है, और किसी भी तरह की गलतफ़हमी या बुरी नज़र से बचाव होता है।
अल्लाह तआला सब कुछ सुनता और जानता है। वह जानता है कि औरतें किस नियत से कपड़े उतारती हैं या पहनती हैं, और वह उनके दिलों के इरादों से भी पूरी तरह वाक़िफ़ है। यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम में हर उम्र और हर हालत के लिए आसानी और राहत दी गई है, लेकिन साथ ही पवित्रता और शालीनता को हमेशा प्राथमिकता दी गई है।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत इस्लाम की उस खूबसूरत तालीम को दिखाती है जो हर उम्र और हर हालत का ख़याल रखती है। अल्लाह तआला ने बुज़ुर्ग औरतों पर बोझ नहीं डाला, बल्कि उन्हें राहत दी, लेकिन साथ ही उन्हें सबसे अच्छा रास्ता भी बताया — वह है संयम और पवित्रता। यह हमें सिखाता है कि इस्लाम में जहाँ आसानी है, वहीं बेहतरी की तरफ़ भी रहनुमाई की गई है। अल्लाह हमारी हर नीयत और हर अमल से वाक़िफ़ है, और वह हमें उसी के अनुसार अज्र देगा। हमें चाहिए कि हम अल्लाह की बताई हुई हदों का पालन करें, क्योंकि इसमें ही हमारी दुनिया और आख़िरत की भलाई है।
📜 आयत 58-62 — अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 60
सूरा अन-नूर आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बूढ़ी बूढ़ी औरतें जो (बुढ़ापे की वजह से) निकाह…सूरा आयत 60/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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