अन-नूर · 58/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لِيَسْتَأْذِنكُمُ الَّذِينَ مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ وَالَّذِينَ لَمْ يَبْلُغُوا الْحُلُمَ مِنكُمْ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ ۚ مِّن قَبْلِ صَلَاةِ الْفَجْرِ وَحِينَ تَضَعُونَ ثِيَابَكُم مِّنَ الظَّهِيرَةِ وَمِن بَعْدِ صَلَاةِ الْعِشَاءِ ۚ ثَلَاثُ عَوْرَاتٍ لَّكُمْ ۚ لَيْسَ عَلَيْكُمْ وَلَا عَلَيْهِمْ جُنَاحٌ بَعْدَهُنَّ ۚ طَوَّافُونَ عَلَيْكُم بَعْضُكُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ ۚ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآيَاتِ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ ۝٥٨
Yaaa aiyuhal lazeena aamanoo li yastaazinkumul lazeena malakat aimaanukum wallazeena lam yablughul huluma minkum salaasa marraat; min qabli Salaatil Fajri wa heena tada`oona siyaa bakum minaz zaheerati wa mim ba`di Salaatil Ishaaa`; salaasu `awraatil lakum; laisa `alaikum wa laa `alaihim junaahum ba`dahunn; tawwaafoona `alaikum ba`dukum `alaa ba`d; kazaalika yubaiyinul laahu lakumul aayaat wallaahu `Aleemun Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों तुम्हारी लौन्डी ग़ुलाम और वह लड़के जो अभी तक बुलूग़ की हद तक नहीं पहुँचे हैं उनको भी चाहिए कि (दिन रात में) तीन मरतबा (तुम्हारे पास आने की) तुमसे इजाज़त ले लिया करें तब आएँ (एक) नमाज़ सुबह से पहले और (दूसरे) जब तुम (गर्मी से) दोपहर को (सोने के लिए मामूलन) कपड़े उतार दिया करते हो (तीसरी) नमाजे इशा के बाद (ये) तीन (वक्त) तुम्हारे परदे के हैं इन अवक़ात के अलावा (बे अज़न आने मे) न तुम पर कोई इल्ज़ाम है-न उन पर (क्योंकि) उन अवक़ात के अलावा (ब ज़रुरत या बे ज़रुरत) लोग एक दूसरे के पास चक्कर लगाया करते हैं- यँ ख़ुदा (अपने) एहकाम तुम से साफ साफ बयान करता है और ख़ुदा तो बड़ा वाकिफ़कार हकीम है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لِيَسْتَأْذِنكُم – वे तुमसे अनुमति माँगें।
  • مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ – तुम्हारे स्वामित्व वाले ग़ुलाम और बाँदियाँ।
  • الْحُلُم – बालिग़ होना (सपने में प्रदूषण का अनुभव)।
  • الظَّهِيرَة – दोपहर का समय जब सूरज ढलने लगे।
  • عَوْرَات – वे समय जब शरीर का सतर खुला होता है (गोपनीयता के क्षण)।
  • طَوَّافُونَ – बार-बार आने-जाने वाले (सेवा के लिए)।

तफ़सीर:

ऐ ईमान वालो! अल्लाह तआला तुम्हें आदाब (शिष्टाचार) सिखा रहा है, ताकि तुम्हारे घरों में पवित्रता और गोपनीयता बनी रहे। यह हुक्म है कि तुम्हारे ग़ुलाम, बाँदियाँ और वे बच्चे जो अभी बालिग़ नहीं हुए हैं, वे तीन खास समयों में तुमसे अनुमति लेकर ही तुम्हारे पास आएँ:

  1. सुबह की नमाज़ (फ़ज्र) से पहले – यह वह समय है जब लोग नींद से उठते हैं और रात के कपड़े बदलते हैं।
  2. दोपहर के समय (ज़ुहर) – जब लोग आराम (क़ैलूला) के लिए कपड़े उतारते हैं।
  3. रात की नमाज़ (ईशा) के बाद – यह सोने का समय है, जब लोग दिन के कपड़े उतारकर रात के कपड़े पहनते हैं।

ये तीनों समय तुम्हारे लिए गोपनीयता के क्षण हैं, जब शरीर का सतर खुला हो सकता है। इसलिए इन समयों में बिना अनुमति के किसी को भी अंदर नहीं आना चाहिए। लेकिन इन तीनों समयों के अलावा, तुम पर और उन पर कोई गुनाह नहीं कि वे बिना अनुमति के आएँ-जाएँ, क्योंकि वे तुम्हारी सेवा के लिए हमेशा तुम्हारे पास आते-जाते रहते हैं – एक दूसरे के पास आना-जाना आम बात है।

अल्लाह तआला इसी तरह अपनी आयतें स्पष्ट करता है ताकि तुम समझो और अपने जीवन को पवित्र बनाओ। वह सब कुछ जानने वाला है, और जो कुछ भी वह हुक्म देता है, हिकमत (बुद्धिमत्ता) के साथ देता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का धर्म नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू में अदब और तहज़ीब सिखाता है। अल्लाह हमें यह सिखाकर हमारी इज़्ज़त बढ़ाता है और हमारे घरों को रहमत से भर देता है। जब हम इन आदाबों पर अमल करेंगे, तो हमारे घरों में मुहब्बत, पाकीज़गी और बरकत होगी। यही इस्लाम की खूबसूरती है कि वह हर छोटी-बड़ी बात में हमें अल्लाह की याद दिलाता है और हमें बेहतर इंसान बनाता है।



📜 आयत 56-60 — अन-नूर

56وَأَقِيمُوا الصَّلَاةَ وَآتُوا الزَّكَاةَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
और (ऐ ईमानदारों) नमाज़ पाबन्दी से पढ़ा करो और ज़कात दिया करो और (दिल से) रसूल की इताअत करो ताकि तुम पर रहम किया जाए
57لَا تَحْسَبَنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا مُعْجِزِينَ فِي الْأَرْضِ ۚ وَمَأْوَاهُمُ النَّارُ ۖ وَلَبِئْسَ الْمَصِيرُ
और (ऐ रसूल) तुम ये ख्याल न करो कि कुफ्फार (इधर उधर) ज़मीन मे (फैल कर हमें) आजिज़ कर देगें (ये ख़ुद आजिज़ हो जाएगें) और उनका ठिकाना तो जहन्नुम है और क्या बुरा ठिकाना है
58يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لِيَسْتَأْذِنكُمُ الَّذِينَ مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ وَالَّذِينَ لَمْ يَبْلُغُوا الْحُلُمَ مِنكُمْ ثَلَاثَ مَرَّاتٍ ۚ مِّن قَبْلِ صَلَاةِ الْفَجْرِ وَحِينَ تَضَعُونَ ثِيَابَكُم مِّنَ الظَّهِيرَةِ وَمِن بَعْدِ صَلَاةِ الْعِشَاءِ ۚ ثَلَاثُ عَوْرَاتٍ لَّكُمْ ۚ لَيْسَ عَلَيْكُمْ وَلَا عَلَيْهِمْ جُنَاحٌ بَعْدَهُنَّ ۚ طَوَّافُونَ عَلَيْكُم بَعْضُكُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ ۚ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمُ الْآيَاتِ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
ऐ ईमानदारों तुम्हारी लौन्डी ग़ुलाम और वह लड़के जो अभी तक बुलूग़ की हद तक नहीं पहुँचे हैं उनको भी चाहिए कि (दिन रात में) तीन मरतबा (तुम्हारे पास आने की) तुमसे इजाज़त ले लिया करें तब आएँ (एक) नमाज़ सुबह से पहले और (दूसरे) जब तुम (गर्मी से) दोपहर को (सोने के लिए मामूलन) कपड़े उतार दिया करते हो (तीसरी) नमाजे इशा के बाद (ये) तीन (वक्त) तुम्हारे परदे के हैं इन अवक़ात के अलावा (बे अज़न आने मे) न तुम पर कोई इल्ज़ाम है-न उन पर (क्योंकि) उन अवक़ात के अलावा (ब ज़रुरत या बे ज़रुरत) लोग एक दूसरे के पास चक्कर लगाया करते हैं- यँ ख़ुदा (अपने) एहकाम तुम से साफ साफ बयान करता है और ख़ुदा तो बड़ा वाकिफ़कार हकीम है
59وَإِذَا بَلَغَ الْأَطْفَالُ مِنكُمُ الْحُلُمَ فَلْيَسْتَأْذِنُوا كَمَا اسْتَأْذَنَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ كَذَٰلِكَ يُبَيِّنُ اللَّهُ لَكُمْ آيَاتِهِ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और (ऐ ईमानदारों) जब तुम्हारे लड़के हदे बुलूग को पहुँचें तो जिस तरह उन के कब्ल (बड़ी उम्र) वाले (घर में आने की) इजाज़त ले लिया करते थे उसी तरह ये लोग भी इजाज़त ले लिया करें-यूँ ख़ुदा अपने एहकाम साफ साफ बयान करता है और ख़ुदा तो बड़ा वाकिफकार हकीम है
60وَالْقَوَاعِدُ مِنَ النِّسَاءِ اللَّاتِي لَا يَرْجُونَ نِكَاحًا فَلَيْسَ عَلَيْهِنَّ جُنَاحٌ أَن يَضَعْنَ ثِيَابَهُنَّ غَيْرَ مُتَبَرِّجَاتٍ بِزِينَةٍ ۖ وَأَن يَسْتَعْفِفْنَ خَيْرٌ لَّهُنَّ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
और बूढ़ी बूढ़ी औरतें जो (बुढ़ापे की वजह से) निकाह की ख्वाहिश नही रखती वह अगर अपने कपड़े (दुपट्टे वगैराह) उतारकर (सर नंगा) कर डालें तो उसमें उन पर कुछ गुनाह नही है- बशर्ते कि उनको अपना बनाव सिंगार दिखाना मंज़ूर न हो और (इस से भी) बचें तो उनके लिए और बेहतर है और ख़ुदा तो (सबकी सब कुछ) सुनता और जानता है
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अनुवाद — अन-नूर 58

सूरा अन-नूर आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों तुम्हारी लौन्डी ग़ुलाम और वह लड़के जो अभी…

सूरा आयत 58/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.




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Wednesday, August 19, 2026

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