Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لِيَسْتَأْذِنكُم – वे तुमसे अनुमति माँगें।
- مَلَكَتْ أَيْمَانُكُمْ – तुम्हारे स्वामित्व वाले ग़ुलाम और बाँदियाँ।
- الْحُلُم – बालिग़ होना (सपने में प्रदूषण का अनुभव)।
- الظَّهِيرَة – दोपहर का समय जब सूरज ढलने लगे।
- عَوْرَات – वे समय जब शरीर का सतर खुला होता है (गोपनीयता के क्षण)।
- طَوَّافُونَ – बार-बार आने-जाने वाले (सेवा के लिए)।
तफ़सीर:
ऐ ईमान वालो! अल्लाह तआला तुम्हें आदाब (शिष्टाचार) सिखा रहा है, ताकि तुम्हारे घरों में पवित्रता और गोपनीयता बनी रहे। यह हुक्म है कि तुम्हारे ग़ुलाम, बाँदियाँ और वे बच्चे जो अभी बालिग़ नहीं हुए हैं, वे तीन खास समयों में तुमसे अनुमति लेकर ही तुम्हारे पास आएँ:
- सुबह की नमाज़ (फ़ज्र) से पहले – यह वह समय है जब लोग नींद से उठते हैं और रात के कपड़े बदलते हैं।
- दोपहर के समय (ज़ुहर) – जब लोग आराम (क़ैलूला) के लिए कपड़े उतारते हैं।
- रात की नमाज़ (ईशा) के बाद – यह सोने का समय है, जब लोग दिन के कपड़े उतारकर रात के कपड़े पहनते हैं।
ये तीनों समय तुम्हारे लिए गोपनीयता के क्षण हैं, जब शरीर का सतर खुला हो सकता है। इसलिए इन समयों में बिना अनुमति के किसी को भी अंदर नहीं आना चाहिए। लेकिन इन तीनों समयों के अलावा, तुम पर और उन पर कोई गुनाह नहीं कि वे बिना अनुमति के आएँ-जाएँ, क्योंकि वे तुम्हारी सेवा के लिए हमेशा तुम्हारे पास आते-जाते रहते हैं – एक दूसरे के पास आना-जाना आम बात है।
अल्लाह तआला इसी तरह अपनी आयतें स्पष्ट करता है ताकि तुम समझो और अपने जीवन को पवित्र बनाओ। वह सब कुछ जानने वाला है, और जो कुछ भी वह हुक्म देता है, हिकमत (बुद्धिमत्ता) के साथ देता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का धर्म नहीं, बल्कि जीवन के हर पहलू में अदब और तहज़ीब सिखाता है। अल्लाह हमें यह सिखाकर हमारी इज़्ज़त बढ़ाता है और हमारे घरों को रहमत से भर देता है। जब हम इन आदाबों पर अमल करेंगे, तो हमारे घरों में मुहब्बत, पाकीज़गी और बरकत होगी। यही इस्लाम की खूबसूरती है कि वह हर छोटी-बड़ी बात में हमें अल्लाह की याद दिलाता है और हमें बेहतर इंसान बनाता है।
📜 आयत 56-60 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 58
सूरा अन-नूर आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ ईमानदारों तुम्हारी लौन्डी ग़ुलाम और वह लड़के जो अभी…सूरा आयत 58/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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