अर-राद · 11/43
अनुवाद उच्चारण — अर-राद
لَهُ مُعَقِّبَاتٌ مِّن بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ يَحْفَظُونَهُ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنفُسِهِمْ ۗ وَإِذَا أَرَادَ اللَّهُ بِقَوْمٍ سُوءًا فَلَا مَرَدَّ لَهُ ۚ وَمَا لَهُم مِّن دُونِهِ مِن وَالٍ ۝١١
Lahoo mu`aqqibaatum mim baini yadaihi wa min khalfihee yahfazoonahoo min amril laah; innal laaha laa yughaiyiru maa biqawmin hattaa yughaiyiroo maa bianfusihim; wa izaaa araadal laahu biqawmin sooo`an falaa maradda lah; wa maa lahum min dooniheeminw waal
📖 हिंदी अर्थ
(उसके नज़दीक) सब बराबर हैं (आदमी किसी हालत में हो मगर) उस अकेले के लिए उसके आगे उसके पीछे उसके निगेहबान (फरिश्ते) मुक़र्रर हैं कि उसको हुक्म ख़ुदा से हिफाज़त करते हैं जो (नेअमत) किसी क़ौम को हासिल हो बेशक वह लोग खुद अपनी नफ्सानी हालत में तग्य्युर न डालें ख़ुदा हरगिज़ तग्य्युर नहीं डाला करता और जब ख़ुदा किसी क़ौम पर बुराई का इरादा करता है तो फिर उसका कोई टालने वाला नहीं और न उसका उसके सिवा कोई वाली और (सरपरस्त) है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُعَقِّبَاتٌ: वे फ़रिश्ते जो बारी-बारी से आते हैं, एक के बाद एक।
  • مِن بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ: उसके आगे और पीछे से।
  • يَحْفَظُونَهُ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ: अल्लाह के हुक्म से उसकी हिफ़ाज़त करते हैं।
  • لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ: किसी क़ौम की नेमत को नहीं बदलता।
  • سُوءًا: अज़ाब या बुराई।
  • وَالٍ: संरक्षक, मददगार, कार्य-साधक।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने हर इंसान के लिए फ़रिश्तों की टोलियाँ नियुक्त की हैं जो लगातार बदलती रहती हैं — कुछ दिन में आते हैं और कुछ रात में। ये फ़रिश्ते इंसान के आगे और पीछे से उसकी हिफ़ाज़त करते हैं, अल्लाह के हुक्म से। वे उसे उन मुसीबतों और आफ़तों से बचाते हैं जो अल्लाह ने उसके लिए मुक़द्दर नहीं कीं, और साथ ही वे उसके अच्छे और बुरे सारे कर्मों को लिखते रहते हैं। लेकिन जब अल्लाह का फ़ैसला और क़ज़ा आ जाती है, तो ये फ़रिश्ते उसे नहीं रोक सकते।

फिर अल्लाह तआला एक बड़ा क़ानून बयान करता है: अल्लाह किसी क़ौम की नेमत और अच्छी हालत को नहीं बदलता, जब तक कि वह ख़ुद अपने दिलों और अपने आचरण को न बदल दे — यानी शुक्र की जगह नाशुक्री, इमान की जगह गुनाह और अच्छाई की जगह बुराई अपना ले। यह अल्लाह का अटल नियम है।

और जब अल्लाह किसी क़ौम के लिए अज़ाब या बुराई का इरादा कर लेता है, तो उसे कोई टाल नहीं सकता, न कोई दुआ उसे रोक सकती है और न कोई ताक़त। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह के सिवा कोई वली और मददगार नहीं होता जो उनकी भलाई कर सके या उनसे बुराई को दूर कर सके।


फ़ायदे और सबक़:

  1. इंसान कभी अकेला नहीं होता — अल्लाह के फ़रिश्ते हर वक़्त उसकी हिफ़ाज़त कर रहे हैं, यह बात दिल को सुकून देती है और अल्लाह पर भरोसा बढ़ाती है।
  2. अल्लाह की हिफ़ाज़त उसके हुक्म से होती है, यानी सारी तदबीरें और हिफ़ाज़त के ज़रिए अल्लाह ही के इख़्तियार में हैं — इसलिए असली पनाह अल्लाह ही की तरफ़ है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि किसी क़ौम की तरक़्क़ी और ज़िल्लत का राज़ उसके अपने हाथ में है — अगर हम अपने अंदर सुधार करें, गुनाह छोड़ें और नेकी अपनाएँ, तो अल्लाह हमारी हालत बदल देगा।
  4. यह आयत हमें ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाती है — हम अपनी तक़दीर ख़ुद बदल सकते हैं, बशर्ते हम अपने दिल और अपने कर्मों को बदलें।
  5. अल्लाह के अज़ाब से डरना और उसकी पकड़ से बचने का ज़रिया सिर्फ़ तौबा और नेक अमल है — कोई और मददगार उस दिन काम नहीं आएगा।
  6. यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि वे अपनी उम्मत की हालत पर ग़ौर करें — अगर बुरी हालत है, तो उसका हल अपने अंदर तलाश करें, न कि बाहर के हालात को कोसें।
🎧 सुनें

📜 आयत 9-13 — अर-राद

9عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ الْكَبِيرُ الْمُتَعَالِ
(वही) बातिन (छुपे हुवे) व ज़ाहिर का जानने वाला (सब से) बड़ा और आलीशान है
10سَوَاءٌ مِّنكُم مَّنْ أَسَرَّ الْقَوْلَ وَمَن جَهَرَ بِهِ وَمَنْ هُوَ مُسْتَخْفٍ بِاللَّيْلِ وَسَارِبٌ بِالنَّهَارِ
तुम लोगों में जो कोई चुपके से बात कहे और जो शख़्श ज़ोर से पुकार के बोले और जो शख़्श रात की तारीक़ी (अंधेरे) में छुपा बैठा हो और जो शख़्श दिन दहाडें चला जा रहा हो
11لَهُ مُعَقِّبَاتٌ مِّن بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ يَحْفَظُونَهُ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنفُسِهِمْ ۗ وَإِذَا أَرَادَ اللَّهُ بِقَوْمٍ سُوءًا فَلَا مَرَدَّ لَهُ ۚ وَمَا لَهُم مِّن دُونِهِ مِن وَالٍ
(उसके नज़दीक) सब बराबर हैं (आदमी किसी हालत में हो मगर) उस अकेले के लिए उसके आगे उसके पीछे उसके निगेहबान (फरिश्ते) मुक़र्रर हैं कि उसको हुक्म ख़ुदा से हिफाज़त करते हैं जो (नेअमत) किसी क़ौम को हासिल हो बेशक वह लोग खुद अपनी नफ्सानी हालत में तग्य्युर न डालें ख़ुदा हरगिज़ तग्य्युर नहीं डाला करता और जब ख़ुदा किसी क़ौम पर बुराई का इरादा करता है तो फिर उसका कोई टालने वाला नहीं और न उसका उसके सिवा कोई वाली और (सरपरस्त) है
12هُوَ الَّذِي يُرِيكُمُ الْبَرْقَ خَوْفًا وَطَمَعًا وَيُنشِئُ السَّحَابَ الثِّقَالَ
वह वही तो है जो तुम्हें डराने और लालच देने के वास्ते बिजली की चमक दिखाता है और पानी से भरे बोझल बादलों को पैदा करता है
13وَيُسَبِّحُ الرَّعْدُ بِحَمْدِهِ وَالْمَلَائِكَةُ مِنْ خِيفَتِهِ وَيُرْسِلُ الصَّوَاعِقَ فَيُصِيبُ بِهَا مَن يَشَاءُ وَهُمْ يُجَادِلُونَ فِي اللَّهِ وَهُوَ شَدِيدُ الْمِحَالِ
और ग़र्ज और फरिश्ते उसके ख़ौफ से उसकी हम्दो सना की तस्बीह किया करते हैं वही (आसमान से) बिजलियों को भेजता है फिर उसे जिस पर चाहता है गिरा भी देता है और ये लोग ख़ुदा के बारे में (ख्वामाख्वाह) झगड़े करते हैं हालॉकि वह बड़ा सख्त क़ूवत वाला है
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अनुवाद — अर-राद 11

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Tuesday, August 18, 2026

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