अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُعَقِّبَاتٌ: वे फ़रिश्ते जो बारी-बारी से आते हैं, एक के बाद एक।
- مِن بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ: उसके आगे और पीछे से।
- يَحْفَظُونَهُ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ: अल्लाह के हुक्म से उसकी हिफ़ाज़त करते हैं।
- لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ: किसी क़ौम की नेमत को नहीं बदलता।
- سُوءًا: अज़ाब या बुराई।
- وَالٍ: संरक्षक, मददगार, कार्य-साधक।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने हर इंसान के लिए फ़रिश्तों की टोलियाँ नियुक्त की हैं जो लगातार बदलती रहती हैं — कुछ दिन में आते हैं और कुछ रात में। ये फ़रिश्ते इंसान के आगे और पीछे से उसकी हिफ़ाज़त करते हैं, अल्लाह के हुक्म से। वे उसे उन मुसीबतों और आफ़तों से बचाते हैं जो अल्लाह ने उसके लिए मुक़द्दर नहीं कीं, और साथ ही वे उसके अच्छे और बुरे सारे कर्मों को लिखते रहते हैं। लेकिन जब अल्लाह का फ़ैसला और क़ज़ा आ जाती है, तो ये फ़रिश्ते उसे नहीं रोक सकते।
फिर अल्लाह तआला एक बड़ा क़ानून बयान करता है: अल्लाह किसी क़ौम की नेमत और अच्छी हालत को नहीं बदलता, जब तक कि वह ख़ुद अपने दिलों और अपने आचरण को न बदल दे — यानी शुक्र की जगह नाशुक्री, इमान की जगह गुनाह और अच्छाई की जगह बुराई अपना ले। यह अल्लाह का अटल नियम है।
और जब अल्लाह किसी क़ौम के लिए अज़ाब या बुराई का इरादा कर लेता है, तो उसे कोई टाल नहीं सकता, न कोई दुआ उसे रोक सकती है और न कोई ताक़त। ऐसे लोगों के लिए अल्लाह के सिवा कोई वली और मददगार नहीं होता जो उनकी भलाई कर सके या उनसे बुराई को दूर कर सके।
फ़ायदे और सबक़:
- इंसान कभी अकेला नहीं होता — अल्लाह के फ़रिश्ते हर वक़्त उसकी हिफ़ाज़त कर रहे हैं, यह बात दिल को सुकून देती है और अल्लाह पर भरोसा बढ़ाती है।
- अल्लाह की हिफ़ाज़त उसके हुक्म से होती है, यानी सारी तदबीरें और हिफ़ाज़त के ज़रिए अल्लाह ही के इख़्तियार में हैं — इसलिए असली पनाह अल्लाह ही की तरफ़ है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि किसी क़ौम की तरक़्क़ी और ज़िल्लत का राज़ उसके अपने हाथ में है — अगर हम अपने अंदर सुधार करें, गुनाह छोड़ें और नेकी अपनाएँ, तो अल्लाह हमारी हालत बदल देगा।
- यह आयत हमें ज़िम्मेदारी का एहसास दिलाती है — हम अपनी तक़दीर ख़ुद बदल सकते हैं, बशर्ते हम अपने दिल और अपने कर्मों को बदलें।
- अल्लाह के अज़ाब से डरना और उसकी पकड़ से बचने का ज़रिया सिर्फ़ तौबा और नेक अमल है — कोई और मददगार उस दिन काम नहीं आएगा।
- यह आयत मुसलमानों को यह भी सिखाती है कि वे अपनी उम्मत की हालत पर ग़ौर करें — अगर बुरी हालत है, तो उसका हल अपने अंदर तलाश करें, न कि बाहर के हालात को कोसें।
📜 आयत 9-13 — अर-राद
अनुवाद — अर-राद 11
सूरा अर-राद आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (उसके नज़दीक) सब बराबर हैं (आदमी किसी हालत में हो…सूरा आयत 11/43 — अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-राद सुनें, अर-राद अनुवाद, अर-राद mp3, अर-राद pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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