अर-राद · 10/43
अनुवाद उच्चारण — अर-राद
سَوَاءٌ مِّنكُم مَّنْ أَسَرَّ الْقَوْلَ وَمَن جَهَرَ بِهِ وَمَنْ هُوَ مُسْتَخْفٍ بِاللَّيْلِ وَسَارِبٌ بِالنَّهَارِ ۝١٠
Sawaaa`um minkum man asarral qawla wa man jahara bihee wa man huwa mustakhfim billaili wa saaribum binnahaar
📖 हिंदी अर्थ
तुम लोगों में जो कोई चुपके से बात कहे और जो शख़्श ज़ोर से पुकार के बोले और जो शख़्श रात की तारीक़ी (अंधेरे) में छुपा बैठा हो और जो शख़्श दिन दहाडें चला जा रहा हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَسَرَّ الْقَوْلَ: बात को चुपके से कहना, दिल में छिपाना।
  • جَهَرَ بِهِ: बात को खुलेआम और ऊँची आवाज़ में कहना।
  • مُسْتَخْفٍ بِاللَّيْلِ: रात के अंधेरे में छिपने वाला, जो अपने कामों को लोगों की नज़रों से छिपाए।
  • سَارِبٌ بِالنَّهَارِ: दिन में खुलेआम चलने-फिरने वाला, अपने कामों को प्रकट करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला का इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है। उसके ज्ञान में कोई फर्क नहीं कि कोई बात चुपके से की जाए या खुलेआम। जो व्यक्ति रात के अंधेरे में अपने कामों को छिपाता है, और जो दिन की रोशनी में अपने कामों को प्रकट करता है, अल्लाह के इल्म में दोनों बिल्कुल बराबर हैं। वह हर एक के दिल के राज़, हर एक की छिपी हुई नीयत और हर एक के ज़ाहिरी अमल से पूरी तरह वाकिफ है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह का इल्म हर समय, हर जगह और हर हालत में हमारे साथ है। रात का अंधेरा, दिन की रोशनी, एकांत की चुप्पी या भीड़ का शोर — कुछ भी अल्लाह के इल्म से बाहर नहीं है। जो व्यक्ति रात में छिपकर कोई बुरा काम करता है, वह समझता है कि कोई उसे नहीं देख रहा, लेकिन अल्लाह उसे देख रहा है। और जो दिन में अच्छे काम करता है, अल्लाह उसके अच्छे कामों को भी जानता है और उसका अज्र (इनाम) उसे ज़रूर देगा।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह की निगरानी का एहसास हमें हर वक़्त अपने दिल में रखना चाहिए। जब हमें यकीन होगा कि अल्लाह हमारी हर छोटी-बड़ी बात, हर छिपे और खुले अमल को देख रहा है, तो हम गुनाहों से बचेंगे और नेक कामों की तरफ बढ़ेंगे। यही ईमान की निशानी है कि इंसान अल्लाह की निगरानी को हर वक़्त महसूस करे।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें अपने अंदर और बाहर दोनों को सुधारना चाहिए। जो हम छिपाकर करते हैं और जो खुलेआम करते हैं, दोनों अल्लाह के सामने हैं। इसलिए हमें अपनी नीयत को साफ रखना चाहिए और अपने अमल को अच्छा बनाना चाहिए। अल्लाह हर अच्छे काम का बदला देगा और हर बुरे काम का हिसाब लेगा। यह सोच हमें गुनाहों से दूर रखती है और नेकी की तरफ ले जाती है।



📜 आयत 8-12 — अर-राद

8اللَّهُ يَعْلَمُ مَا تَحْمِلُ كُلُّ أُنثَىٰ وَمَا تَغِيضُ الْأَرْحَامُ وَمَا تَزْدَادُ ۖ وَكُلُّ شَيْءٍ عِندَهُ بِمِقْدَارٍ
और हर क़ौम के लिए एक हिदायत करने वाला है हर मादा जो कि पेट में लिए हुए है और उसको ख़ुदा ही जानता है व बच्चा दानियों का घटना बढ़ना (भी वही जानता है) और हर चीज़ उसके नज़दीक़ एक अन्दाजे से है
9عَالِمُ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ الْكَبِيرُ الْمُتَعَالِ
(वही) बातिन (छुपे हुवे) व ज़ाहिर का जानने वाला (सब से) बड़ा और आलीशान है
10سَوَاءٌ مِّنكُم مَّنْ أَسَرَّ الْقَوْلَ وَمَن جَهَرَ بِهِ وَمَنْ هُوَ مُسْتَخْفٍ بِاللَّيْلِ وَسَارِبٌ بِالنَّهَارِ
तुम लोगों में जो कोई चुपके से बात कहे और जो शख़्श ज़ोर से पुकार के बोले और जो शख़्श रात की तारीक़ी (अंधेरे) में छुपा बैठा हो और जो शख़्श दिन दहाडें चला जा रहा हो
11لَهُ مُعَقِّبَاتٌ مِّن بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ يَحْفَظُونَهُ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنفُسِهِمْ ۗ وَإِذَا أَرَادَ اللَّهُ بِقَوْمٍ سُوءًا فَلَا مَرَدَّ لَهُ ۚ وَمَا لَهُم مِّن دُونِهِ مِن وَالٍ
(उसके नज़दीक) सब बराबर हैं (आदमी किसी हालत में हो मगर) उस अकेले के लिए उसके आगे उसके पीछे उसके निगेहबान (फरिश्ते) मुक़र्रर हैं कि उसको हुक्म ख़ुदा से हिफाज़त करते हैं जो (नेअमत) किसी क़ौम को हासिल हो बेशक वह लोग खुद अपनी नफ्सानी हालत में तग्य्युर न डालें ख़ुदा हरगिज़ तग्य्युर नहीं डाला करता और जब ख़ुदा किसी क़ौम पर बुराई का इरादा करता है तो फिर उसका कोई टालने वाला नहीं और न उसका उसके सिवा कोई वाली और (सरपरस्त) है
12هُوَ الَّذِي يُرِيكُمُ الْبَرْقَ خَوْفًا وَطَمَعًا وَيُنشِئُ السَّحَابَ الثِّقَالَ
वह वही तो है जो तुम्हें डराने और लालच देने के वास्ते बिजली की चमक दिखाता है और पानी से भरे बोझल बादलों को पैदा करता है
अर-रादकुरान सूची
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10आयत

अनुवाद — अर-राद 10

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Tuesday, August 18, 2026

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