अर-राद · 12/43
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-राद
هُوَ الَّذِي يُرِيكُمُ الْبَرْقَ خَوْفًا وَطَمَعًا وَيُنشِئُ السَّحَابَ الثِّقَالَ ۝١٢
Huwal lazee yureekumul barqa khawfanw wa tama`anw wa yunshi`us sahaabas siqaal
📖 हिंदी अर्थ
वह वही तो है जो तुम्हें डराने और लालच देने के वास्ते बिजली की चमक दिखाता है और पानी से भरे बोझल बादलों को पैदा करता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْبَرْقَ (बर्क़): बिजली की चमक, जो बादलों से निकलने वाला प्रकाश है।
  • خَوْفًا (ख़ौफ़न): डर, भय — यहाँ इससे अभिप्राय बिजली गिरने (कड़कने) के डर से है।
  • طَمَعًا (तमअन): लालच, आशा — यहाँ इससे अभिप्राय वर्षा की आशा से है।
  • يُنْشِئُ (युन्शीउ): पैदा करता है, उठाता है, बनाता है।
  • السَّحَابَ (अस-सहाब): बादल।
  • الثِّقَالَ (अस-सिक़ाल): भारी बादल, जो पानी से लदे हुए हों।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपनी महान शक्ति और दयालुता के कुछ नमूने पेश करते हुए बताता है कि वही वह (एकमात्र) है जो तुम्हें बिजली की चमक दिखाता है। यह चमक तुम्हारे लिए दो विपरीत भावनाएँ पैदा करती है: एक तरफ़ तुम्हें डर लगता है कि कहीं यही बिजली कड़ककर तुम पर न गिर जाए और आग लगा दे, और दूसरी तरफ़ तुम्हें आशा होती है कि इसी के साथ बारिश का पानी बरसेगा जो ज़मीन को सींचेगा और तुम्हारी प्यास बुझाएगा।

फिर अल्लाह अपनी क़ुदरत का दूसरा नमूना बयान करता है कि वही भारी बादलों को पैदा करता है — यानी उन्हें उठाता है, जो पानी से लदे हुए होते हैं और अपने साथ भरपूर बारिश लाते हैं। ये बादल इतने भारी होते हैं कि इनमें जल की बड़ी मात्रा होती है, और यह सब कुछ अल्लाह की व्यवस्था और रहमत से होता है, ताकि लोगों को लाभ पहुँचे।


फ़ायदे (सीख):

  1. अल्लाह की क़ुदरत पर ग़ौर: यह आयत हमें सिखाती है कि बिजली और बादल जैसी आम चीज़ों में भी अल्लाह की बेपनाह ताक़त छिपी है। जब हम इन्हें देखें तो अल्लाह की अज़मत को याद करें और उसकी तारीफ़ करें।
  2. डर और उम्मीद का ताल्लुक़: बिजली में डर और आशा दोनों हैं — यह हमें सिखाता है कि मुसलमान की ज़िंदगी में अल्लाह से डर (उसके अज़ाब का ख़ौफ़) और उसकी रहमत से उम्मीद दोनों होने चाहिए। न तो इतना डर कि निराश हो जाए, न इतनी उम्मीद कि ग़फ़लत में पड़ जाए।
  3. रिज़्क़ में अल्लाह का भरोसा: बारिश लाने वाले बादल अल्लाह ही पैदा करता है — यह हमें सिखाता है कि रोज़ी और रिज़्क़ का मालिक सिर्फ़ अल्लाह है। इसलिए हमें अपनी कमाई के साथ-साथ अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और उससे दुआ करनी चाहिए।
  4. प्रकृति में निशानियाँ: यह आयत हमें प्रकृति की हर चीज़ में अल्लाह की निशानियाँ देखने की तरग़ीब देती है। बिजली, बादल, बारिश — सब अल्लाह की रहमत के पैग़ाम हैं, जो हमें उसकी याद दिलाते हैं और उसके करीब लाते हैं।


📜 आयत 10-14 — सूरा अर-राद

10سَوَاءٌ مِّنكُم مَّنْ أَسَرَّ الْقَوْلَ وَمَن جَهَرَ بِهِ وَمَنْ هُوَ مُسْتَخْفٍ بِاللَّيْلِ وَسَارِبٌ بِالنَّهَارِ
तुम लोगों में जो कोई चुपके से बात कहे और जो शख़्श ज़ोर से पुकार के बोले और जो शख़्श रात की तारीक़ी (अंधेरे) में छुपा बैठा हो और जो शख़्श दिन दहाडें चला जा रहा हो
11لَهُ مُعَقِّبَاتٌ مِّن بَيْنِ يَدَيْهِ وَمِنْ خَلْفِهِ يَحْفَظُونَهُ مِنْ أَمْرِ اللَّهِ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يُغَيِّرُ مَا بِقَوْمٍ حَتَّىٰ يُغَيِّرُوا مَا بِأَنفُسِهِمْ ۗ وَإِذَا أَرَادَ اللَّهُ بِقَوْمٍ سُوءًا فَلَا مَرَدَّ لَهُ ۚ وَمَا لَهُم مِّن دُونِهِ مِن وَالٍ
(उसके नज़दीक) सब बराबर हैं (आदमी किसी हालत में हो मगर) उस अकेले के लिए उसके आगे उसके पीछे उसके निगेहबान (फरिश्ते) मुक़र्रर हैं कि उसको हुक्म ख़ुदा से हिफाज़त करते हैं जो (नेअमत) किसी क़ौम को हासिल हो बेशक वह लोग खुद अपनी नफ्सानी हालत में तग्य्युर न डालें ख़ुदा हरगिज़ तग्य्युर नहीं डाला करता और जब ख़ुदा किसी क़ौम पर बुराई का इरादा करता है तो फिर उसका कोई टालने वाला नहीं और न उसका उसके सिवा कोई वाली और (सरपरस्त) है
12هُوَ الَّذِي يُرِيكُمُ الْبَرْقَ خَوْفًا وَطَمَعًا وَيُنشِئُ السَّحَابَ الثِّقَالَ
वह वही तो है जो तुम्हें डराने और लालच देने के वास्ते बिजली की चमक दिखाता है और पानी से भरे बोझल बादलों को पैदा करता है
13وَيُسَبِّحُ الرَّعْدُ بِحَمْدِهِ وَالْمَلَائِكَةُ مِنْ خِيفَتِهِ وَيُرْسِلُ الصَّوَاعِقَ فَيُصِيبُ بِهَا مَن يَشَاءُ وَهُمْ يُجَادِلُونَ فِي اللَّهِ وَهُوَ شَدِيدُ الْمِحَالِ
और ग़र्ज और फरिश्ते उसके ख़ौफ से उसकी हम्दो सना की तस्बीह किया करते हैं वही (आसमान से) बिजलियों को भेजता है फिर उसे जिस पर चाहता है गिरा भी देता है और ये लोग ख़ुदा के बारे में (ख्वामाख्वाह) झगड़े करते हैं हालॉकि वह बड़ा सख्त क़ूवत वाला है
14لَهُ دَعْوَةُ الْحَقِّ ۖ وَالَّذِينَ يَدْعُونَ مِن دُونِهِ لَا يَسْتَجِيبُونَ لَهُم بِشَيْءٍ إِلَّا كَبَاسِطِ كَفَّيْهِ إِلَى الْمَاءِ لِيَبْلُغَ فَاهُ وَمَا هُوَ بِبَالِغِهِ ۚ وَمَا دُعَاءُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ
(मुसीबत के वक्त) उसी का (पुकारना) ठीक पुकारना है और जो लोग उसे छोड़कर (दूसरों को) पुकारते हैं वह तो उनकी कुछ सुनते तक नहीं मगर जिस तरह कोई शख़्श (बग़ैर उंगलियां मिलाए) अपनी दोनों हथेलियाँ पानी की तरफ फैलाए ताकि पानी उसके मुँह में पहुँच जाए हालॉकि वह किसी तरह पहुँचने वाला नहीं और (इसी तरह) काफिरों की दुआ गुमराही में (पड़ी बहकी फिरा करती है)
अर-रादकुरान सूची
43आयत
मदनीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — अर-राद 12

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Friday, October 2, 2026

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