अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سُيِّرَتْ: हिलाई जाएं, स्थान से हटाई जाएं।
- قُطِّعَتْ: फाड़ दी जाए, चीर दी जाए।
- كُلِّمَ بِهِ الْمَوْتَى: मुर्दों से बात कराई जाए, अर्थात मुर्दे ज़िंदा होकर बोलें।
- يَيْأَسِ: यहाँ अर्थ है 'जान लें' या 'निश्चित रूप से समझ लें'।
- قَارِعَةٌ: वह मुसीबत या आफत जो अचानक आकर दस्तक दे, कड़ी सज़ा।
- تَحُلُّ: उतरे, नाज़िल हो।
- وَعْدُ اللّهِ: अल्लाह का वादा, यानी फतह और नुसरत का वादा।
तफसीर:
अल्लाह तआला इस आयत में उन काफिरों का जवाब दे रहे हैं जो नबी ﷺ से माँग करते थे कि कोई ऐसा चमत्कार दिखाओ जो हमारी समझ में आए — जैसे पहाड़ हट जाएं, ज़मीन फट जाए, या मुर्दे ज़िंदा होकर बात करें। अल्लाह फ़रमाता है: अगर कोई किताब ऐसी होती जिसके पढ़ने से पहाड़ अपनी जगह से चल पड़ते, या ज़मीन चीरकर उसमें से नहरें फूट पड़तीं, या मुर्दे ज़िंदा होकर बोलने लगते — तो वह किताब यही क़ुरआन होती, क्योंकि यह अपनी दलील और अपने असर में सबसे बढ़कर है। लेकिन उनका दिल ही सख्त और झुठलाने वाला है, इसलिए वे कितनी भी निशानियाँ देख लें, ईमान नहीं लाएंगे।
फिर अल्लाह फ़रमाता है: सारा मामला अल्लाह ही के हाथ में है — चाहे वह निशानियाँ दिखाए या न दिखाए, चाहे किसी को हिदायत दे या गुमराही में छोड़ दे। क्या ईमान वालों को यह बात मालूम नहीं कि अगर अल्लाह चाहता तो सारे इंसानों को बिना किसी निशानी के ईमान पर इकट्ठा कर देता? लेकिन उसकी हिकमत यह है कि लोग अपनी मर्जी और इख्तियार से राह पर आएं।
उसके बाद अल्लाह काफिरों को डराता है कि वे जो कुछ भी करते हैं — कुफ्र, ज़ुल्म, झुठलाना — उसकी सज़ा में उन पर मुसीबतें आती रहेंगी। कभी वे खुद मारे जाएंगे, कभी कैद होंगे, कभी उनके घरों के पास ही आफत उतरेगी, यहाँ तक कि अल्लाह का वादा आ जाए — यानी फतह और अल्लाह की मदद का वह वक़्त जो उसने अपने नबी ﷺ से किया था। और अल्लाह अपने वादे के खिलाफ़ कभी नहीं करता।
दावती पहलू:
इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है। अल्लाह ने क़ुरआन को इतना बड़ा मौजिज़ा बनाया है कि अगर पहाड़ भी उसके सामने झुक सकते हैं, तो यह किताब हर दिल को नर्म करने की ताकत रखती है — बशर्ते दिल साफ हो। आज भी जो लोग सच्चे दिल से क़ुरआन पढ़ते हैं और उस पर अमल करते हैं, उनकी ज़िंदगी बदल जाती है। यह क़ुरआन वही चमत्कार है जो क़यामत तक ज़िंदा है। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन को सिर्फ़ पढ़ने के लिए न रखें, बल्कि उसे अपनी ज़िंदगी में उतारें — तभी हमारे दिलों से अंधेरा दूर होगा और हमारी मुश्किलें हल होंगी। अल्लाह ने जो वादा किया है — मदद, फतह और हिदायत — वह ज़रूर पूरा होगा, बशर्ते हम उसकी राह पर चलें और उसके दीन की खिदमत करें।
📜 आयत 29-33 — अर-राद
अनुवाद — अर-राद 31
सूरा अर-राद आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर कोई ऐसा क़ुरान (भी नाज़िल होता) जिसकी बरकत…सूरा आयत 31/43 — अर-राद الرعد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अर-राद सुनें, अर-राद अनुवाद, अर-राद mp3, अर-राद pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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