अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- जुनाह (جُنَاح): गुनाह, पाप, कोई दोष या पाबंदी।
- गैर-मस्कूना (غَيْرَ مَسْكُونَةٍ): जो रहने के लिए न बनाई गई हों, जिनमें कोई न रहता हो।
- मताअ (مَتَاع): सामान, फायदा, ज़रूरत की चीज़, उपयोग की वस्तु।
- तुब्दून (تُبْدُونَ): जो तुम ज़ाहिर करते हो।
- तकतुमून (تَكْتُمُونَ): जो तुम छिपाते हो।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों को एक और आसानी और रहमत अता फ़रमा रहा है। पिछली आयत में घरों में दाखिल होने के लिए इजाज़त लेने का हुक्म दिया गया था, लेकिन यहाँ स्पष्ट किया जा रहा है कि यह पाबंदी उन घरों के लिए है जो किसी की रिहाइश के लिए मख़सूस हों। लेकिन अगर कोई घर या इमारत ऐसी हो जो किसी की रिहाइश के लिए न हो, बल्कि आम लोगों के इस्तेमाल के लिए हो—जैसे सरायें, मुसाफ़िरख़ाने, दुकानें, लाइब्रेरी, दफ़्तर, या ऐसी जगहें जहाँ लोग अपना सामान रखते हैं या किसी काम के लिए आते-जाते हैं—तो उनमें बगैर इजाज़त दाखिल होने में कोई गुनाह नहीं। क्योंकि इन जगहों पर इजाज़त लेने की ज़रूरत ही नहीं होती, और ऐसा करने में लोगों के लिए मशक्कत होती। यह अल्लाह की तरफ से एक सहूलत है ताकि लोग अपने कामों में आसानी महसूस करें।
फिर अल्लाह फ़रमाता है कि वह जानता है जो कुछ तुम ज़ाहिर करते हो और जो कुछ तुम छिपाते हो। यानी तुम्हारे अंदरूनी इरादे, नीयतें, और हरकतें—सब कुछ अल्लाह के इल्म में है। अगर कोई शख्स इन आम जगहों में किसी बुरे इरादे से दाखिल होता है, या किसी की परदादारी (झाँकने) की नीयत से जाता है, या फसाद की गरज़ से, तो अल्लाह उसे जानता है और उसका हिसाब लेगा। यह एक तरफ़ तो मोमिनों के लिए खुशखबरी है कि उन्हें आसानी दी गई, और दूसरी तरफ उन लोगों के लिए चेतावनी है जो इस आज़ादी का गलत इस्तेमाल करना चाहें।
दावती पहलू:
यह आयत हमें इस्लाम की आसानी और हमदर्दी सिखाती है। अल्लाह तआला अपने बंदों पर सख्ती नहीं करता, बल्कि उनकी ज़रूरतों और मजबूरियों को देखते हुए नरमी और सहूलत अता फरमाता है। यही इस्लाम की रूह है—मुश्किलें पैदा करना नहीं, बल्कि आसानी देना। साथ ही यह भी सबक है कि हमारी ज़िंदगी का हर पहलू—चाहे वह ज़ाहिर हो या छिपा—अल्लाह की निगरानी में है। यह एहसास हमें सच्चाई, ईमानदारी और परहेज़गारी की तरफ ले जाता है। जब हमें यकीन हो कि अल्लाह हमारी नीयतों को जानता है, तो हम अपने अंदर सुधार लाते हैं और बुरे इरादों से बचते हैं। यही तक़वा है, और यही वह चीज़ है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी दिलाती है।
📜 आयत 27-31 — अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 29
सूरा अन-नूर आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसमें अलबत्ता तुम पर इल्ज़ाम नहीं कि ग़ैर आबाद मकानात…सूरा आयत 29/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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