अन-नूर · 28/64
अनुवाद उच्चारण — अन-नूर
فَإِن لَّمْ تَجِدُوا فِيهَا أَحَدًا فَلَا تَدْخُلُوهَا حَتَّىٰ يُؤْذَنَ لَكُمْ ۖ وَإِن قِيلَ لَكُمُ ارْجِعُوا فَارْجِعُوا ۖ هُوَ أَزْكَىٰ لَكُمْ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ عَلِيمٌ ۝٢٨
Fa il lam tajidoo feehaaa ahadan falaa tadkhuloohaa hattaa yu`zana lakum wa in qeela lakumurji`oo farji`oo huwa azkaa lakum; wallaahu bimaa ta`maloona `Aleem
📖 हिंदी अर्थ
(ये नसीहत इसलिए है) ताकि तुम याद रखो पस अगर तुम उन घरों में किसी को न पाओ तो तावाक़फियत कि तुम को (ख़ास तौर पर) इजाज़त न हासिल हो जाए उन में न जाओ और अगर तुम से कहा जाए कि फिर जाओ तो तुम (बे ताम्मुल) फिर जाओ यही तुम्हारे वास्ते ज्यादा सफाई की बात है और तुम जो कुछ भी करते हो ख़ुदा उससे खूब वाकिफ़ है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَجِدُوا – पाओ, प्राप्त करो
  • يُؤْذَنَ – अनुमति दी जाए
  • ارْجِعُوا – लौट जाओ, वापस चले जाओ
  • أَزْكَى – अधिक पवित्र, अधिक शुद्ध और बेहतर
  • عَلِيمٌ – सब कुछ जानने वाला, पूर्ण ज्ञान रखने वाला

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मोमिनों को समाजिक शिष्टाचार और अदब की शिक्षा दे रहा है। जब तुम किसी के घर जाओ और वहाँ कोई व्यक्ति न मिले जो तुम्हें अनुमति दे सके, तो उस घर में प्रवेश मत करो, यहाँ तक कि तुम्हें स्पष्ट रूप से अनुमति न दे दी जाए। यह इस्लामी तहज़ीब का एक बुनियादी सिद्धांत है कि दूसरों की निजता (प्राइवेसी) का पूरा सम्मान किया जाए।

और यदि घर के मालिक तुमसे कहें कि "लौट जाओ" तो बिना किसी झिझक या नाराज़गी के लौट जाओ। यह लौट जाना तुम्हारे लिए अधिक पवित्र और बेहतर है, क्योंकि इसमें तुम्हारे दिल की पاکیزگی है, और यह तुम्हें उन परिस्थितियों से बचाता है जो शर्मिंदगी या बुरे گمان का कारण बन सकती हैं। घर के मालिक को भी अपनी निजता में खलल पसंद नहीं होता, और हो सकता है उस समय वह ऐसी हालत में हो जिसमें किसी का आना उसे ناگوار हो।

याद रखो कि अल्लाह तआला तुम्हारे हर अमल को देख रहा है और उसका पूरा علم رکھتا ہے। चाहे तुम घर में दाखिल होने की अनुमति माँगो या लौट जाओ, चाहे तुम दिल में कुछ भी محسوس करो — अल्लाह सब कुछ जानता है और वही तुम्हें तुम्हारे اعمال का بدلہ देगा।

दावत और नसीहत:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ इबादत का नाम नहीं, बल्कि एक مکمل ضابطہ حیات ہے جو हमारे روزمرہ کے معاملات میں بھی رہنمائی کرتا ہے۔ जिस तरह हम चाहते हैं कि हमारी निजता का احترام किया जाए، उसी तरह दूसरों की निजता का احترام करना भी हमारा فرض है। यही तो इस्लाम की خوبصورتی ہے کہ یہ ہر پہلو میں انسان کو پاکیزگی اور اخلاق کی بلندی پر لے جاتا ہے۔

जब हम इन आदाब को अपनाते हैं تو हमारे دلوں میں ایک دوسرے کے لیے محبت اور احترام بڑھتا ہے، اور معاشرہ امن و سکون کا گہوارہ بن جاتا ہے۔ اللہ تعالیٰ نے ہمیں یہ تعلیم دی ہے تاکہ ہم پاک دل اور صاف نیت کے ساتھ زندگی گزاریں، اور ہر عمل میں اللہ کی رضا کو پیش نظر رکھیں۔

یاد رکھیں! جو شخص اللہ کے بتائے ہوئے اصولوں پر چلتا ہے، اللہ اسے دنیا میں عزت دیتا ہے اور آخرت میں جنت کی نعمتوں سے نوازتا ہے۔ آئیے ہم اس تعلیم پر عمل کریں اور اپنے معاشرے کو محبت، احترام اور پاکیزگی کا نمونہ بنائیں۔

🎧 सुनें

📜 आयत 26-30 — अन-नूर

26الْخَبِيثَاتُ لِلْخَبِيثِينَ وَالْخَبِيثُونَ لِلْخَبِيثَاتِ ۖ وَالطَّيِّبَاتُ لِلطَّيِّبِينَ وَالطَّيِّبُونَ لِلطَّيِّبَاتِ ۚ أُولَٰئِكَ مُبَرَّءُونَ مِمَّا يَقُولُونَ ۖ لَهُم مَّغْفِرَةٌ وَرِزْقٌ كَرِيمٌ
गन्दी औरते गन्दें मर्दों के लिए (मुनासिब) हैं और गन्दे मर्द गन्दी औरतो के लिए और पाक औरतें पाक मर्दों के लिए (मौज़ूँ) हैं और पाक मर्द पाक औरतों के लिए लोग जो कुछ उनकी निस्बत बका करते हैं उससे ये लोग बुरी उल ज़िम्मा हैं उन ही (पाक लोगों) के लिए (आख़िरत में) बख़्शिस है
27يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا لَا تَدْخُلُوا بُيُوتًا غَيْرَ بُيُوتِكُمْ حَتَّىٰ تَسْتَأْنِسُوا وَتُسَلِّمُوا عَلَىٰ أَهْلِهَا ۚ ذَٰلِكُمْ خَيْرٌ لَّكُمْ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ
और इज्ज़त की रोज़ी ऐ ईमानदारों अपने घरों के सिवा दूसरे घरों में (दर्राना) न चले जाओ यहाँ तक कि उनसे इजाज़त ले लो और उन घरों के रहने वालों से साहब सलामत कर लो यही तुम्हारे हक़ में बेहतर है
28فَإِن لَّمْ تَجِدُوا فِيهَا أَحَدًا فَلَا تَدْخُلُوهَا حَتَّىٰ يُؤْذَنَ لَكُمْ ۖ وَإِن قِيلَ لَكُمُ ارْجِعُوا فَارْجِعُوا ۖ هُوَ أَزْكَىٰ لَكُمْ ۚ وَاللَّهُ بِمَا تَعْمَلُونَ عَلِيمٌ
(ये नसीहत इसलिए है) ताकि तुम याद रखो पस अगर तुम उन घरों में किसी को न पाओ तो तावाक़फियत कि तुम को (ख़ास तौर पर) इजाज़त न हासिल हो जाए उन में न जाओ और अगर तुम से कहा जाए कि फिर जाओ तो तुम (बे ताम्मुल) फिर जाओ यही तुम्हारे वास्ते ज्यादा सफाई की बात है और तुम जो कुछ भी करते हो ख़ुदा उससे खूब वाकिफ़ है
29لَّيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ أَن تَدْخُلُوا بُيُوتًا غَيْرَ مَسْكُونَةٍ فِيهَا مَتَاعٌ لَّكُمْ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ مَا تُبْدُونَ وَمَا تَكْتُمُونَ
इसमें अलबत्ता तुम पर इल्ज़ाम नहीं कि ग़ैर आबाद मकानात में जिसमें तुम्हारा कोई असबाब हो (बे इजाज़त) चले जाओ और जो कुछ खुल्लम खुल्ला करते हो और जो कुछ छिपाकर करते हो खुदा (सब कुछ) जानता है
30قُل لِّلْمُؤْمِنِينَ يَغُضُّوا مِنْ أَبْصَارِهِمْ وَيَحْفَظُوا فُرُوجَهُمْ ۚ ذَٰلِكَ أَزْكَىٰ لَهُمْ ۗ إِنَّ اللَّهَ خَبِيرٌ بِمَا يَصْنَعُونَ
(ऐ रसूल) ईमानदारों से कह दो कि अपनी नज़रों को नीची रखें और अपनी शर्मगाहों की हिफाज़त करें यही उनके वास्ते ज्यादा सफाई की बात है ये लोग जो कुछ करते हैं ख़ुदा उससे यक़ीनन ख़ूब वाक़िफ है
अन-नूरकुरान सूची
64आयत
मदनीRevelation
28आयत

अनुवाद — अन-नूर 28

सूरा अन-नूर आयत 28 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये नसीहत इसलिए है) ताकि तुम याद रखो पस अगर…

सूरा आयत 28/64 — अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नूर सुनें, अन-नूर अनुवाद, अन-नूर mp3, अन-नूर pdf. आयत 26–30. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए