Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَغُضُّوا: अपनी आँखों को नीचा रखें, नज़रें झुकाएँ।
- أَبْصَارِهِمْ: अपनी आँखों को।
- فُرُوجَهُمْ: अपनी शर्मगाहों (गुप्त अंगों) की रक्षा करें।
- أَزْكَى: अधिक पवित्र, अधिक शुद्ध और बेहतर।
- خَبِيرٌ: पूरी तरह जानने वाला, हर चीज़ से अवगत।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप मोमिनों (ईमानवालों) से कह दें कि वे अपनी नज़रें झुकाए रखें, यानी जिन चीज़ों को देखना इस्लाम में जायज़ नहीं है—जैसे गैर-महरम (निकट संबंधी न होने वाली) महिलाओं की ओर देखना, दूसरों के गुप्त अंगों की ओर देखना, या किसी भी ऐसी चीज़ को देखना जो अल्लाह ने हराम किया है—उनसे अपनी आँखों को बचाएँ। और साथ ही, वे अपनी शर्मगाहों की भी रक्षा करें, यानी ज़िना (व्यभिचार), लिवात (समलैंगिक कृत्य), और गुप्त अंगों को खोलकर दिखाने जैसे सभी निषिद्ध कार्यों से दूर रहें।
यह आदेश केवल एक सामाजिक शिष्टाचार नहीं है, बल्कि यह दिल की पवित्रता और आत्मा की शुद्धि का ज़रिया है। जब इंसान अपनी नज़र को नियंत्रित करता है और अपनी शारीरिक इच्छाओं पर लगाम लगाता है, तो उसका दिल पापों के मैल से साफ़ रहता है, उसकी सोच शुद्ध रहती है, और उसका समाज पवित्र और सुरक्षित बनता है। यही वजह है कि अल्लाह ने फ़रमाया कि यह (नज़र झुकाना और शर्मगाह की रक्षा करना) उनके लिए अधिक पवित्र और बेहतर है।
इसके बाद अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वह हर उस चीज़ से पूरी तरह वाक़िफ़ है जो लोग करते हैं। उससे कोई भी बात छिपी नहीं है—न आँखों की चोरी-छिपे नज़रें, न दिल के इरादे, न शरीर के कोई क्रियाकलाप। वह सब कुछ देखता और जानता है, और हर किसी को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा।
यह आयत हमें सिखाती है कि एक मोमिन की पहचान उसकी पवित्रता और संयम से होती है। जो व्यक्ति अपनी नज़र और अपने शरीर को हराम से बचाता है, वह अल्लाह के करीब होता है और उसकी ज़िंदगी में बरकत आती है। यह आदेश हमारे लिए एक ढाल है जो हमें दुनिया की बुराइयों और फितनों से बचाती है, और हमें उस पाक और साफ़ ज़िंदगी की ओर ले जाती है जो अल्लाह को पसंद है। आइए, हम इस आदेश पर अमल करें और अपने दिलों को गुनाहों से पाक रखें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।
📜 आयत 28-32 — सूरा अन-नूर
अनुवाद — अन-नूर 30
सूरा अन-नूर आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) ईमानदारों से कह दो कि अपनी नज़रों को…सूरा आयत 30/64 — सूरा अन-नूर النور (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नूर सुनें, सूरा अन-नूर अनुवाद, सूरा अन-नूर mp3, सूरा अन-नूर pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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