अश-शूरा · 2/53
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शूरा
عسق ۝٢
Ayyyn Seeen Qaaaf
📖 हिंदी अर्थ
ऐन सीन काफ़

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

इस आयत में कोई ऐसा शब्द नहीं है जिसे स्पष्टीकरण की आवश्यकता हो, क्योंकि "عسق" (अ़ैन-सीन-क़ाफ़) हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत (अलग-अलग अक्षर) में से है, जिनके अर्थ केवल अल्लाह ही जानता है।

तफ़सीर:

यह आयत "हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत" (अलग-अलग अक्षरों) में से है, जो कुरआन की कई सूरहों की शुरुआत में आते हैं। ये अक्षर उन रहस्यों में से हैं जिनका ज्ञान केवल अल्लाह तआला को है। इन अक्षरों का ज़िक्र कुरआन की अज़मत और उसके मु'जिज़ा (चमत्कार) को बयान करने के लिए किया गया है। जिस तरह ये अक्षर आपस में मिलकर अरबी भाषा के शब्द और वाक्य बनाते हैं, उसी तरह इन्हीं अक्षरों से अल्लाह ने कुरआन जैसी अज़ीम किताब नाज़िल की, जिसे पढ़ने और समझने वालों के लिए हिदायत और रहमत है।

यह बात ध्यान देने योग्य है कि इन हुरूफ़ का ज़िक्र कुरआन की फ़साहत (स्पष्टता) और बलाग़त (वाक्पटुता) की दलील है। अरब के लोग, जो अपनी भाषा में महारत रखते थे, वे भी ऐसी किताब पेश करने से असमर्थ रहे। यह इस बात का सबूत है कि कुरआन अल्लाह की किताब है, किसी इंसान का कलाम नहीं।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! ये अक्षर हमें याद दिलाते हैं कि कुरआन एक ऐसी किताब है जो अल्लाह की तरफ से नाज़िल हुई है। जिसने इसे पकड़ा, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। ये अक्षर हमें बताते हैं कि अल्लाह का कलाम कितना ऊँचा और अज़ीम है। हमें चाहिए कि हम कुरआन को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें। कुरआन ही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह तआला हम सबको कुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 1-4 — सूरा अश-शूरा

1حم
हा मीम
2عسق
ऐन सीन काफ़
3كَذَٰلِكَ يُوحِي إِلَيْكَ وَإِلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِكَ اللَّهُ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
(ऐ रसूल) ग़ालिब व दाना ख़ुदा तुम्हारी तरफ़ और जो (पैग़म्बर) तुमसे पहले गुज़रे उनकी तरफ यूँ ही वही भेजता रहता है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है ग़रज़ सब कुछ उसी का है
4لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ
और वह तो (बड़ा) आलीशान (और) बुर्ज़ुग है
अश-शूराकुरान सूची
53आयत
मक्कीअवतरण स्थान
2आयत

अनुवाद — अश-शूरा 2

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Wednesday, September 30, 2026

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