अश-शूरा · 3/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
كَذَٰلِكَ يُوحِي إِلَيْكَ وَإِلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِكَ اللَّهُ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ۝٣
Kazaalika yooheee ilaika wa ilal lazeena min qablikal laahul `Azeezul Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) ग़ालिब व दाना ख़ुदा तुम्हारी तरफ़ और जो (पैग़म्बर) तुमसे पहले गुज़रे उनकी तरफ यूँ ही वही भेजता रहता है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है ग़रज़ सब कुछ उसी का है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَٰلِكَ: इसी प्रकार, इसी तरह
  • يُوحِي: वह प्रकाशना (वह्य) भेजता है
  • الْعَزِيزُ: सब पर प्रभुत्व रखने वाला, अत्यंत शक्तिशाली, जो अपने दुश्मनों से बदला लेने में सक्षम है
  • الْحَكِيمُ: सर्व बुद्धिमान, जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और युक्ति से कार्य करता है

तफ़सीर (व्याख्या):

हे प्यारे नबी (ﷺ)! जिस प्रकार यह पवित्र क़ुरआन आप पर उतारा जा रहा है, ठीक उसी प्रकार अल्लाह तआला ने आपसे पहले आने वाले सभी नबियों और रसूलों पर भी अपनी किताबें और सहीफ़े (पवित्र पन्ने) उतारे थे। यह कोई नई बात नहीं है कि अल्लाह अपने चुने हुए बंदों पर अपना संदेश भेजता है, बल्कि यह उसकी सदैव से चली आ रही सुन्नत (रीति) है।

यह वही अल्लाह है जो अज़ीज़ है—अर्थात वह सर्वशक्तिमान है, अपने दुश्मनों पर पूरी तरह हावी है और उनसे बदला लेने में कोई उसे रोक नहीं सकता। और वह हकीम है—अर्थात वह हर काम में पूर्ण ज्ञान और बुद्धिमत्ता से काम करता है, उसकी हर बात, हर फ़ैसला और हर कार्य गहरी हिकमत (बुद्धिमत्ता) पर आधारित है।

यह आयत हमें सिखाती है कि वह्य (प्रकाशना) का सिलसिला कोई नया नहीं है, बल्कि यह उसी एक अल्लाह की ओर से है जिसने आदम (अलैहिस्सलाम) से लेकर मुहम्मद (ﷺ) तक सभी नबियों पर अपना मार्गदर्शन भेजा। यह एकता इस बात की गवाह है कि सभी नबियों का संदेश एक ही स्रोत से आया है—और वह स्रोत है अल्लाह, जो सबसे शक्तिशाली और सबसे बुद्धिमान है।

इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि हमारा दीन (धर्म) कोई नई उपज नहीं है, बल्कि यह उसी सच्चे मार्ग की निरंतरता है जिस पर सभी नबी चले। और यह भी यक़ीन दिलाती है कि जिस अल्लाह ने यह क़ुरआन उतारा है, वही सब कुछ कर सकता है—वह अपने दीन की मदद करने पर पूरी तरह क़ादिर (सक्षम) है।

आओ, हम इस आयत से यह सबक लें कि जिस तरह अल्लाह ने अपने नबियों पर वह्य भेजकर उन्हें सम्मानित किया, उसी तरह हमें भी उसकी भेजी हुई इस किताब को पढ़ना, समझना और उस पर अमल करके अपने जीवन को सफल बनाना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 1-5 — अश-शूरा

1حم
हा मीम
2عسق
ऐन सीन काफ़
3كَذَٰلِكَ يُوحِي إِلَيْكَ وَإِلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِكَ اللَّهُ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
(ऐ रसूल) ग़ालिब व दाना ख़ुदा तुम्हारी तरफ़ और जो (पैग़म्बर) तुमसे पहले गुज़रे उनकी तरफ यूँ ही वही भेजता रहता है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है ग़रज़ सब कुछ उसी का है
4لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ
और वह तो (बड़ा) आलीशान (और) बुर्ज़ुग है
5تَكَادُ السَّمَاوَاتُ يَتَفَطَّرْنَ مِن فَوْقِهِنَّ ۚ وَالْمَلَائِكَةُ يُسَبِّحُونَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْ وَيَسْتَغْفِرُونَ لِمَن فِي الْأَرْضِ ۗ أَلَا إِنَّ اللَّهَ هُوَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
(उनकी बातों से) क़रीब है कि सारे आसमान (उसकी हैबत के मारे) अपने ऊपर वार से फट पड़े और फ़रिश्ते तो अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करते हैं और जो लोग ज़मीन में हैं उनके लिए (गुनाहों की) माफी माँगा करते हैं सुन रखो कि ख़ुदा ही यक़ीनन बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — अश-शूरा 3

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Tuesday, August 18, 2026

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