अश-शूरा · 1/53
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शूरा
حم ۝١
Haa Meeem
📖 हिंदी अर्थ
हा मीम

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

इस आयत में "حم" अरबी भाषा के हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत (अलग-अलग अक्षर) हैं, जिनका सामान्य अर्थ नहीं होता। ये अक्षर क़ुरआन की कई सूरतों की शुरुआत में आते हैं, जैसे सूरह बक़रह की शुरुआत में "अलिफ़ लाम मीम" आया है। इन अक्षरों का असली ज्ञान केवल अल्लाह तआला को है, और ये क़ुरआन की अज़मत और उसके मु'जिज़ा (चमत्कार) की निशानी हैं।

तफ़सीर:

यह आयत सूरह अश-शूरा की शुरुआत है, जिसमें अल्लाह तआला ने "حم" जैसे हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत से इरशाद फ़रमाया है। इन अक्षरों का ज़िक्र क़ुरआन में इसलिए किया गया है ताकि ये साबित हो सके कि यह किताब उसी अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल हुई है, जिसने ये अक्षर बनाए हैं। ये अक्षर अरबी भाषा के वही अक्षर हैं जिनसे अरब लोग बोलते और लिखते हैं, फिर भी वे इस क़ुरआन जैसी किताब पेश नहीं कर सके। यह क़ुरआन के अज़ीम मु'जिज़े की दलील है।

इन हुरूफ़-ए-मुक़त्तआत के पीछे हिकमत (बुद्धिमत्ता) यह है कि अल्लाह तआला इनके ज़रिए बंदों का ध्यान क़ुरआन की तरफ़ खींचता है, ताकि वे ग़ौर-ओ-फ़िक्र करें और समझें कि यह किताब इंसानी कलाम नहीं, बल्कि ख़ालिक़-ए-कायनात का कलाम है। जब कोई इंसान इन अक्षरों को सुनता है, तो उसका दिल क़ुरआन की तिलावत की तरफ़ माइल होता है और वह सोचता है कि आख़िर यह क्या चीज़ है।

यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन हमारे लिए हिदायत और रहमत है। हमें चाहिए कि हम इसे पढ़ें, समझें और इस पर अमल करें। जो लोग क़ुरआन को पढ़ते और समझते हैं, अल्लाह तआला उन्हें दुनिया और आख़िरत में कामयाबी अता फ़रमाता है। यह किताब हमारे लिए रौशनी है, जो अंधेरों से निकालकर सीधे रास्ते पर चलाती है। हमें चाहिए कि हम इसकी तिलावत को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएं और इसके पैग़ाम को दूसरों तक पहुँचाएं, ताकि पूरी इंसानियत इससे फ़ायदा उठा सके।



📜 आयत 1-3 — सूरा अश-शूरा

1حم
हा मीम
2عسق
ऐन सीन काफ़
3كَذَٰلِكَ يُوحِي إِلَيْكَ وَإِلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِكَ اللَّهُ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
(ऐ रसूल) ग़ालिब व दाना ख़ुदा तुम्हारी तरफ़ और जो (पैग़म्बर) तुमसे पहले गुज़रे उनकी तरफ यूँ ही वही भेजता रहता है जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है ग़रज़ सब कुछ उसी का है
अश-शूराकुरान सूची
53आयत
मक्कीअवतरण स्थान
1आयत

अनुवाद — अश-शूरा 1

सूरा अश-शूरा आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हा मीम

सूरा आयत 1/53 — सूरा अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अश-शूरा सुनें, सूरा अश-शूरा अनुवाद, सूरा अश-शूरा mp3, सूरा अश-शूरा pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.





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Saturday, October 3, 2026

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