अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أُوحِيَ – प्रकाशित किया गया / संदेश भेजा गया
- نَفَرٌ – एक समूह / कुछ लोग (तीन से दस के बीच की संख्या)
- الْجِنِّ – जिन्न (ऐसी मख़्लूक़ जो आँखों से दिखाई नहीं देती, आग से पैदा की गई)
- عَجَبًا – अद्भुत / हैरतअंगेज़ / बहुत ही अनोखा
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप अपनी उम्मत से कहिए कि अल्लाह ने मेरी ओर यह वही (प्रकाशना) भेजी है कि जिन्नों के एक समूह ने (जब मैं क़ुरआन की तिलावत कर रहा था) मेरी क़िरात को ध्यान से सुना। यह घटना उस समय की है जब नबी ﷺ ताइफ़ से लौटते हुए नख़ला नामक स्थान पर पहुँचे और वहाँ फ़ज्र की नमाज़ में क़ुरआन पढ़ रहे थे। जिन्नों के उस समूह ने जब यह क़ुरआन सुना तो वे इसकी फ़साहत (स्पष्टता), बलाग़त (वाक्पटुता), और इसके अद्भुत अंदाज़ से बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने महसूस किया कि यह कोई साधारण कलाम नहीं, बल्कि एक अद्भुत और हैरतअंगेज़ किताब है जो हक़ (सत्य) और हिदायत (मार्गदर्शन) की ओर बुलाती है।
फिर जब वे अपनी क़ौम (समुदाय) के पास लौटे तो उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "हमने एक अजीब और अनोखा क़ुरआन सुना है!" उनका यह कहना इसलिए था कि उन्होंने इस कलाम की बुलंदी, उसके हिकमत भरे अहकाम (आदेश), और उसकी सच्ची ख़बरों को देखा और समझा। यह क़ुरआन अपने बयान में इतना मुअस्सिर (प्रभावशाली) था कि उनके दिल तुरंत इसकी ओर खिंच गए और उन्होंने इसे सच्चा मान लिया।
यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन का असर सिर्फ़ इंसानों पर ही नहीं, बल्कि जिन्नों पर भी पड़ता है। जिन्नों ने भी इस किताब की अज़मत (महानता) को पहचाना और उसे क़बूल किया। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि जब जिन्नात जैसी मख़्लूक़ क़ुरआन से प्रभावित होकर ईमान ले आई, तो हम इंसानों को तो और भी बढ़-चढ़कर इस किताब को पढ़ना, समझना और उस पर अमल करना चाहिए। क़ुरआन वाकई एक अद्भुत किताब है — जितना इसे पढ़ा जाए, उतने ही नए रहस्य और हिक्मतें खुलती हैं। यह हर ज़माने और हर इंसान के लिए हिदायत का ज़रिया है। अल्लाह ने इस किताब को ऐसा बनाया है कि यह दिलों को रौशनी देती है, ज़िंदगी को सही राह दिखाती है, और इंसान को दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाती है।
इस आयत से हमें यह भी सीख मिलती है कि हमें क़ुरआन को ग़ौर और ख़ुशू के साथ सुनना चाहिए, क्योंकि जिन्नों ने भी इसे ध्यान से सुना और फिर ईमान ले आए। अगर हम भी इसे सच्चे दिल से सुनें और समझें, तो हमारे दिल भी इसकी रौशनी से मुनव्वर हो सकते हैं। यह किताब हर उस शख्स के लिए रहमत है जो इसे पकड़ लेता है। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने, उस पर अमल करने और उसे दूसरों तक पहुँचाने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 1-3 — अल-जिन्न
अनुवाद — अल-जिन्न 1
सूरा अल-जिन्न आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल लोगों से) कह दो कि मेरे पास 'वही'…सूरा आयत 1/28 — अल-जिन्न الجن (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-जिन्न सुनें, अल-जिन्न अनुवाद, अल-जिन्न mp3, अल-जिन्न pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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