अत-तौबा · 68/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
وَعَدَ اللَّهُ الْمُنَافِقِينَ وَالْمُنَافِقَاتِ وَالْكُفَّارَ نَارَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ هِيَ حَسْبُهُمْ ۚ وَلَعَنَهُمُ اللَّهُ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ مُّقِيمٌ ۝٦٨
Wa`adal laahul munafiqeena wal munaafiqaati wal kuffaara naara jahannnamma khaalideena feehaa; hiya hasbuhum; wa la`annahumul laahu wa lahum `azaabum muqeem
📖 हिंदी अर्थ
मुनाफिक़ मर्द और मुनाफिक़ औरतें और काफिरों से ख़ुदा ने जहन्नुम की आग का वायदा तो कर लिया है कि ये लोग हमेशा उसी में रहेगें और यही उन के लिए काफ़ी है और ख़ुदा ने उन पर लानत की है और उन्हीं के लिए दाइमी (हमेशा रहने वाला) अज़ाब है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَالِدِينَ فِيهَا: उसमें हमेशा रहने वाले।
  • هِيَ حَسْبُهُمْ: वह (आग) उनके लिए काफी है, यानी उसके अलावा किसी और सज़ा की ज़रूरत नहीं।
  • وَلَعَنَهُمُ اللهُ: अल्लाह ने उन्हें अपनी रहमत से दूर कर दिया।
  • عَذَابٌ مُّقِيمٌ: ऐसा अज़ाब जो कभी खत्म न हो, हमेशा कायम रहने वाला।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने वादे के तौर पर मुनाफिक़ीन (दिखावटी मुसलमानों) और मुनाफिक़ात (दिखावटी मुसलमान औरतों) तथा काफिरों (जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल को नकारा) के लिए जहन्नम की आग तैयार कर रखी है। वे उसमें हमेशा-हमेशा के लिए रहेंगे, और यही आग उनके लिए काफी है—यानी उन्हें इससे बड़ी कोई सज़ा नहीं मिल सकती। अल्लाह ने उन्हें अपनी रहमत से महरूम कर दिया है, और उनके लिए एक ऐसा अज़ाब है जो कभी खत्म नहीं होगा और न ही उसमें कोई कमी आएगी। यह सज़ा उनके कुफ्र और मुनाफिक़ी (धोखे) का बिल्कुल उचित बदला है, क्योंकि उन्होंने दुनिया में अल्लाह से धोखा किया और उसके दीन को कमज़ोर करने की कोशिश की।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह का वादा और उसकी धमकी दोनों सच हैं—जैसे वह मोमिनों को जन्नत का वादा करता है, वैसे ही मुनाफिक़ों और काफिरों को जहन्नम की धमकी देता है। यह अल्लाह की अदालत का एक हिस्सा है।
  2. मुनाफिक़ी (दिखावा) सबसे बड़ा गुनाह है, क्योंकि यह अंदर से कुफ्र और बाहर से ईमान का दावा है। यह काफिरों से भी बदतर है, इसलिए अल्लाह ने उन्हें साफ़ तौर पर काफिरों के साथ जहन्नम की सज़ा दी।
  3. यह आयत हमें सच्चाई और ईमानदारी की तरफ बुलाती है—हमें अपने दिल और ज़ुबान को एक जैसा रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह छुपे हुए हाल को भी जानता है।
  4. अल्लाह की रहमत से दूर होना (लानत) सबसे बड़ी मुसीबत है, और यह उन लोगों का हिस्सा है जो हक़ को जानते हुए भी उसका इनकार करते हैं या उससे मुँह मोड़ते हैं।
  5. यह आयत हमें अल्लाह के दीन पर साबित क़दम रहने की तरग़ीब देती है—कि हम अपने ईमान को अमल के साथ मज़बूत करें, और किसी भी हालत में मुनाफिक़ी या कुफ्र की तरफ न बढ़ें, ताकि हम उस अज़ाब से बच सकें जो कभी खत्म नहीं होता।
🎧 सुनें

📜 आयत 66-70 — अत-तौबा

66لَا تَعْتَذِرُوا قَدْ كَفَرْتُم بَعْدَ إِيمَانِكُمْ ۚ إِن نَّعْفُ عَن طَائِفَةٍ مِّنكُمْ نُعَذِّبْ طَائِفَةً بِأَنَّهُمْ كَانُوا مُجْرِمِينَ
अब बातें न बनाओं हक़ तो ये हैं कि तुम ईमान लाने के बाद काफ़िर हो बैठे अगर हम तुममें से कुछ लोगों से दरगुज़र भी करें तो हम कुछ लोगों को सज़ा ज़रूर देगें इस वजह से कि ये लोग कुसूरवार ज़रूर हैं
67الْمُنَافِقُونَ وَالْمُنَافِقَاتُ بَعْضُهُم مِّن بَعْضٍ ۚ يَأْمُرُونَ بِالْمُنكَرِ وَيَنْهَوْنَ عَنِ الْمَعْرُوفِ وَيَقْبِضُونَ أَيْدِيَهُمْ ۚ نَسُوا اللَّهَ فَنَسِيَهُمْ ۗ إِنَّ الْمُنَافِقِينَ هُمُ الْفَاسِقُونَ
मुनाफिक़ मर्द और मुनाफिक़ औरतें एक दूसरे के बाहम जिन्स हैं कि (लोगों को) बुरे काम का तो हुक्म करते हैं और नेक कामों से रोकते हैं और अपने हाथ (राहे ख़ुदा में ख़र्च करने से) बन्द रखते हैं (सच तो यह है कि) ये लोग ख़ुदा को भूल बैठे तो ख़ुदा ने भी (गोया) उन्हें भुला दिया बेशक मुनाफ़िक़ बदचलन है
68وَعَدَ اللَّهُ الْمُنَافِقِينَ وَالْمُنَافِقَاتِ وَالْكُفَّارَ نَارَ جَهَنَّمَ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ هِيَ حَسْبُهُمْ ۚ وَلَعَنَهُمُ اللَّهُ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ مُّقِيمٌ
मुनाफिक़ मर्द और मुनाफिक़ औरतें और काफिरों से ख़ुदा ने जहन्नुम की आग का वायदा तो कर लिया है कि ये लोग हमेशा उसी में रहेगें और यही उन के लिए काफ़ी है और ख़ुदा ने उन पर लानत की है और उन्हीं के लिए दाइमी (हमेशा रहने वाला) अज़ाब है
69كَالَّذِينَ مِن قَبْلِكُمْ كَانُوا أَشَدَّ مِنكُمْ قُوَّةً وَأَكْثَرَ أَمْوَالًا وَأَوْلَادًا فَاسْتَمْتَعُوا بِخَلَاقِهِمْ فَاسْتَمْتَعْتُم بِخَلَاقِكُمْ كَمَا اسْتَمْتَعَ الَّذِينَ مِن قَبْلِكُم بِخَلَاقِهِمْ وَخُضْتُمْ كَالَّذِي خَاضُوا ۚ أُولَٰئِكَ حَبِطَتْ أَعْمَالُهُمْ فِي الدُّنْيَا وَالْآخِرَةِ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
(मुनाफिक़ो तुम्हारी तो) उनकी मसल है जो तुमसे पहले थे वह लोग तुमसे कूवत में (भी) ज्यादा थे और औलाद में (भी) कही बढ़ कर तो वह अपने हिस्से से भी फ़ायदा उठा हो चुके तो जिस तरह तुम से पहले लोग अपने हिस्से से फायदा उठा चुके हैं इसी तरह तुम ने अपने हिस्से से फायदा उठा लिया और जिस तरह वह बातिल में घुसे रहे उसी तरह तुम भी घुसे रहे ये वह लोग हैं जिन का सब किया धरा दुनिया और आख़िरत (दोनों) में अकारत हुआ और यही लोग घाटे में हैं
70أَلَمْ يَأْتِهِمْ نَبَأُ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ قَوْمِ نُوحٍ وَعَادٍ وَثَمُودَ وَقَوْمِ إِبْرَاهِيمَ وَأَصْحَابِ مَدْيَنَ وَالْمُؤْتَفِكَاتِ ۚ أَتَتْهُمْ رُسُلُهُم بِالْبَيِّنَاتِ ۖ فَمَا كَانَ اللَّهُ لِيَظْلِمَهُمْ وَلَٰكِن كَانُوا أَنفُسَهُمْ يَظْلِمُونَ
क्या इन मुनाफिक़ों को उन लोगों की ख़बर नहीं पहुँची है जो उनसे पहले हो गुज़रे हैं नूह की क़ौम और आद और समूद और इबराहीम की क़ौम और मदियन वाले और उलटी हुई बस्तियों के रहने वाले कि उनके पास उनके रसूल वाजेए (और रौशन) मौजिज़े लेकर आए तो (वह मुब्तिलाए अज़ाब हुए) और ख़ुदा ने उन पर जुल्म नहीं किया मगर ये लोग ख़ुद अपने ऊपर जुल्म करते थे
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अनुवाद — अत-तौबा 68

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Tuesday, August 18, 2026

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