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सूरा अस-साफ्फात
bismillah
وَٱلصَّٰٓفَّٰتِ صَفًّا  ۝١ فَٱلزَّٰجِرَٰتِ زَجۡرًا  ۝٢ فَٱلتَّٰلِيَٰتِ ذِكۡرًا  ۝٣ إِنَّ إِلَٰهَكُمۡ لَوَٰحِدٌ  ۝٤ رَّبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا بَيۡنَهُمَا وَرَبُّ ٱلۡمَشَٰرِقِ  ۝٥ إِنَّا زَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنۡيَا بِزِينَةٍ ٱلۡكَوَاكِبِ  ۝٦ وَحِفۡظًا مِّن كُلِّ شَيۡطَٰنٍ مَّارِدٍ  ۝٧ لَّا يَسَّمَّعُونَ إِلَى ٱلۡمَلَإِ ٱلۡأَعۡلَىٰ وَيُقۡذَفُونَ مِن كُلِّ جَانِبٍ  ۝٨ دُحُورًاۖ وَلَهُمۡ عَذَابٌ وَاصِبٌ  ۝٩ إِلَّا مَنۡ خَطِفَ ٱلۡخَطۡفَةَ فَأَتۡبَعَهُۥ شِهَابٌ ثَاقِبٌ  ۝١٠ فَٱسۡتَفۡتِهِمۡ أَهُمۡ أَشَدُّ خَلۡقًا أَم مَّنۡ خَلَقۡنَآۚ إِنَّا خَلَقۡنَٰهُم مِّن طِينٍ لَّازِبِۭ  ۝١١ بَلۡ عَجِبۡتَ وَيَسۡخَرُونَ  ۝١٢ وَإِذَا ذُكِّرُواْ لَا يَذۡكُرُونَ  ۝١٣ وَإِذَا رَأَوۡاْ ءَايَةً يَسۡتَسۡخِرُونَ  ۝١٤ وَقَالُوٓاْ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّا سِحۡرٌ مُّبِينٌ  ۝١٥ أَءِذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَبۡعُوثُونَ  ۝١٦ أَوَءَابَآؤُنَا ٱلۡأَوَّلُونَ  ۝١٧ قُلۡ نَعَمۡ وَأَنتُمۡ دَٰخِرُونَ  ۝١٨ فَإِنَّمَا هِيَ زَجۡرَةٌ وَٰحِدَةٌ فَإِذَا هُمۡ يَنظُرُونَ  ۝١٩ وَقَالُواْ يَٰوَيۡلَنَا هَٰذَا يَوۡمُ ٱلدِّينِ  ۝٢٠ هَٰذَا يَوۡمُ ٱلۡفَصۡلِ ٱلَّذِي كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ  ۝٢١ ۞ ٱحۡشُرُواْ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ وَأَزۡوَٰجَهُمۡ وَمَا كَانُواْ يَعۡبُدُونَ  ۝٢٢ مِن دُونِ ٱللَّهِ فَٱهۡدُوهُمۡ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلۡجَحِيمِ  ۝٢٣ وَقِفُوهُمۡۖ إِنَّهُم مَّسۡـُٔولُونَ  ۝٢٤
सूरा अस-साफ्फात
bismillah
37:1
وَٱلصَّٰٓفَّٰتِ صَفًّا  ۝١
(इबादत या जिहाद में) पर बाँधने वालों की (क़सम)
37:2
فَٱلزَّٰجِرَٰتِ زَجۡرًا  ۝٢
फिर (बदों को बुराई से) झिड़क कर डाँटने वाले की (क़सम)
37:3
فَٱلتَّٰلِيَٰتِ ذِكۡرًا  ۝٣
फिर कुरान पढ़ने वालों की क़सम है
37:4
إِنَّ إِلَٰهَكُمۡ لَوَٰحِدٌ  ۝٤
तुम्हारा माबूद (यक़ीनी) एक ही है
37:5
رَّبُّ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضِ وَمَا بَيۡنَهُمَا وَرَبُّ ٱلۡمَشَٰرِقِ  ۝٥
जो सारे आसमान ज़मीन का और जो कुछ इन दोनों के दरमियान है (सबका) परवरदिगार है
37:6
إِنَّا زَيَّنَّا ٱلسَّمَآءَ ٱلدُّنۡيَا بِزِينَةٍ ٱلۡكَوَاكِبِ  ۝٦
और (चाँद सूरज तारे के) तुलूउ व (गुरूब) के मक़ामात का भी मालिक है हम ही ने नीचे वाले आसमान को तारों की आरइश (जगमगाहट) से आरास्ता किया
37:7
وَحِفۡظًا مِّن كُلِّ شَيۡطَٰنٍ مَّارِدٍ  ۝٧
और (तारों को) हर सरकश शैतान से हिफ़ाज़त के वास्ते (भी पैदा किया)
37:8
لَّا يَسَّمَّعُونَ إِلَى ٱلۡمَلَإِ ٱلۡأَعۡلَىٰ وَيُقۡذَفُونَ مِن كُلِّ جَانِبٍ  ۝٨
कि अब शैतान आलमे बाला की तरफ़ कान भी नहीं लगा सकते और (जहाँ सुन गुन लेना चाहा तो) हर तरफ़ से खदेड़ने के लिए शहाब फेके जाते हैं
37:9
دُحُورًاۖ وَلَهُمۡ عَذَابٌ وَاصِبٌ  ۝٩
और उनके लिए पाएदार अज़ाब है
37:10
إِلَّا مَنۡ خَطِفَ ٱلۡخَطۡفَةَ فَأَتۡبَعَهُۥ شِهَابٌ ثَاقِبٌ  ۝١٠
मगर जो (शैतान शाज़ व नादिर फरिश्तों की) कोई बात उचक ले भागता है तो आग का दहकता हुआ तीर उसका पीछा करता है
37:11
فَٱسۡتَفۡتِهِمۡ أَهُمۡ أَشَدُّ خَلۡقًا أَم مَّنۡ خَلَقۡنَآۚ إِنَّا خَلَقۡنَٰهُم مِّن طِينٍ لَّازِبِۭ  ۝١١
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि उनका पैदा करना ज्यादा दुश्वार है या उन (मज़कूरा) चीज़ों का जिनको हमने पैदा किया हमने तो उन लोगों को लसदार मिट्टी से पैदा किया
37:12
بَلۡ عَجِبۡتَ وَيَسۡخَرُونَ  ۝١٢
बल्कि तुम (उन कुफ्फ़ार के इन्कार पर) ताज्जुब करते हो और वह लोग (तुमसे) मसख़रापन करते हैं
37:13
وَإِذَا ذُكِّرُواْ لَا يَذۡكُرُونَ  ۝١٣
और जब उन्हें समझाया जाता है तो समझते नहीं हैं
37:14
وَإِذَا رَأَوۡاْ ءَايَةً يَسۡتَسۡخِرُونَ  ۝١٤
और जब किसी मौजिजे क़ो देखते हैं तो (उससे) मसख़रापन करते हैं
37:15
وَقَالُوٓاْ إِنۡ هَٰذَآ إِلَّا سِحۡرٌ مُّبِينٌ  ۝١٥
और कहते हैं कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
37:16
أَءِذَا مِتۡنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَٰمًا أَءِنَّا لَمَبۡعُوثُونَ  ۝١٦
भला जब हम मर जाएँगे और ख़ाक और हड्डियाँ रह जाएँगे
37:17
أَوَءَابَآؤُنَا ٱلۡأَوَّلُونَ  ۝١٧
तो क्या हम या हमारे अगले बाप दादा फिर दोबारा क़ब्रों से उठा खड़े किए जाँएगे
37:18
قُلۡ نَعَمۡ وَأَنتُمۡ دَٰخِرُونَ  ۝١٨
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ (ज़रूर उठाए जाओगे)
37:19
فَإِنَّمَا هِيَ زَجۡرَةٌ وَٰحِدَةٌ فَإِذَا هُمۡ يَنظُرُونَ  ۝١٩
और तुम ज़लील होगे और वह (क़यामत) तो एक ललकार होगी फिर तो वह लोग फ़ौरन ही (ऑंखे फाड़-फाड़ के) देखने लगेंगे
37:20
وَقَالُواْ يَٰوَيۡلَنَا هَٰذَا يَوۡمُ ٱلدِّينِ  ۝٢٠
और कहेंगे हाए अफसोस ये तो क़यामत का दिन है
37:21
هَٰذَا يَوۡمُ ٱلۡفَصۡلِ ٱلَّذِي كُنتُم بِهِۦ تُكَذِّبُونَ  ۝٢١
(जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे
37:22
۞ ٱحۡشُرُواْ ٱلَّذِينَ ظَلَمُواْ وَأَزۡوَٰجَهُمۡ وَمَا كَانُواْ يَعۡبُدُونَ  ۝٢٢
(और फ़रिश्तों को हुक्म होगा कि) जो लोग (दुनिया में) सरकशी करते थे उनको और उनके साथियों को और खुदा को छोड़कर जिनकी परसतिश करते हैं
37:23
مِن دُونِ ٱللَّهِ فَٱهۡدُوهُمۡ إِلَىٰ صِرَٰطِ ٱلۡجَحِيمِ  ۝٢٣
उनको (सबको) इकट्ठा करो फिर उन्हें जहन्नुम की राह दिखाओ
37:24
وَقِفُوهُمۡۖ إِنَّهُم مَّسۡـُٔولُونَ  ۝٢٤
और (हाँ ज़रा) उन्हें ठहराओ तो उनसे कुछ पूछना है


📚Juz 23 📄446 / 604



Mishary Rashid Alafasy
Mahmoud Khalil Al-Husary
Abdurrahman As-Sudais
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
Abdul Basit Abdul Samad
Ali Al-Hudhaify
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
Abu Bakr Ash-Shaatree
Muhammad Ayyoub
Abdullah Basfar
Abdullah Al-Juhani
Maher Al Muaiqly
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पवित्र क़ुरआन


Friday, August 28, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए