अस-साफ्फात · 23/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
مِن دُونِ اللَّهِ فَاهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَاطِ الْجَحِيمِ ۝٢٣
Min doonil laahi fahdoohum ilaa siraatil Jaheem
📖 हिंदी अर्थ
उनको (सबको) इकट्ठा करो फिर उन्हें जहन्नुम की राह दिखाओ

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مِن دُونِ اللهِ: अल्लाह को छोड़कर जिनकी वे पूजा करते थे (जैसे मूर्तियाँ और झूठे देवता)।
  • فَاهْدُوهُمْ: उन्हें रास्ता दिखाओ, उन्हें ले चलो।
  • إِلَى صِرَاطِ الْجَحِيمِ: नरक के रास्ते की ओर।

तफ़सीर (व्याख्या):

क़यामत के दिन अल्लाह तआला फ़रिश्तों को हुक्म देंगे कि वे उन काफ़िरों को, जिन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क किया, और उनके साथियों को, और उन मूर्तियों और झूठे माबूदों को, जिन्हें वे अल्लाह को छोड़कर पूजते थे, सबको इकट्ठा करें। फिर उन्हें बुरी तरह धकेलते हुए, उन्हें नरक के रास्ते की ओर ले जाएँ। यह उनका अंतिम ठिकाना है, और यही उनके शिर्क और कुफ़्र का नतीजा है।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के सिवा किसी और की इबादत करना कितना बड़ा ज़ुल्म है। जो लोग दुनिया में अल्लाह के रास्ते से भटके, उन्हें आख़िरत में जबरन नरक के रास्ते पर ले जाया जाएगा। यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी चेतावनी है जो अल्लाह के सिवा दूसरों को पुकारते हैं, चाहे वे मूर्तियाँ हों, पीर-मुर्शिद हों, या दुनिया के झूठे ख़ुदा।

लेकिन अल्लाह रहीम और करीम है। उसने हमें दुनिया में रहते हुए सच्चा रास्ता दिखाने के लिए क़ुरआन और रसूल भेजे। जो कोई इस रास्ते पर चल ले, वह नरक के रास्ते से बच जाता है और जन्नत की ओर ले जाया जाता है। यह आयत हमें सचेत करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में सिर्फ़ अल्लाह की इबादत करें, उसी से मदद माँगें, और उसी के बताए हुए रास्ते पर चलें। यही सबसे बड़ी कामयाबी है, और यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत तक पहुँचाता है।



📜 आयत 21-25 — सूरा अस-साफ्फात

21هَٰذَا يَوْمُ الْفَصْلِ الَّذِي كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ
(जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे
22۞ احْشُرُوا الَّذِينَ ظَلَمُوا وَأَزْوَاجَهُمْ وَمَا كَانُوا يَعْبُدُونَ
(और फ़रिश्तों को हुक्म होगा कि) जो लोग (दुनिया में) सरकशी करते थे उनको और उनके साथियों को और खुदा को छोड़कर जिनकी परसतिश करते हैं
23مِن دُونِ اللَّهِ فَاهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَاطِ الْجَحِيمِ
उनको (सबको) इकट्ठा करो फिर उन्हें जहन्नुम की राह दिखाओ
24وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُم مَّسْئُولُونَ
और (हाँ ज़रा) उन्हें ठहराओ तो उनसे कुछ पूछना है
25مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ
(अरे कमबख्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की मदद नहीं करते
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
23आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 23

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Friday, October 2, 2026

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