अस-साफ्फात · 15/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَقَالُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ ۝١٥
Wa qaalooo in haazaa illaa sihrum mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और कहते हैं कि ये तो बस खुला हुआ जादू है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِنْ هَذَا إِلَّا سِحْرٌ مُبِينٌ — यह तो बिल्कुल स्पष्ट जादू है। "مُبِين" का अर्थ है स्पष्ट, खुला हुआ और ज़ाहिर।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब काफ़िरों और मुशरिकों ने रसूलुल्लाह ﷺ की ओर से आया हुआ सत्य सुना और उसे समझा, तो उनके पास कोई तर्क या प्रमाण नहीं था जिससे वे उसका खंडन कर सकें। इसलिए उन्होंने अपनी नादानी और हठधर्मिता से यह कहा कि "यह (क़ुरआन) तो बस एक खुला हुआ जादू है।" उनका यह कहना केवल सत्य को झुठलाने और लोगों को रोकने के लिए था, क्योंकि जादू तो वह चीज़ होती है जो असर तो करती है लेकिन उसमें कोई सच्चाई नहीं होती। जबकि क़ुरआन अपने अंदर सच्चाई, ज्ञान, हिदायत और चमत्कार रखता है, जो किसी जादूगर के बस की बात नहीं।

यह आयत हमें सिखाती है कि जब लोगों के पास सत्य का मुकाबला करने के लिए कोई दलील नहीं होती, तो वे झूठे आरोप लगाते हैं और सत्य को जादू, कल्पना या मिथ्या कहकर खारिज करने की कोशिश करते हैं। यह उनकी मजबूरी है, क्योंकि सत्य की रोशनी के सामने अंधेरा टिक नहीं सकता।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन करीम कोई जादू नहीं, बल्कि यह अल्लाह का कलाम है, जो हर युग में जीवित है और क़यामत तक जीवित रहेगा। जो लोग इसे जादू कहते थे, वे खुद जादू के मुक़ाबले में हार गए और उनके सामने इसकी सच्चाई साबित हो गई। आज भी जो लोग क़ुरआन को महज़ एक किताब या पुरानी बातें समझते हैं, वे उसी पुरानी सोच के वारिस हैं। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन को समझें, उस पर अमल करें और उसे अपनी ज़िंदगी में उतारें। क़ुरआन ही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह हमें क़ुरआन को समझने और उस पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 13-17 — सूरा अस-साफ्फात

13وَإِذَا ذُكِّرُوا لَا يَذْكُرُونَ
और जब उन्हें समझाया जाता है तो समझते नहीं हैं
14وَإِذَا رَأَوْا آيَةً يَسْتَسْخِرُونَ
और जब किसी मौजिजे क़ो देखते हैं तो (उससे) मसख़रापन करते हैं
15وَقَالُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और कहते हैं कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
16أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ
भला जब हम मर जाएँगे और ख़ाक और हड्डियाँ रह जाएँगे
17أَوَآبَاؤُنَا الْأَوَّلُونَ
तो क्या हम या हमारे अगले बाप दादा फिर दोबारा क़ब्रों से उठा खड़े किए जाँएगे
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
15आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 15

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Saturday, October 3, 2026

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