अस-साफ्फात · 12/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ ۝١٢
Bal`ajibta wa yaskharoon
📖 हिंदी अर्थ
बल्कि तुम (उन कुफ्फ़ार के इन्कार पर) ताज्जुब करते हो और वह लोग (तुमसे) मसख़रापन करते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • बल: बल्कि (यहाँ पर विस्मय और आश्चर्य को और अधिक स्पष्ट करने के लिए आया है)
  • अजिब्त: आपने आश्चर्य किया (अर्थात आप हैरान रह गए)
  • यस्खरून: वे मज़ाक उड़ाते हैं, उपहास करते हैं

विस्तृत तफ़सीर:

ऐ नबी! आप उन लोगों के हाल पर अचरज करते हैं जिन्होंने अल्लाह की क़ुदरत और उसकी तदबीर को देखते हुए भी उसे नहीं पहचाना। आप इस बात पर हैरान होते हैं कि जब सारे सबूत और निशानियाँ उनके सामने मौजूद हैं, फिर भी वे क़ियामत के दिन और दोबारा जी उठने को नहीं मानते। आपका यह आश्चर्य बिल्कुल सही है, क्योंकि यह इतनी साफ़ सच्चाई है कि इसे झुठलाना किसी भी अक़्लमंद के लिए मुमकिन नहीं होना चाहिए।

लेकिन इन लोगों का हाल यह है कि वे न सिर्फ़ इस सच्चाई को क़बूल नहीं करते, बल्कि आपके इस आश्चर्य पर भी हँसते हैं और आपका मज़ाक उड़ाते हैं। वे आपकी बातों को सुनकर उपहास करते हैं और आपको बेवक़ूफ़ समझते हैं। यह उनकी नादानी और सख़्त दिली की इंतिहा है कि जब उनके पास रहनुमाई और हिदायत आई है, तो वे उसका मज़ाक उड़ाते हैं।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि हक़ की राह पर चलने वालों को हमेशा लोगों के तानों और मज़ाक का सामना करना पड़ता है। लेकिन हमें इस बात की परवाह नहीं करनी चाहिए, क्योंकि अल्लाह का वादा है कि वह अपने नबी और उनके साथियों की मदद करता है। जब हम सच्चाई पर क़ायम रहेंगे, तो अल्लाह हमें कामयाबी देगा, चाहे लोग हम पर कितना भी हँसें।

याद रखिए! यह दुनिया फ़ानी है, और आख़िरत की कामयाबी ही असली कामयाबी है। जो लोग आज हक़ का मज़ाक उड़ा रहे हैं, वे कल पछताएँगे, लेकिन तब पछताना किसी काम नहीं आएगा। इसलिए हमें सब्र और इस्तिक़ामत के साथ अपने ईमान पर क़ायम रहना चाहिए और अल्लाह की रहमत की उम्मीद रखनी चाहिए।



📜 आयत 10-14 — सूरा अस-साफ्फात

10إِلَّا مَنْ خَطِفَ الْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُ شِهَابٌ ثَاقِبٌ
मगर जो (शैतान शाज़ व नादिर फरिश्तों की) कोई बात उचक ले भागता है तो आग का दहकता हुआ तीर उसका पीछा करता है
11فَاسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَم مَّنْ خَلَقْنَا ۚ إِنَّا خَلَقْنَاهُم مِّن طِينٍ لَّازِبٍ
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि उनका पैदा करना ज्यादा दुश्वार है या उन (मज़कूरा) चीज़ों का जिनको हमने पैदा किया हमने तो उन लोगों को लसदार मिट्टी से पैदा किया
12بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ
बल्कि तुम (उन कुफ्फ़ार के इन्कार पर) ताज्जुब करते हो और वह लोग (तुमसे) मसख़रापन करते हैं
13وَإِذَا ذُكِّرُوا لَا يَذْكُرُونَ
और जब उन्हें समझाया जाता है तो समझते नहीं हैं
14وَإِذَا رَأَوْا آيَةً يَسْتَسْخِرُونَ
और जब किसी मौजिजे क़ो देखते हैं तो (उससे) मसख़रापन करते हैं
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 12

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Saturday, October 3, 2026

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