अस-साफ्फात · 13/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَإِذَا ذُكِّرُوا لَا يَذْكُرُونَ ۝١٣
Wa izaa zukkiroo laa yazkuroon
📖 हिंदी अर्थ
और जब उन्हें समझाया जाता है तो समझते नहीं हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • ذُكِّرُوا: उन्हें नसीहत दी गई, याद दिलाई गई
  • لَا يَذْكُرُونَ: वे याद नहीं करते, ध्यान नहीं देते, नसीहत नहीं लेते

व्याख्या:

जब इन काफिरों और मुशरिकों को क़ुरआन की आयतों के माध्यम से नसीहत दी जाती है, या उन्हें वह बातें याद दिलाई जाती हैं जिन्हें वे भूल चुके हैं या जिनसे वे ग़ाफ़िल हैं, तो वे उस नसीहत से कोई लाभ नहीं उठाते। वे न तो उस पर ध्यान देते हैं, न उसे समझने की कोशिश करते हैं, और न ही उससे सबक़ सीखते हैं। उनके दिल इस क़दर सख्त हो चुके हैं कि कोई भी अच्छी बात उन पर असर नहीं करती। वे अपनी हठधर्मिता और अहंकार के कारण हर सच्ची बात को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।

यह आयत हमें बताती है कि नसीहत का असर तभी होता है जब दिल में पाने की चाहत हो। जिसका दिल सच्चाई के लिए बंद हो, उसके लिए कोई भी नसीहत काम नहीं आती। अल्लाह तआला ने कहीं और फ़रमाया: "क्या तुम लोगों को अच्छे काम की शिक्षा देते हो और खुद को भूल जाते हो?" — यानी नसीहत का असर तभी होता है जब इंसान खुद उस पर अमल करे।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपने दिलों को नरम रखना चाहिए और हर नसीहत को गौर से सुनना चाहिए। क़ुरआन की हर आयत हमारे लिए रहनुमाई है। जब हमें कोई अच्छी बात याद दिलाई जाए, तो हमें उसे अपने दिल में उतारना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह हमें उन लोगों में से न बनाए जो नसीहत सुनकर भी उसे भुला देते हैं। आमीन।



📜 आयत 11-15 — सूरा अस-साफ्फात

11فَاسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَم مَّنْ خَلَقْنَا ۚ إِنَّا خَلَقْنَاهُم مِّن طِينٍ لَّازِبٍ
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि उनका पैदा करना ज्यादा दुश्वार है या उन (मज़कूरा) चीज़ों का जिनको हमने पैदा किया हमने तो उन लोगों को लसदार मिट्टी से पैदा किया
12بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ
बल्कि तुम (उन कुफ्फ़ार के इन्कार पर) ताज्जुब करते हो और वह लोग (तुमसे) मसख़रापन करते हैं
13وَإِذَا ذُكِّرُوا لَا يَذْكُرُونَ
और जब उन्हें समझाया जाता है तो समझते नहीं हैं
14وَإِذَا رَأَوْا آيَةً يَسْتَسْخِرُونَ
और जब किसी मौजिजे क़ो देखते हैं तो (उससे) मसख़रापन करते हैं
15وَقَالُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और कहते हैं कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
13आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 13

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Saturday, October 3, 2026

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