अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ذُكِّرُوا: उन्हें नसीहत दी गई, याद दिलाई गई
- لَا يَذْكُرُونَ: वे याद नहीं करते, ध्यान नहीं देते, नसीहत नहीं लेते
व्याख्या:
जब इन काफिरों और मुशरिकों को क़ुरआन की आयतों के माध्यम से नसीहत दी जाती है, या उन्हें वह बातें याद दिलाई जाती हैं जिन्हें वे भूल चुके हैं या जिनसे वे ग़ाफ़िल हैं, तो वे उस नसीहत से कोई लाभ नहीं उठाते। वे न तो उस पर ध्यान देते हैं, न उसे समझने की कोशिश करते हैं, और न ही उससे सबक़ सीखते हैं। उनके दिल इस क़दर सख्त हो चुके हैं कि कोई भी अच्छी बात उन पर असर नहीं करती। वे अपनी हठधर्मिता और अहंकार के कारण हर सच्ची बात को नज़रअंदाज़ कर देते हैं।
यह आयत हमें बताती है कि नसीहत का असर तभी होता है जब दिल में पाने की चाहत हो। जिसका दिल सच्चाई के लिए बंद हो, उसके लिए कोई भी नसीहत काम नहीं आती। अल्लाह तआला ने कहीं और फ़रमाया: "क्या तुम लोगों को अच्छे काम की शिक्षा देते हो और खुद को भूल जाते हो?" — यानी नसीहत का असर तभी होता है जब इंसान खुद उस पर अमल करे।
इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि हमें अपने दिलों को नरम रखना चाहिए और हर नसीहत को गौर से सुनना चाहिए। क़ुरआन की हर आयत हमारे लिए रहनुमाई है। जब हमें कोई अच्छी बात याद दिलाई जाए, तो हमें उसे अपने दिल में उतारना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह हमें उन लोगों में से न बनाए जो नसीहत सुनकर भी उसे भुला देते हैं। आमीन।
📜 आयत 11-15 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 13
सूरा अस-साफ्फात आयत 13 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब उन्हें समझाया जाता है तो समझते नहीं हैंसूरा आयत 13/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 11–15. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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