अस-साफ्फात · 24/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُم مَّسْئُولُونَ ۝٢٤
Wa qifoohum innahum mas`ooloon
📖 हिंदी अर्थ
और (हाँ ज़रा) उन्हें ठहराओ तो उनसे कुछ पूछना है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَقِفُوهُمْ: उन्हें रोको, उन्हें खड़ा करो।
  • مَسْئُولُونَ: वे पूछे जाने वाले हैं, उनसे सवाल-जवाब किया जाएगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दृश्य का वर्णन कर रही है जो क़ियामत के दिन मुजरिमों (अपराधियों) के साथ होगा। जब वे जहन्नम की ओर ले जाए जाएंगे, तो अल्लाह के फ़रिश्तों को आदेश दिया जाएगा कि उन्हें जहन्नम में डालने से पहले रोक कर खड़ा कर लिया जाए। क्योंकि उनसे उनके सभी कर्मों, बोलों और क्रियाकलापों के बारे में पूछताछ की जानी है। यह कोई साधारण पूछताछ नहीं होगी, बल्कि यह उन्हें लज्जित करने वाली, उनके अपराधों को उनके सामने प्रस्तुत करने वाली और उन्हें बुरी तरह डांटने-फटकारने वाली पूछताछ होगी।

यह पूछताछ उनके हर छोटे-बड़े काम के बारे में होगी — उनके द्वारा बोले गए हर शब्द, उनके द्वारा किए गए हर कार्य, उनके द्वारा अर्जित की गई हर संपत्ति और उसे खर्च करने के तरीके के बारे में। उनसे पूछा जाएगा कि उन्होंने दुनिया में अपनी ज़िंदगी कैसे बिताई, अपने ज्ञान पर कैसे अमल किया, अपने शरीर को किन कामों में लगाया और अपनी नेमतों का उपयोग किस तरह किया।

इस पूछताछ के बाद ही उन्हें जहन्नम की ओर ले जाया जाएगा। यह आयत हमें चेतावनी देती है कि हम अपने हर काम और हर बात के लिए ज़िम्मेदार हैं। अल्लाह तआला ने हमें आज़ादी तो दी है, लेकिन यह आज़ादी बेलगाम नहीं है — हमें अपने हर अमल का हिसाब देना होगा।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अगर हम आज अपने आपको रोक लें — गुनाहों से, बुरी बातों से, ज़ुल्म से — तो क़ियामत के दिन हमें उस रोकने वाले फ़रिश्ते का सामना नहीं करना पड़ेगा। बल्कि हम उन खुशनसीब लोगों में होंगे जिनका हिसाब आसान होगा और जो जन्नत की नेमतों से नवाज़े जाएंगे। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएं, ताकि उस दिन हमारा सामना रहमत के साथ हो, अज़ाब के साथ नहीं।



📜 आयत 22-26 — अस-साफ्फात

22۞ احْشُرُوا الَّذِينَ ظَلَمُوا وَأَزْوَاجَهُمْ وَمَا كَانُوا يَعْبُدُونَ
(और फ़रिश्तों को हुक्म होगा कि) जो लोग (दुनिया में) सरकशी करते थे उनको और उनके साथियों को और खुदा को छोड़कर जिनकी परसतिश करते हैं
23مِن دُونِ اللَّهِ فَاهْدُوهُمْ إِلَىٰ صِرَاطِ الْجَحِيمِ
उनको (सबको) इकट्ठा करो फिर उन्हें जहन्नुम की राह दिखाओ
24وَقِفُوهُمْ ۖ إِنَّهُم مَّسْئُولُونَ
और (हाँ ज़रा) उन्हें ठहराओ तो उनसे कुछ पूछना है
25مَا لَكُمْ لَا تَنَاصَرُونَ
(अरे कमबख्तों) अब तुम्हें क्या होगा कि एक दूसरे की मदद नहीं करते
26بَلْ هُمُ الْيَوْمَ مُسْتَسْلِمُونَ
(जवाब क्या देंगे) बल्कि वह तो आज गर्दन झुकाए हुए हैं
अस-साफ्फातकुरान सूची
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24आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 24

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Tuesday, August 18, 2026

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