अस-साफ्फात · 11/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
فَاسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَم مَّنْ خَلَقْنَا ۚ إِنَّا خَلَقْنَاهُم مِّن طِينٍ لَّازِبٍ ۝١١
Fastaftihim ahum ashaddu khalqan am man khalaqnaa; innaa khalaqnaahum min teenil laazib
📖 हिंदी अर्थ
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि उनका पैदा करना ज्यादा दुश्वार है या उन (मज़कूरा) चीज़ों का जिनको हमने पैदा किया हमने तो उन लोगों को लसदार मिट्टी से पैदा किया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَاسْتَفْتِهِمْ: उनसे पूछो, उन्हें खबरदार करो।
  • أَشَدُّ خَلْقًا: सृष्टि में अधिक कठिन या अधिक शक्तिशाली।
  • طِينٍ لَّازِبٍ: चिपचिपी मिट्टी जो हाथों से लिपट जाए, लसदार और चिपकने वाली मिट्टी।

तफसीर:

ऐ नबी! इन मुनकिरीन-ए-हश्र (जो क़ियामत के दिन को नहीं मानते) से पूछो और उन्हें उनकी सोच पर टोकते हुए कहो: क्या उनका पैदा करना ज़्यादा मुश्किल है या उन चीज़ों का पैदा करना जो हमने पैदा कीं—जैसे आसमान, ज़मीन, पहाड़, फ़रिश्ते और ये सारी विशाल कायनात? ये सब तो उनके पैदा करने से कहीं बड़ी और कठिन मख़लूक़ हैं, फिर भी वे इन्हें देखते हैं और इनके पैदा करने वाले की क़ुदरत को नहीं मानते।

हक़ीक़त यह है कि हमने उन्हें (यानी इन इंसानों को) एक बहुत ही कमज़ोर और हक़ीर चीज़ से पैदा किया—चिपचिपी मिट्टी से, जो आपस में चिपक जाती है। जब हम उन्हें इस कमज़ोर मिट्टी से पैदा कर सके, तो क्या उन्हें दोबारा ज़िंदा करना हमारे लिए मुश्किल है? हरगिज़ नहीं! जिस रब ने उन्हें पहली बार पैदा किया, वह उन्हें दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी क़ुदरत रखता है।

यह आयत इंसान को उसकी हैसियत याद दिलाती है—वह मिट्टी से बना है, कमज़ोर है, और उसे अपने रब की क़ुदरत के आगे सर झुकाना चाहिए। जो ख़ुदा इतनी बड़ी कायनात का मालिक है, उसके लिए मुर्दों को ज़िंदा करना कुछ भी मुश्किल नहीं। यही ईमान की बुनियाद है—कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, और उसका वादा (क़ियामत का दिन) सच्चा है।

इस आयत से हमें सबक़ मिलता है कि हम अपनी अक़्ल और समझ को इस्तेमाल करें, कायनात पर ग़ौर करें, और उस रब की ताक़त को पहचानें जिसने हमें मिट्टी से उठाकर इंसान बनाया। जब हम अपनी कमज़ोर शुरुआत को याद करते हैं, तो हमारे दिल में अल्लाह की बुज़ुर्गी और उसकी रहमत का एहसास बढ़ता है, और हम उसकी इबादत की तरफ़ राग़िब होते हैं। यही रास्ता हमें जन्नत की तरफ ले जाता है, और यही अल्लाह का वादा है जो कभी नहीं टूटता।



📜 आयत 9-13 — अस-साफ्फात

9دُحُورًا ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ وَاصِبٌ
और उनके लिए पाएदार अज़ाब है
10إِلَّا مَنْ خَطِفَ الْخَطْفَةَ فَأَتْبَعَهُ شِهَابٌ ثَاقِبٌ
मगर जो (शैतान शाज़ व नादिर फरिश्तों की) कोई बात उचक ले भागता है तो आग का दहकता हुआ तीर उसका पीछा करता है
11فَاسْتَفْتِهِمْ أَهُمْ أَشَدُّ خَلْقًا أَم مَّنْ خَلَقْنَا ۚ إِنَّا خَلَقْنَاهُم مِّن طِينٍ لَّازِبٍ
तो (ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो तो कि उनका पैदा करना ज्यादा दुश्वार है या उन (मज़कूरा) चीज़ों का जिनको हमने पैदा किया हमने तो उन लोगों को लसदार मिट्टी से पैदा किया
12بَلْ عَجِبْتَ وَيَسْخَرُونَ
बल्कि तुम (उन कुफ्फ़ार के इन्कार पर) ताज्जुब करते हो और वह लोग (तुमसे) मसख़रापन करते हैं
13وَإِذَا ذُكِّرُوا لَا يَذْكُرُونَ
और जब उन्हें समझाया जाता है तो समझते नहीं हैं
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अनुवाद — अस-साफ्फात 11

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Tuesday, August 18, 2026

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