अस-साफ्फात · 17/182
अनुवाद उच्चारण — अस-साफ्फात
أَوَآبَاؤُنَا الْأَوَّلُونَ ۝١٧
Awa aabaa`unal awwaloon
📖 हिंदी अर्थ
तो क्या हम या हमारे अगले बाप दादा फिर दोबारा क़ब्रों से उठा खड़े किए जाँएगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوَآبَاؤُنَا (और क्या हमारे बाप-दादा) — यानी हमारे पूर्वज।
  • الْأَوَّلُونَ (पहले वाले) — यानी जो हमसे बहुत पहले गुज़र चुके हैं, अति प्राचीन लोग।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब नबी ﷺ उन्हें आख़िरत के दिन और मुर्दों के दोबारा जी उठने की ख़बर देते थे, तो ये काफ़िर लोग अत्यधिक आश्चर्य और इनकार के साथ कहते थे: “क्या हम मरने के बाद, जब हम मिट्टी और बिखरी हुई हड्डियाँ बन जाएँगे, तो क्या सचमुच हम दोबारा ज़िंदा करके उठाए जाएँगे? और क्या हमारे वे अगले बाप-दादा भी, जो हमसे बहुत पहले मर चुके हैं, वे भी उठाए जाएँगे?” वे इस बात को बिल्कुल असंभव और अक़्ल से दूर समझते थे, क्योंकि उनके पूर्वज तो और भी पुराने थे, उनका दोबारा जी उठना उनकी नज़र में और भी अजीब था।

यह उनका सिर्फ़ इनकार ही नहीं था, बल्कि वे इसे जादू और झूठ कहकर उड़ाते थे। उनका कहना था कि यह तो सिर्फ़ एक खुला जादू है। लेकिन अल्लाह तआला ने इसका जवाब दिया कि जिसने पहली बार पैदा किया, वही दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है। मौत के बाद जी उठना अल्लाह के लिए बिल्कुल आसान है, जैसे उसने पहली बार पैदा किया।

दावती पहलू:

ऐ इंसान! ज़रा सोच — जिस अल्लाह ने तुझे पहली बार पैदा किया, क्या वह तुझे दोबारा ज़िंदा नहीं कर सकता? यह दुनिया एक इम्तिहान है, और आख़िरत वह दिन है जब हर अच्छाई और बुराई का बदला मिलेगा। क़ुरआन हमें यही सिखाता है कि मौत अंत नहीं, बल्कि एक नई ज़िंदगी का दरवाज़ा है। जो लोग इस पर यक़ीन रखते हैं, वे अपनी ज़िंदगी को बामक़सद जीते हैं — वे जानते हैं कि उनके हर अमल का हिसाब होगा। यही ईमान इंसान को नेकी, सब्र और अच्छे अख़्लाक़ की तरफ़ ले जाता है। क़ुरआन की यह ख़बर सच्ची है, और जिस दिन वह वादा पूरा होगा, उस दिन हर शख्स देख लेगा कि उसने क्या कमाया था।



📜 आयत 15-19 — अस-साफ्फात

15وَقَالُوا إِنْ هَٰذَا إِلَّا سِحْرٌ مُّبِينٌ
और कहते हैं कि ये तो बस खुला हुआ जादू है
16أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ
भला जब हम मर जाएँगे और ख़ाक और हड्डियाँ रह जाएँगे
17أَوَآبَاؤُنَا الْأَوَّلُونَ
तो क्या हम या हमारे अगले बाप दादा फिर दोबारा क़ब्रों से उठा खड़े किए जाँएगे
18قُلْ نَعَمْ وَأَنتُمْ دَاخِرُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ (ज़रूर उठाए जाओगे)
19فَإِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٌ وَاحِدَةٌ فَإِذَا هُمْ يَنظُرُونَ
और तुम ज़लील होगे और वह (क़यामत) तो एक ललकार होगी फिर तो वह लोग फ़ौरन ही (ऑंखे फाड़-फाड़ के) देखने लगेंगे
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अनुवाद — अस-साफ्फात 17

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Tuesday, August 18, 2026

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