अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَا وَيْلَنَا: "हाय हमारी तबाही!" — यह अरबी में विपत्ति और अफसोस के समय कहा जाने वाला वाक्य है, जिसका अर्थ है अपने ऊपर विनाश को बुलाना।
- يَوْمُ الدِّينِ: यानी हिसाब और जज़ा (बदला) का दिन, जिस दिन अल्लाह हर बंदे को उसके अमल का पूरा बदला देगा।
तफसीर (व्याख्या):
जब क़यामत का दिन आएगा और काफ़िरों को अपने सामने वह सब कुछ दिखाई देगा जिसे वे झुठलाया करते थे — यानी हश्र (इकट्ठा होना), हिसाब और जज़ा — तो वे हैरान और शर्मिंदा होकर कहेंगे: "हाय हमारी बर्बादी! यह वही दिन है जिसे हम मानने से इनकार करते थे, यह हिसाब और बदले का दिन है!" उस वक्त उन्हें अपनी ग़लती का एहसास होगा, लेकिन पछतावा उनके किसी काम न आएगा। यह वह दिन है जिसमें अल्लाह तआला हर इंसान को उसके नेक या बुरे कर्मों का पूरा बदला देगा — नेक लोगों को जन्नत और बुरे लोगों को जहन्नम। यह अफसोस और पश्चाताप का वाक्य उन लोगों की ज़ुबान से निकलेगा जिन्होंने दुनिया में आख़िरत को भुला दिया और सिर्फ़ अपनी ख्वाहिशों की पैरवी की।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सचेत करती है कि यह दुनिया हमेशा नहीं रहेगी। एक दिन ज़रूर आएगा जब हर इंसान अपने अमल का सामना करेगा। अल्लाह तआला ने हमें यह खबर इसलिए दी है ताकि हम आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधार लें और उस दिन के अफसोस से बचें। रसूलुल्लाह ﷺ ने हमें सिखाया है कि जो शख्स दुनिया में अल्लाह की इबादत करता है और उसके हुक्मों का पालन करता है, उसके लिए यह दिन राहत और खुशी का दिन होगा। इसलिए आज ही अपने रब की तरफ रुजू करें, अपनी गलतियों से तौबा करें और अच्छे कर्मों को अपना ज़रिया बनाएं। याद रखें, अल्लाह बड़ा मेहरबान है और वह अपने बंदों की तौबा कबूल करता है। जो लोग इस दुनिया में हिदायत पा लें, उनके लिए उस दिन कोई डर नहीं और न ही कोई ग़म।
📜 आयत 18-22 — अस-साफ्फात
अनुवाद — अस-साफ्फात 20
सूरा अस-साफ्फात आयत 20 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कहेंगे हाए अफसोस ये तो क़यामत का दिन हैसूरा आयत 20/182 — अस-साफ्फात الصافات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अस-साफ्फात सुनें, अस-साफ्फात अनुवाद, अस-साफ्फात mp3, अस-साफ्फात pdf. आयत 18–22. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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