अस-साफ्फात · 20/182
अनुवाद उच्चारण — सूरा अस-साफ्फात
وَقَالُوا يَا وَيْلَنَا هَٰذَا يَوْمُ الدِّينِ ۝٢٠
Qa qaaloo yaa wailanaa haazaa Yawmud-Deen
📖 हिंदी अर्थ
और कहेंगे हाए अफसोस ये तो क़यामत का दिन है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَا وَيْلَنَا: "हाय हमारी तबाही!" — यह अरबी में विपत्ति और अफसोस के समय कहा जाने वाला वाक्य है, जिसका अर्थ है अपने ऊपर विनाश को बुलाना।
  • يَوْمُ الدِّينِ: यानी हिसाब और जज़ा (बदला) का दिन, जिस दिन अल्लाह हर बंदे को उसके अमल का पूरा बदला देगा।

तफसीर (व्याख्या):

जब क़यामत का दिन आएगा और काफ़िरों को अपने सामने वह सब कुछ दिखाई देगा जिसे वे झुठलाया करते थे — यानी हश्र (इकट्ठा होना), हिसाब और जज़ा — तो वे हैरान और शर्मिंदा होकर कहेंगे: "हाय हमारी बर्बादी! यह वही दिन है जिसे हम मानने से इनकार करते थे, यह हिसाब और बदले का दिन है!" उस वक्त उन्हें अपनी ग़लती का एहसास होगा, लेकिन पछतावा उनके किसी काम न आएगा। यह वह दिन है जिसमें अल्लाह तआला हर इंसान को उसके नेक या बुरे कर्मों का पूरा बदला देगा — नेक लोगों को जन्नत और बुरे लोगों को जहन्नम। यह अफसोस और पश्चाताप का वाक्य उन लोगों की ज़ुबान से निकलेगा जिन्होंने दुनिया में आख़िरत को भुला दिया और सिर्फ़ अपनी ख्वाहिशों की पैरवी की।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सचेत करती है कि यह दुनिया हमेशा नहीं रहेगी। एक दिन ज़रूर आएगा जब हर इंसान अपने अमल का सामना करेगा। अल्लाह तआला ने हमें यह खबर इसलिए दी है ताकि हम आज ही अपनी ज़िंदगी को सुधार लें और उस दिन के अफसोस से बचें। रसूलुल्लाह ﷺ ने हमें सिखाया है कि जो शख्स दुनिया में अल्लाह की इबादत करता है और उसके हुक्मों का पालन करता है, उसके लिए यह दिन राहत और खुशी का दिन होगा। इसलिए आज ही अपने रब की तरफ रुजू करें, अपनी गलतियों से तौबा करें और अच्छे कर्मों को अपना ज़रिया बनाएं। याद रखें, अल्लाह बड़ा मेहरबान है और वह अपने बंदों की तौबा कबूल करता है। जो लोग इस दुनिया में हिदायत पा लें, उनके लिए उस दिन कोई डर नहीं और न ही कोई ग़म।



📜 आयत 18-22 — सूरा अस-साफ्फात

18قُلْ نَعَمْ وَأَنتُمْ دَاخِرُونَ
(ऐ रसूल) तुम कह दो कि हाँ (ज़रूर उठाए जाओगे)
19فَإِنَّمَا هِيَ زَجْرَةٌ وَاحِدَةٌ فَإِذَا هُمْ يَنظُرُونَ
और तुम ज़लील होगे और वह (क़यामत) तो एक ललकार होगी फिर तो वह लोग फ़ौरन ही (ऑंखे फाड़-फाड़ के) देखने लगेंगे
20وَقَالُوا يَا وَيْلَنَا هَٰذَا يَوْمُ الدِّينِ
और कहेंगे हाए अफसोस ये तो क़यामत का दिन है
21هَٰذَا يَوْمُ الْفَصْلِ الَّذِي كُنتُم بِهِ تُكَذِّبُونَ
(जवाब आएगा) ये वही फैसले का दिन है जिसको तुम लोग (दुनिया में) झूठ समझते थे
22۞ احْشُرُوا الَّذِينَ ظَلَمُوا وَأَزْوَاجَهُمْ وَمَا كَانُوا يَعْبُدُونَ
(और फ़रिश्तों को हुक्म होगा कि) जो लोग (दुनिया में) सरकशी करते थे उनको और उनके साथियों को और खुदा को छोड़कर जिनकी परसतिश करते हैं
अस-साफ्फातकुरान सूची
182आयत
मक्कीअवतरण स्थान
20आयत

अनुवाद — अस-साफ्फात 20

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Friday, October 2, 2026

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